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शिवलिंग की परिक्रमा करते समय ध्यान रखें यह बात, वरना रूद्र रूप में शिव कर देते हैं नाश

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 27 2017 6:39PM IST
शिवलिंग की परिक्रमा करते समय ध्यान रखें यह बात, वरना रूद्र रूप में शिव कर देते हैं नाश

भगवान शिव को भोले भंडारी कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये बहुत ही भोले हैं। भक्त की थोड़ी सी भक्ति देखकर इनका हृदय द्रवित हो जाता है और उसकी मनोकामना पूरी कर देते हैं। इसके अलावे इनका दूसरा रूप रूद्र भी है।

ऐसा कहा जाता है कि भक्त की आस्था से प्रसन्न होकर भोले रूप में मनचाहा वरदान देते हैं। लेकिन यदि कोई भक्त उन्हें निराश करे तो उसे शिव के रौद्र रूप का शिकार होना पड़ता है। यही कारण है कि शिव जी की पूजा में गलतियां करना निषेध माना गया है।

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ये अलग बात है कि शिव जी अपने भक्तों की भूल-चूक को माफ कर देते हैं। लेकिन शास्त्र यह कहता है कि शिव की पूजा में किसी भी भूल का मतलब दण्ड पाना है। इसलिए आज हम आपको शिव की पूजा में किए जाने वाले शिवलिंग की परिक्रमा से जुड़े शास्त्रीय नियम बता रहे हैं।

शिवलिंग परिक्रमा

शिवलिंग पूजा में अर्पित की गई सामग्रियों के साथ-साथ शिवलिंग परिक्रमा का भी महत्व शास्त्रों एवं वेदों में बताया गया है। कथा के अनुसार जो कोई भी शिवलिंग की जल की निकासी यानि कि निर्मली को लांघेगा वह पापी कहलाएगा और उसके भीतर की शक्ति छीन ली जाती है।

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यदि किसी मंदिर में शिवलिंग की निर्मली दिखाई नहीं दे रही है यानि कि उसे जमीन के नीच बनाया गया है तो चारों ओर परिक्रमा की जा सकती है अन्यथा निर्मली तक परिक्रमा करनी चाहिए, यानि की आधी परिक्रमा।

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