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धर्म अध्यात्म: 51 शक्तिपीठों में से एक है बराही देवी मंदिर, दर्शन मात्र से खत्म होती है ये जानलेवा बीमारी

धर्म अध्यात्म के अनुसार कानपुर का फतेहपुर बार्डर बेहद प्रसिद्ध है। दरअसल जनपद कानपुर और जनपद फतेहपुर बार्डर पर स्थित गोरौधली गांव है।

धर्म अध्यात्म: 51 शक्तिपीठों में से एक है बराही देवी मंदिर, दर्शन मात्र से खत्म होती है ये जानलेवा बीमारी

धर्म अध्यात्म के अनुसार कानपुर का फतेहपुर बार्डर बेहद प्रसिद्ध है। दरअसल जनपद कानपुर और जनपद फतेहपुर बार्डर पर स्थित गोरौधली गांव है। इस गांव में ही बराही देवी का प्राचीन मंदिर है।

इस मंदिर की पुजारन लता कहती हैं, बराही देवी मां की प्रतिमा पास में बने तालाब से निकली थी। मैंने अपने बाबा से सुना है कि आज से हजारों साल पहले यहां पर घना जंगल था लेकिन यहां पर एक बहुत बड़ा गड्ढा था।

जब लोग गांव बसाने के लिए अपने घरों का निर्माण करा रहे थे, तब इस तालाब से मिट्टी खोद कर ले जाते थे उसी वक्त खुदाई के दौरान इस तालाब से बराही देवी की प्रतिमा निकली थी।

इसके बाद ग्रामीणों ने देवी मां की प्रतिमा को यहीं पर स्थापित करा दिया था। पुजारन ने बताया हजारों वर्ष पहले इस गांव में चर्म रोग फैला हुआ था। लोगों ने बराही देवी मंदिर में पूजा का आयोजन किया।

मिलता है चर्म रोग से छुटकारा

पूरे गांव ने तालाब में स्नान किया इसके बाद देवी मां की पूजा अर्चना की जिसके बाद ग्रामीणों को चर्म रोग से छुटकारा मिल गया। ये बात आग की तरह फैल गई, अब जिसे भी चर्म रोग होता था, वो बराही देवी मंदिर के तालाब में स्नान करने पहुंचने लगा।

तभी से ये मंदिर प्रसिद्ध हो गया। इस तालाब और देवी मां के मंदिर की बहुत मान्यता है। यहां पर जो दर्शन के लिए आता है वो खाली हाथ नहीं जाता है।

इसके साथ ही आसपास के क्षेत्र में जहां भी शादी होती है तो नवदम्पति इस मंदिर में दर्शन के करने के बाद ही अपनी नई जिन्दगी की शुरुआत करते हैं। मंदिर की स्थिति बेहद जर्जर हो गई थी, ये हजारों साल पुराना मंदिर है। मंदिर की मरम्मत के लिए सभी ग्रामीणों ने चंदा इकठ्ठा करके ठीक कराया है।

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