Petrol vs EV: अगर आप नई कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो पेट्रोल और इलेक्ट्रिक (EV) के बीच चुनाव आसान नहीं है। उदाहरण के तौर पर Maruti Suzuki Dzire और Tata Tiago EV को लें। Dzire शानदार माइलेज देती है, लेकिन Tiago EV की रनिंग कॉस्ट महज 0.80–1 रुपये प्रति किमी है।5 साल में 75,000 किमी चलने पर Dzire में करीब 3.8 लाख रुपये का पेट्रोल खर्च हो सकता है, जबकि Tiago EV में लगभग 65,000 रुपये की बिजली लागत आएगी। यानी शुरुआती कीमत का अंतर कुछ ही सालों में कवर हो सकता है।
मिड-साइज SUV सेगमेंट
SUV कैटेगरी में भी यही गणित लागू होता है। जैसे Hyundai Venue जैसी पेट्रोल SUV शहर में औसतन 10–12 kmpl देती है। ज्यादा वजन और इंजन साइज के कारण फ्यूल खर्च बढ़ता है। EV में बेहतर टॉर्क और कम प्रति किमी लागत सीधी बचत दिलाती है।
प्रीमियम सेगमेंट
प्रीमियम SUV जैसे Hyundai Creta और Kia Seltos लग्जरी तो देती हैं, लेकिन फ्यूल बिल भी ज्यादा होता है। इसके मुकाबले MG ZS EV या Hyundai Kona Electric जैसी EV पर रोड टैक्स छूट मिलती है। 5 साल में करीब 6 लाख रुपये तक की बचत संभव है।
मेंटेनेंस और इंश्योरेंस
पेट्रोल कार का 5 साल का सर्विस खर्च 70,000–90,000 रुपये तक जा सकता है, जबकि EV में यह 15,000–25,000 रुपये के बीच रहता है। हालांकि EV का इंश्योरेंस 10–15% महंगा हो सकता है, लेकिन टैक्स छूट से संतुलन बन जाता है।
रीसेल वैल्यू
ICE कारों की रीसेल स्थिर है, लेकिन EV में 8 साल की बैटरी वारंटी भरोसा बढ़ा रही है। अनुमान है कि 3–5 साल में EV अपनी कीमत का 55–65% तक वापस दिला सकती है।
अगर आपकी ड्राइविंग शहर तक सीमित है और सालाना रनिंग ज्यादा है, तो EV समझदारी का सौदा है। लंबी दूरी और सीमित बजट के लिए पेट्रोल कार अभी भी सुरक्षित विकल्प मानी जाती है।
(मंजू कुमारी)