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Shardiya Navratri 2019 : सन्धि पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि कथा, मंत्र और मां चामुंडा की आरती

Shardiya Navratri 2019 शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) इस साल 2019 में 29 सितंबर 2019 (29 September 2019) से प्रारंभ हो रही है। शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि की संध्या को मध्य संधि पूजा की जाती है, संधि पूजा में लोग मां चामुंडा की पूजा करते हैं, इस दिन लोग मंदिरों में कद्दू और ककड़ी की बलि भी देते हैं, संधि पूजा में 108 दीपक और 108 कमल के पुष्प चढ़ाना अत्यंत ही आवश्क होते हैं तो आइए जानते हैं सन्धि पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि कथा, मंत्र और मां चामुंडा की आरती

Navratri 2019 : सन्धि पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि कथा, मंत्र और मां चामुंडा की आरतीNavratri 2019 Shardiya Navratri Date and Time Importance Puja Vidhi Katha Mantra And Chamunda Aarti

Navratri 2019 नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि के मध्य की संध्या को संधि पूजा की जाती है। यह पूजा अष्टमी तिथि के आखिरी 24 मिनट से लेकर नवमी तिथि के प्रारंभ के 24 मिनट तक की जाती है। संधि पूजा को विशेष रूप से बंगाल में मनाया जाता है। संधि पूजा में लोग पारंपरिक वेश भूषा धारण करते हैं इस दिन को लोग बुराई पर अच्छाई के रूप में मनाते हैं तो आइए जानते हैं सन्धि पूजा 2019 में कब है,संधि पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि कथा, मंत्र और मां चामुंडा की आरती


संधि पूजा 2019 तिथि (Sandhi Puja 2019 Tithi)

6 अक्टूबर 2019

संधि पूजा 2019 शुभ मुहूर्त (Sandhi Puja 2019 Subh Muhurat)

सन्धि पूजा मुहूर्त - सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 11 बजकर 18 मिनट तक (6 अक्टुबर 2019)

अष्टमी तिथि प्रारम्भ - सुबह 9 बजकर 51 मिनट से ( 5 अक्टूबर 2019)

अष्टमी तिथि समाप्त - अगले दिन सुबह 10 बजकर 54 मिनट तक (6 अक्टूबर 2019)


संधि पूजा का महत्व (Sandhi Puja Ka Mahatva)

संधि पूजा नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि के संध्या के समय पर की जाती है। यह पूजा अष्टमी तिथि के आखिरी 24 मिनट से लेकर नवमी तिथि के प्रारंभ के 24 मिनट तक की जाती है। शास्त्रों के अनुसार जिस समय मां चामुण्डा और महिषासुर के बीच में युद्ध हुआ था। उस समय चण्ड और मुण्ड ने मां चामुण्डा की पीठ के पीछे से वार किया था। इस बात से मां को इतना क्रोध आया कि उनका मुख नीला पड़ गया और मां चामुण्डा ने उन दोनों का वध कर दिया। संध्या पूजा हर साल ठीक इसी मुहूर्त में मनाई जाती है।

यह बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली मुहूर्त होता है। क्योंकि इसी समय मां ने उग्र रूप लिया था। इसी कारण से संधि पूजा को अधिक महत्व दिया जाता है। संधि पूजा में 108 दीपक और 108 कमल से मां दुर्गा की पूजा की जाती है। इसके अलावा मां को 108 बेल पत्र की माला भी अर्पित की जाती है। माता को अन्य फल, पुष्प चावल,मेवा और गहने भी अर्पित किए जाते हैं। पूजा का प्रारंभ घंटी बजाकर किया जाता है। इस समय माता मंत्रोच्चारण किया जाता है, माता की आरती उतारी जाती है और विधिवत पूजा की जाती है।


संधि पूजा विधि (Sandhi Puja Vidhi)

1. संधि पूजा अष्टमी तिथि के आखिरी 24 घंटो और नवमी तिथि के प्रारंभ के 24 घंटों में की जाती है। यह पूजा बंगाल में विशेष रूप से की जाती है।

2. संधि पूजा में मां दुर्गा के आगे 108 दीपक और 108 कमल के पुष्प चढ़ाने अत्यंत ही आवश्यक होते हैं।

3. संधि पूजा के समय मां को वस्त्र, लाल फल, पुष्प चावल,मेवा और गहने भी अर्पित करें और इसके बाद मां की ढोल नगाड़ों के साथ विधिवत पूजा की जाती है।

4. कुछ लोग इस दिन कद्दु और ककड़ी की बलि भी देते हैं। इसके बाद मां दुर्गा के मंत्रों का उच्चारण करके उनकी आरती उतारी जाती है।

5. संधि पूजा को बुराई पर अच्छाई के रूप में मनाया जाता है।


संधि पूजा की कथा (Sandhi Puja Ki Katha)

संधि पूजा का विशेष महत्व होता है। इस मुहूर्त को अति बलशाली मुहूर्त माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब मां दुर्गा का महिषासुर के साथ युद्ध हो रहा था। उस समय चंड और मुंड ने मां दुर्गा पर पीछे से वार किया। जिसके बाद मां का क्रोध अत्याधिक बढ़ गया और उनका रंग क्रोध के कारण नीला पड़ गया। इसके बाद मां दुर्गा ने तीसरी आंख खोली और मां दुर्गा का स्वरूप चामुंजा देवी में बदल गया । इसके बाद मां ने चंड और मुंड का वध कर दिया। मां दुर्गा के चामुंडा रूप लेने के सम्मान में ही संधि पूजा की जाती है।

संधि पूजा को बंगाल में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन लोग पारंपरिक वेश भूषा धारण करते हैं। इस दिन मां दुर्गा को 108 दीपक, 108 कमल, 108 बेल के पत्ते, गहने, पारंपरिक कपड़े, हिबिस्कस फूल, चावल , अनाज, एक लाल फल और माला अर्पित की जाती है। संधि पूजा में मंत्रोच्चारण को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन मां की पूजा ढोल, नगाड़ों के साथ की जाती है।


मां चामुंडा के मंत्र (Maa chamunda Ka Mantra)

1.ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

2. क्लीं ह्रीं ऐं चामुण्डायै विच्चे

3.ओंम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

4.क्लीं ऐं ह्रीं चामुण्डायै विच्चे


मां चामुंडा की आरती (Maa chamunda Ki Aarti)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

जय अम्बे गौरी…

माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको॥

जय अम्बे गौरी…

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥

जय अम्बे गौरी…

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।

सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥

जय अम्बे गौरी…

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥

जय अम्बे गौरी…

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥

जय अम्बे गौरी…

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥

जय अम्बे गौरी…

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।

आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥

जय अम्बे गौरी…

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।

बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥

जय अम्बे गौरी…

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।

भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥

जय अम्बे गौरी…

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।

मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥

जय अम्बे गौरी…

कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥

जय अम्बे गौरी…

श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌ई नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥

जय अम्बे गौरी…

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