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Sawan 2019 : सावन के दूसरे सोमवार का पौराणिक महत्व, व्रत के नियम, पूजा विधि और कथा

सावन सोमवार दूसरा व्रत पौराणिक महत्व (Sawan Somvar Mythological significance ), व्रत के नियम (Fast Rules), पूजा विधि (Puja Vidhi) और कथा (Story) जानने से आप भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं। सावन सोमवार के पौराणक महत्व के अनुसार सावन के दूसरे सोमवार का व्रत (Sawan Somvar Second Fast) किसी भी उम्र का व्यक्ति किसी भी इच्छा के लिए रख सकता है।

Sawan 2019 : सावन के दूसरे सोमवार का पौराणिक महत्व, व्रत के नियम, पूजा विधि और कथाSawan 2019 Sawan Somvar Second Fast Mythological Significance Fast Rules Puja Vidhi Story

Sawan 2019 सावन सोमवार दूसरा व्रत पौराणिक महत्व, व्रत के नियम, पूजा विधि और कथा जानने से आप सावन के महिने के दूसरे सोमवार का पूरा लाभ उठा सकते हैं। सावन के महिने में भगवान शिव (Bhagwan Shiv) अपने भक्तों को विशेष आर्शीवाद देते हैं। शास्त्रों में सावन के सोमवार को विशेष महत्व (Sawan Somvar Importance) दिया जाता है। सावन के सोमवार (Sawan Somvar) पर भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से सभी जीवन के सभी सुखों को पाया जा सकता है। अगर कोई अविवाहित कन्या इस व्रत को रखती है तो उसके विवाह में आ रही सभी बाधा और ग्रह दोष समाप्त होते हैं तो आइए जानते हैं सावन सोमवार दूसरा व्रत पौराणिक महत्व, व्रत के नियम, पूजा विधि और कथा के बारे में....


सावन सोमवार पौराणिक महत्व (Sawan Sonvar Poranik Mahatva)

सोमवार के दिन को भगवान शिव का दिन माना जाता है और सावन के सोमवार को तो भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। सावन के सोमवार का व्रत कोई भी व्यक्ति रख सकता है। चाहें वह बच्चा हो, बुढा हो, जवान हो या कोई भी स्त्री यह व्रत रख सकती है। यह व्रत आसानी से रखा जा सकता है। सावन सोमवार के व्रत की पूजा विधि भी सबसे सरल है। भगवान शिव के इस व्रत को रोजगार प्राप्त करने, पढाई, व्यापार, विदेश यात्रा या किसी भी इच्छा के लिए रखा जा सकता है।

सावन सोमवार के व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाएं रखती है। विवाहित महिलांए इस व्रत को वैवाहिक सुख और अपने पति और बच्चों की तरक्की के लिए रखती हैं। इसी के साथ नविवाहित महिलाएं इस व्रत को संतान प्राप्ति के लिए भी रखती हैं। सावन सोमवार का व्रत कुंवारी कन्याएं भी रखती हैं। जिससे उन्हें एक सुयोग्य और भगवान शिव की तरह ही पति की प्राप्ति हो सके। वहीं कुछ लोग इसे स्वास्थय लाभ के लिए भी रखते हैं। माना जाता है कि सावन के सोमवार का व्रत रखने सभी प्रकार के रोग समाप्त हो जाते हैं।


सावन सोमवार व्रत के नियम (Sawan Somvar Vart Ke Niyam)

सावन सोमवार के व्रत में सुबह जल्दी उठकर नहाकर सफेद वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव के मंदिर में जाकर विधिवत पूजा करनी चाहिए। भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए और भगवान शिव की कथा सुननी चाहिए। सावन सोमवार का व्रत सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त रखा जाता है। इस व्रत में क्रोध, किसी से भी ईर्ष्या करना, झूठ बोलना आदि सभी कुकर्मां से अपने आपको दूर रखें और साथ ही भगवान शिव का पूरे दिन स्मरण करें। शास्त्रों के अनुसार सावन सोमवार का व्रत करने से साल के सभी सोमवारों के व्रत का फल मिल जाता है।


सावन सोमवार की पूजा विधि (Sawan Somvar Puja Vidhi)

1. सावन के सोमवार को ब्रह्ममुहूर्त में उठना चाहिए। उसके बाद भगवान शिव के मंदिर में जाना चाहिए।

2. इसके बाद भगवान शिव को आकड़े के फूल , बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करनी चाहिए।

3. यह सभी चीजें अर्पित करने के बाद भगवान शिव को जल में शहद मिलाकर जलाभिषेक करना चाहिए।

4. इसके बाद वहीं बैठकर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें।

5.इसके बाद शाम के समय प्रदोष काल में सावन सोमवार के व्रत का पारण करना चाहिए।


सावन व्रत कथा ( Sawan Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी के पुत्र नारद मुनि ने भगवान शिव से कहा कि हे भगवान! आपको सावन मास इतना अधिक प्रिय क्यों हैं कृपया बताएं। इस पर भगवान शिव कहते हैं कि सनो नारद देवी सती ने मुझे हर जन्म में पति रूप में पाने के लिए प्रतिज्ञा की थी।

इसके लिए उन्होंने अपने पिता के क्रोध को भी सहन किया था। एक बार उनके पिता ने भगवान शिव का अपमान किया था। जिसकी वजह से उन्होंने अपने शरीर को अग्नि में जलाकर भस्म कर दिया था।इसके बाद उन्होंने हिमालय और नैना के यहां पुत्री रूप में जन्म लिया था।

इस जन्म में उनका नाम पार्वती है। शिव से विवाह के लिए देवी ने सावन माह में निराहार रहते हुए कठोर व्रत से भगवान शिवशंकर को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया। इसलिये सावन मास से ही भगवान शिव की कृपा के लिये सोलह सोमवार के उपवास आरंभ किये जाते हैं।

माना जाता है कि अगर कोई विवाहित महिला सोलह सोमवार का व्रत करती है तो उसके उसके वैवाहिक सुख में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आती और अगर कोई कुंवारी कन्या इस व्रत को करती है तो उसे उसका मनचाहा वर प्राप्त होता है।

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