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Pitru Paksha 2019 : पितृ पक्ष पर जानिए घर में पुरुष के न होने पर कौन कर सकता श्राद्ध कर्म

Pitru Paksha 2019 (पितृ पक्ष 2019) पितृ पक्ष इस साल 2019 (Pitru Paksha 2019) में 13 सितंबर 2019 (13 September 2019) से शुरू हो रहा है। पितृ पक्ष पर श्राद्ध कर्म का अधिकार पुरुषों के अलावा महिलाओं को भी है, लेकिन इसमें ज्येष्ठ पुत्री या इकलौती पुत्री भी आती है, आइए जानते हैं इसके अलावा घर में पुरुष के न होने पर कौन कर सकता श्राद्ध कर्म

Pitru Paksha 2019 : पितृ पक्ष पर जानिए घर में पुरुष के न होने पर कौन कर सकता श्राद्ध कर्म

Pitru Paksha 2019 पितृ पक्ष पर पितरों की मुक्ति और उन्हें ऊर्जा देने के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। लेकिन क्या सिर्फ पुरुष ही श्राद्ध कर्म को पूर्ण कर सकते हैं। इसका उपाय भी शास्त्रों में दिया गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार महिलाएं भी श्राद्ध कर्म को पूर्ण कर सकती हैं। लेकिन इसके लिए कुछ नियम भी है। जिन्हें पूर्ण करना अत्यंत आवश्यकत है। तो आइए जानते हैं घर में पुरुष के न होने पर कौन कर सकता श्राद्ध कर्म


पुरुष के न होने पर कौन कर सकता श्राद्ध कर्म (Purush Ke Na Hone Per Kon Kar Sakta Hai Shradh)

पितरों की मुक्ति और उन्हें भोजन के रूप में कुछ प्रदान करने के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। जिससे उन्हें ऊर्जा प्राप्त हो सके। लेकिन हिंदू शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म का कार्य करने का अधिकार सिर्फ पुरुषों को ही दिया गया है। लेकिन जिन घरों में पुरुष नहीं होते क्या उनके यहां कोई भी श्राद्ध कर्म नहीं कर सकता। इसका उपाय भी गरूड़ पुराण में बताया गया है। गरूड़ पुराण के अनुसार जिन घरों में कोई पुरुष न हों वहां पर बहु और पत्नी श्राद्ध कर्म का कार्य पूर्ण कर सकती हैं। इस श्राद्ध कर्म में सबसे बड़ी पुत्री या फिर एकलौती पुत्री भी शामिल है। अगर जिस घर में पत्नी भी जीवित न हो उस घर में सगा भाई, भतीजा, पोता, आदि भी श्राद्ध कर्म को पूर्ण कर सकता है। यदि घर में ये लोग भी मौजूद न हों तो कोई मित्र, रिश्तेदार या फिर कुल पुरोहित भी श्राद्ध कर्म को पुर्ण कर सकता है। गरूड़ पुराण के इस श्लोक के अनुसार। इन सभी लोगों को श्राद्ध कर्म करने का अधिकार है।

पुत्राभावे वधु कूर्यात..भार्याभावे च सोदन!

शिष्यो वा ब्राहमण: सपिण्डो वा समाचरेत!!

ज्येष्ठस्य वा कनिष्ठस्य भ्रातृ:पुत्रश्च: पौत्रके!

श्राध्यामात्रदिकम कार्य पुत्रहीनेत खग:!


मातामह श्राद्ध क्या होता है (Matamah Shradh Kya Hota Hai)

मातामह में श्राद्ध के अनुसार यह श्राद्ध एक बेटी का बेटा यानी जो व्यक्ति मरा है उसके नाती के द्वारा किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति का नाती भी उसका तर्पण करता है तो उस व्यक्ति को मुक्ति मिल जाती है और वह पितृ लोक की यात्रा पूरी कर लेता है। लेकिन गरूड़ पुराण में इसके लिए भी एक नियम बताया गया है। जिसके बिना यह श्राद्ध कर्म पूर्ण नहीं किया जा सकता। इस नियम के अनुसार अगर जिस पुत्री का बेटा अपने नाना का तर्पण कर रहा है उसका पति भी जिंदा होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो मातामह श्राद्ध का तर्पण उस व्यक्ति को नहीं लगता ।


कितने प्रकार के होते हैं श्राद्ध (Kitne Prakar Ke Hote Hai Shradh)

शास्त्रों के अनुसार तीन प्रकार के श्राद्धों को बताया गया है। नित्य,नैमित्तिक,काम्य

1.नित्य श्राद्ध- यह श्राद्ध मृत व्यक्ति की तिथि के अनुसार किया जाता है। इसमें श्राद्ध में तिथि को आवश्यक महत्व दिया जाता है। जो व्यक्ति जिस तिथि पर अपने प्राणों को त्यागता है। उसी तिथि पर उसका श्राद्ध कर्म किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि उस दिन वह उस व्यक्ति की आत्मा अपने घर पर ही मौजूद रहती है।

2. नैमित्तिक श्राद्ध - यह श्राद्ध किसी शुभ और मांगलिक कार्य पर किया जाता है। घर में कोई शुभ और मांगलिक कार्य किया जाता है घर के पूर्वजों को याद करके उनके नाम का भोजन निकाला जाता है। जिससे वह कार्य ठीक प्रकार से हो और जो व्यक्ति इस प्रकार का कार्य कर रहा है। उसे अपने पूर्वजों का आर्शीवाद प्राप्त हो।

3. काम्य श्राद्ध- यह श्राद्ध किसी विशेष इच्छा पूर्ति पर किया जाता है। घर में जो व्यक्ति अगर अपने पूर्वजों को साक्षी मानता अपनी कोई इच्छा प्रकट करता है और अगर वह इच्छा पूर्ण हो जाती है तो कृत्तिका या रोहिणी नक्षत्र में में काम्य श्राद्ध का कर्म पूरा किया जाता है।

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