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Surya Grahan 2018: जानिए क्या होता है सूर्य और चंद्र ग्रहण में अंतर, ग्रहण का ये है ज्योतिषीय महत्व

सूर्य अथवा चंद्र ग्रहण एक खोगोलीय घटनाक्रम है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य और चंद्रमा का मनुष्य के जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।

Surya Grahan 2018: जानिए क्या होता है सूर्य और चंद्र ग्रहण में अंतर, ग्रहण का ये है ज्योतिषीय महत्व
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सूर्य अथवा चंद्र ग्रहण एक खोगोलीय घटनाक्रम है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य और चंद्रमा का मनुष्य के जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। मनुष्य के जीवन में उर्जा का प्रमुख स्रोत सूर्य है। इसके अलावे ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रमा भी व्यक्ति के जीवन में खास महत्व रखता है। सूर्य अथवा चंद्र ग्रहण का अध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों महत्व है।

सूर्य ग्रहण क्यों लगता है?

खगोलीय घटनाक्रम में पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और चंद्रमा पृथ्वी की। इसी क्रम में कभी-कभी चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से होकर गुजरता है तो पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण या आंशिक रूप से ढका हुआ नजर आता है। इसी स्थिति को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

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क्यों लगता है चन्द्र ग्रहण?

जब सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती हुई पृथ्वी एक सीध में अपने उपग्रह चंद्रमा और सूर्य के बीच आ जाती है। ऐसी अवस्था में चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणें रुक जाती है और पृथ्वी की प्रतिछाया उसपर पड़ने लगती है। जिस कारण उसका दिखना बंद हो जाता है। इस खगोलीय घटनाक्रम को चंद्र ग्रहण कथा जाता है।

सूर्य ग्रहण का ज्योतिषीय महत्व

सूर्य ग्रहण के बारे में विशेष जानकारी मत्स्य पुराण में मिलती है। जिसके अनुसार सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण की कथा का संबंध राहु और केतु से है। इस कथा के अनुसार स्वरभानु नाम का राक्षस अपना रूप बदलकर सूर्य और चंद्रमा के बीच बैठ गया। जिसके बाद सूर्य-चन्द्र दोनों देवताओं ने उसे पहचान लिया और इसकी शिकायत भगवान विष्णु से कर दी। विष्णु जी ने उसी वक्त स्वरभानु नामक राक्षस का सर धर से अलग कर दिया। राक्षस का सिर राहु कहलाया और धर केतु के रूप में जाना गया। कथा के

अनुसार राहु चंद्रमा और सूर्य को अपने अंदर समाहित करने के लिए दौड़ने लगा। परंतु भगवान विष्णु ने ऐसा होने नहीं दिया। मान्यता के अनुसार उसी दिन से माना जाता है कि जब सूर्य और चंद्रमा निकट आते हैं तो उन्हें ग्रहण लग जाता है। इसी घटनाक्रम को ग्रहण के तौर पर जाना जाता है।

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ग्रहण के समय रखें इन बातों का ध्यान

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण काल जिसे सूतक भी कहते हैं। इस समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए। सूतक के दौरान तेल लगाना, भोजन करना, पानी पीना, मल-मूत्र त्याग करना आदि निषेध माना गया है।

ग्रहण काल के समय सबसे अधिक गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण किसी भी अवस्था में नहीं देखना चाहिए। इस दौरान उन्हें

सब्जी काटने या सिलाई करने का भी काम नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

ग्रहण के समय अगर घर में खाना बना हुआ हो तो या तो ग्रहण के बाद उसे गाय को दे देना चाहिए। ग्रहण से पहले उसमें तुलसी के पत्ते डालकर रखने चाहिए। ग्रहण समाप्त हो जाने पर स्नान करना आवश्यक होता है। स्नान कर ब्राह्‌मण को दान देने का भी विधान है।

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