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Sawan Shivratri 2019 : सावन शिवरात्रि पर जानें क्यों लगाई जाती है भगवान शिव को भस्म

सावन शिवरात्रि 2019 का व्रत 30 जुलाई को रखा जाएगा, भगवान शिव को भस्म लगाने के पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसके अनुसार एक ऋषि का अंहकार तोड़ने के लिए भगवान शिव ने अपनी उंगली काट ली थी और उस ऋषि के अंहकार को तोड़ा था, जिसके बाद से ही भगवान शिव को भस्म लगाने की प्रथा शुरु हुई थी।

Sawan Shivratri 2019 : सावन शिवरात्रि पर जानें क्यों लगाई जाती है भगवान शिव को भस्म

Sawan Shivratri 2019 सावन शिवरात्रि का पर्व (Sawan Shivratri Festival) कल 30 जुलाई 2019 (30 July 2019) को पूरे भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा और शिवालयों में शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाएगा। सावन शिवरात्रि में शिवलिंग पर जल के साथ साथ भस्म का अभिषेक करने का बहुत महत्व बताया गया है। सावन शिवरात्रि पर लोग भगवान शिव को अलग- अलग तरह की चीजें अर्पण करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव को भस्म क्यों लगाई जाती है। इसके पीछे क्या रहस्य छिपा हुआ है। अगर आप इसके बारे में नहीं जानते तो हम आपको इसके बारे में बताएंगे। सावन की शिवरात्रि को विशेष महत्व दिया जाता है। सावन के महिने में लोग कावड़ (Kanwar) लेकर पवित्र नदियों का जल लेने जाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।


क्यों लगाते हैं भगवान शिव भस्म (Kyu Lagai Jati Hai Bahgwan Shiv Ko Bhasam)

भगवान शिव का रूप निराला है । सिर पर चंद्रमा, गले मे वासुकी नाग और पूरे शरीर पर भस्म। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव अपने पूरे शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं। शिव पुराण के अनुसार एक ऋषि हुआ करते थे। जिन्होंने अपने तपोबल से बहुत सारी शक्तियां हासिल कर ली थी। वह ऋषि सिर्फ केवल हरी पत्तियों का ही सेवन किया करते थे। जिसकी वजह से लोग उन्हें प्रनद नाम से जानने लगे थे।

प्रनद ऋषि ने अपने तपोबल से इतनी शक्ति हासिल कर ली थी कि वह जंगल के सभी जीव और जंतुओं पर नियंत्रण कर लेते थे। वे बड़े से बड़े पशु को अपने में वश में आसानी से कर लिया करते थे। एक दिन वह अपनी कुटिया की मरम्मत कर रहे थे। जिसके लिए वह जंगल में लकड़ी काटने के लिए गए थे। लकड़ी काटते - काटते अचानक से उंगली कट गई थी।

उंगली कटने पर जब ऋषि को पीड़ा हुई और उन्होंने देखा कि उनकी उंगली से खून की जगह पेड़ पौधों का रस निकल रहा है। जिसके बाद उस ऋषि को लगा वह एक पवित्र आत्मा बन गया। जिसके शरीर में अब रक्त नहीं बहता। बल्कि पौधों का रस बहता है। जिसके बाद उसे इस बात का अंहकार हो गया। अब वह साधु अपने आपको सबसे ज्यादा पवित्र और भगवान का सबसे बड़ा भक्त मानने लगा।


भगवान शिव ने जब यह देखा तो वह उसका अंहकार तोड़ने के लिए उसके पास एक बुढ़े का वेश रखकर चले गए। भगवान शिव उसके समीप पहुंचे और उसकी इस प्रसन्नता का कारण पूछा। साधु ने उस बुढ़े व्यक्ति को बताया कि वह अब इस पूरे संसार में सबसे ज्यादा पवित्र बन गया हैं। इस पर भगवान शिव ने कहा कि जब सब कुछ जल जाता है तो वह राख बन जाता है। इसलिए अंत में सिर्फ राख ही शेष रह जाती है।

वह ऋषि भगवान शिव की बात सुनकर उन्हें मुर्ख समझने लगा और कहने लगा कि क्या तु मुझसे ज्यादा जानता है। अगर तेरे पास कोई प्रमाण है तो दिखा नहीं तो मैं तुझे अपने तप के बल से भस्म कर दूंगा। इस पर भगवान शिव ने अपने उंगली काट ली। जिसमें से रक्त की जगह राख निकलने लगी। जिसके बाद उस ऋषि को अपनी इस भूल का अहसास हुआ और उसे पता चल गया की जो उनके सामने खडे़ हैं।

वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। साधु ने अपनी इस गलती के क्षमा याचना की और उस बुढ़े व्यक्ति से अपने असली रूप में आने के लिए कहा। इस पर भगवान शिव अपने असली रूप में आए और उसे आर्शीवाद दिया। उसी दिन से भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म लगाने लगे। जिससे लोग अपनी सुंदरता का अभिमान न करें और सत्य को हमेशा याद रखें।

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