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शुक्रवार व्रत विधि और कथा

मां संतोषी के व्रत में खटाई बिल्कुल भी नहीं खाई जाती और न हीं किसी को खट्टी चींजे बांटी जाती। अगर आप भी मां संतोषी का व्रत रखना चाहते हैं और आपको मां संतोषी के व्रत की विधि और मां संतोषी के व्रत की कथा के बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे

शुक्रवार व्रत विधि और कथाShukrawar Vrat Vidhi or Shukrawar Vrat katha

शुक्रवार के दिन मां संतोषी की पूजा का विधान है। माना जाता है कि अगर कोई स्त्री मां संतोषी की विधि विधान से पूजा करती है। तो उसे जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। संतोषी माता के व्रत में एक बात का विशेष तौर पर ध्यान रखना होता है और वह यह है कि मां संतोषी के व्रत में खटाई बिल्कुल भी नहीं खाई जाती और न हीं किसी को खट्टी चींजे बांटी जाती। अगर आप भी मां संतोषी का व्रत रखना चाहते हैं और आपको मां संतोषी के व्रत की विधि और मां संतोषी के व्रत की कथा के बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो चलिए जानते हैं मां संतोषी के व्रत की विधि और मां संतोषी के व्रत की कथा के बारे में


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शुक्रवार व्रत विधि (Shukrawar Vrat Vidhi)

1. सबसे पहले सूबह जल्दी उठें स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें । इसके बाद व्रत का संकल्प लें।

2.इसके बाद मां संतोषी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

3.इसके बाद कलश की स्थापना करें । लेकिन याद रखें कलश तांबे का ही हो।इसके बाद किसी बड़े पात्र में गुड़ और चने का प्रसाद रखें।

4. इसके बाद मां संतोषी का विधिवत पूजन करें , उनकी कथा सुने और अंत में मां संतोषी की आरती उतारें।

5.अंत में जल से भरे पात्र का जल पूरे घर में छिड़क दें । संतोषी माता के व्रत में खटाई का बिल्कुल भी प्रयोग न करें और न ही घर में किसी को करने दें।


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शुक्रवार व्रत कथा (Shukrawar Vrat katha)

एक समय की बात है एक नगर में एक बुढ़िया और उसका बेटा रहा करता था। कुछ समय बाद उस बुढिया ने अपने बेटे का विवाह कर दिया । विवाह के बाद वह अपनी बहू से सारे काम करवाने लगी। बहू को किसी न किसी बात से परेशान करने लगी। बहू घर का सारा काम करती थी और बुढिया उसे ठीक से खाना भी नहीं देती थी।

यह सब उसका बेटा चुपचाप देखता था और इन सब से परेशान होकर उसने शहर जाने का फैसला किया । उसने अपनी मां और बीबी को शहर जान के बात बता दी । बुढिया के बेटे ने अपनी पत्नी से कुछ निशानी देने के लिए कहा । तो वह रोने लगी कि मेरे पास तो तुम्हे देने के लिए कुछ नहीं है और उसके चरणों में गिर गई । इसके बाद वह शहर चला गया ।

एक दिन बुढि़या की बहू घर के काम से बाहर गई । वहां उसने देखा कि बहुत सी स्त्रियां संतोषी माता की पूजा कर रही है। उसने उन स्त्रियों से व्रत की विधि जानी । तब उन स्त्रियों ने उसे कहा कि एक लौटे में जल और गुड़ और चने का प्रसाद लेकर मां कि पूजा करे और इस दिन खटाई बिल्कुल भी न खाए । उसने ऐसा ही किया मां की कृपा से उसके पति की चिट्ठी और पैसे आने लगे।

उसने मां से कहा कि हे मां जब मेरे पति आ जाएंगे तो मैं उद्यापन करूंगी। संतोषी माता की कृपा से उसका पति भी आ गया । इसके बाद उसने व्रत का उद्यापन किया। लेकिन उसकी पड़ोस में रहने वाली एक स्त्री उससे बहुत अधिक चिड़ती थी । उसने अपने बच्चों को खटाई खाने के लिए सीखा दिया । इसके बाद बच्चों ने ऐसा ही किया ।

इससे मां क्रोधित हो गई और उसके बाद उसके पति को राजा के सिपाही पकड़कर ले गए । इसके बाद बुढ़िया की बहू ने मां से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी और फिर से उद्यापन किया । जिसके बाद उसकी सभी परेशानियां समाप्त हो गई और उसे पुत्र की प्राप्ति हुई।

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