Toll Tax Rule: भारत में तेजी से नए एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे का निर्माण किया जा रहा है, जिससे यात्रा को पहले से ज्यादा तेज और सुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि कई ऐसे एक्सप्रेसवे हैं जो अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुए हैं, लेकिन उन पर टोल टैक्स लिया जा रहा था। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, जिससे आम लोगों को राहत मिलने वाली है।
सरकार का बड़ा निर्णय
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में संशोधन को अधिसूचित कर दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य उन यात्रियों को राहत देना है जो अधूरे या आंशिक रूप से चालू एक्सप्रेसवे पर सफर कर रहे हैं।
क्या होगा फायदा?
नए नियम के लागू होने के बाद अब ऐसे एक्सप्रेसवे, जो पूरी तरह से तैयार नहीं हुए हैं, उन पर पूरी लंबाई के हिसाब से टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। यानी जहां सड़क का निर्माण अधूरा है, वहां यात्रियों से कम शुल्क लिया जाएगा। इससे लोगों की जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम होगा और उन्हें उचित शुल्क पर सफर करने का मौका मिलेगा।
पहले क्या था नियम
अब तक आंशिक रूप से शुरू किए गए एक्सप्रेसवे पर टोल शुल्क नेशनल हाईवे के मुकाबले करीब 25 फीसदी ज्यादा रखा जाता था। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि यात्रियों को बेहतर, तेज और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल सके। लेकिन कई बार ऐसा होता था कि पूरा एक्सप्रेसवे तैयार नहीं होने के बावजूद पूरे खंड का टोल वसूला जाता था, जिससे लोगों को परेशानी होती थी।
नया नियम हुआ लागू
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यह नया प्रावधान 15 फरवरी से पूरे देश में लागू कर दिया गया है। यह नियम संशोधन लागू होने की तारीख से एक साल तक या फिर संबंधित एक्सप्रेसवे के पूरी तरह शुरू होने तक प्रभावी रहेगा। इससे यात्रियों को सीधे तौर पर आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
(मंजू कुमारी)
