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Ram Krishna Paramhans Jayanti 2020 Date : जानिए रामकृष्ण परमहंस जंयती पर उनका जीवन परिचय और महत्वपूर्ण बातें

Ram Krishna Paramhans Jayanti 2020 Date : राम कृष्ण परमहंस जयंती साल 2020 में 25 फरवरी 2020 को मनाई जाएगी, यह परमहंस (Paramhans) जी की 184वाँ जन्म वर्षगाँठ है, रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म (Ram Krishna Paramhans Birth) एक बहुत ही साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन फिर भी उन्होंने संत से परमहंस की उपाधि प्राप्त की थी तो चलिए जानते हैं रामकृष्ण परमहंस जंयती पर उनका जीवन परिचय और उनके जीवन की महत्वपूर्ण बातें...

Ram Krishna Paramhans Jayanti 2020 Date : जानिए रामकृष्ण परमहंस जंयती पर उनका जीवन परिचय और उनके जीवन की महत्वपूर्ण बातेंRam Krishna Paramhans Jayanti 2020 Date : जानिए रामकृष्ण परमहंस जंयती पर उनका जीवन परिचय और उनके जीवन की महत्वपूर्ण बातें

Ram Krishna Paramhans Jayanti 2020 Date : रामकृष्ण परमहंस (Ram Krishna Paramhans Jayanti) एक महान विचार धारा के व्यक्ति थे। उनके अनुसार सभी धर्मों के लोग एक समान है । इसके साथ ही वह बहुत बड़े मां काली के भक्त भी थे। उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद जी भी थे तो चलिए जानते हैं रामकृष्ण परमहंस जंयती (Ram Krishna Paramhans Jayanti) पर उनका जीवन परिचय और उनके जीवन की महत्वपूर्ण बातें...

रामकृष्ण परमहंस का जीवन परिचय ( Ram Krishna Paramhans Jivan Parichay)

रामकृष्ण परमहंस का जन्म 18 फरवरी सन 1836 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम खुदीराम और माता का नाम शारदा मणि था। इनका बचपन का नाम गदाधर था। रामकृष्ण का परिवार बहुत ही गरीब था। लेकिन फिर भी इनके परिवार की धर्म और आस्था में बहुत श्रद्धा थी। रामकृष्ण जी मां काली के बहुत बड़े भक्त थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन मां काली की में बीता दिया। रामकृष्ण जी पर अपने पिता के नक्शे कदम पर चले थे। क्योंकि उनके पिता भी धर्मपरायण और बहुत ही सरल स्वाभाव के थे।



रामकृष्ण भी एक महान विचारधारा के व्यक्ति थे। जिनके विचारों को स्वंय विवेकानंद जी ने पूरी दुनिया में फैलाया था। रामकृष्ण जी ने सभी धर्मों को एक समान बताया है। उनका मानना था कि सभी धर्मों का आधार प्रेम, न्याय और परहित ही है। रामकृष्ण जी ने के अनुसार सभी धर्मों के लोगों के एकजुट होकर रहना चाहिए। उनके इन्हीं गुणों के कारण उन्हें परमहंस की उपाधि प्राप्त हुई थी। रामकृष्ण जी ने सभी धर्मों के लोगों को अध्यात्म का ज्ञान भी दिया था।

रामकृष्ण परमहंस के विचारों से कई लोग प्रेरित थे। इसी कारण से उनके इन विचारों को कई लोगों ने आगे बढ़ाया था। इनके विचारों को स्वंय विवेकानंद जी ने भी अपनाया और आगे बढ़ाया। स्वामी विवेकानंद जी ने इन्हें अपने गुरु के रूप में स्वीकार किया था। रामकृष्ण परमहंस के अनुयायी केशवचंद्र सेन, विजयकृष्ण गोस्वामी, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, बंकिमचंद्र चटर्जी, अश्विनी कुमार दत्त थे।


रामकृष्ण परमहंस का विवाह (Ram Krishna Paramhans Ka Vivah)

रामकृष्ण परमहंस का विवाह बचपन में ही शारदामणि के साथ हो गया था। लेकिन इन्हें सांसारिक सुखों से कोई भी लगाव नहीं था। यह केवल स्त्री को माता के समान ही मानते थे। इसी कारण से इन्होंने सत्रह वर्ष की उम्र मं अपने घर का त्याग कर दिया और मां काली के चरणों में अपने जीवन को समर्पित कर दिया। रामकृष्ण जी सुबह शाम मां काली की भक्ति में लगे रहते थे और कहते थे कि मां काली इनसे मिलने आती हैं और यह अपने हाथ से मां काली को भोजन भी कराते हैं।


रामकृष्ण परमहंस के वचन (Ram krishna Paramahamsa Ke Vachan)

1. रामकृष्ण जी के अनुसार जिस प्रकार खराब शीशे से सूर्य की छवि को नहीं देखा जा सकता। उसी प्रकार खराब मन से भगवान को नहीं देखा जा सकता।

2. उनका मानना था कि सभी धर्म एक समान ही हैं जो ईश्वर की प्राप्ति कराते हैं।

3. यदि तुम्हारे मार्ग में किसी तरह की कोई परेशानी न आए तो समझ लेना तुम्हारा मार्ग ठीक नहीं है।

4. जिस देश का एक भी व्यक्ति भूखा और निसहाय है तब तक देश का हर व्यक्ति गद्दार है।

5.कम ज्ञान मनुष्य की बुद्धि को बांध देता है और उसे अभिमानी बनाकर छोड़ता है।


संत से परमहंस बनने की कथा (Sant Sai Paramahamsa Bane Ki Katha)

रामकृष्ण परमहंस मां काली के बहुत बड़े भक्त थे। उनकी भक्ति के चर्च पूरे देश भर में थे। वह जब भी ध्यान में जाते थे तो मां काली से बातें करते थे और उन्हें भोजन कराते थे और जब उनका ध्यान टूटता तो वह एक बच्चे की तरह मां काली के रोने लगते थे। उनकी इस भक्ति को देखने के लिए एक बार संत तोताराम भी वहां पर आए। उन्होंने जब रामकृष्ण जी की इस साधना को देखा तो उन्होंने उन्हें बताया कि उनके अंदर असीम शक्तियां हैं लेकिन उन्हें बाहर लाने के लिए उन्हें अपनी इंद्रियों को वश में करना पड़ेगा।

लेकिन रामकृष्ण जी ने उनकी एक बात भी नहीं सुनी। इसके बाद तोताराम जी ने कहा कि जब भी तुम ध्यान में जाओ और तुम्हें मां काली दिखाई दें तो आप मां काली पर तलवार से वार करना। इसके बाद रामकृष्ण जी फिर से ध्यान में गए और फिर से ध्यान खत्म होने के बाद रोने लगे तब तोताराम जी ने कहा कि तुमने मां काली पर तलवार से वार क्यों नहीं किया। इस पर रामकृष्ण जी ने कहा कि मैं तलवार कहां से लाऊं। इसके बाद तोताराम जी ने कहा कि जब तुम ध्याम में जाओंगे तब मैं तुम्हारे शरीर पर आघात करूंगा और अगली बार जब रामकृष्ण जी ध्यान में गए

तब तोता राम जी ने ऐसा ही किया। जिसके रामकृष्ण जी ने इंद्रियों पर काबू करना सीख लिया। जिसके बार उन्हें परमहंस की उपाधि प्राप्त हुई। उन्होंने एक साधारण से बाल नरेंद्र को भी अध्यात्म का ज्ञान कराया जो आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के नाम से विख्यात हुआ।

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