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Pitru Paksha 2019 Dates : भूल जाने पर पितृ पक्ष में किस दिन करें किसका श्राद्ध, ये रही पूरी लिस्ट

Pitru Paksha 2019 Dates भाद्रपद शुक्लपक्ष चतुर्थी तिथि पूर्णिमा श्राद्ध से श्राद्ध का महिना आरम्भ हो रहा है, पहला श्राद्ध 2019 (Shradh Date 2019) में 13 सितंबर को है , पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध कर्म करने से तीन पीढ़ियों का तर्पण हो जाता है, देवतुल्य स्थिति में तीन पीढ़ियों के पूर्वजों को गिना जाता है, जिसमें पिता को वासु, दादा को रूद्र और परदादा को आदित्य माना जाता है, तो आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष में तिथि याद न होने पर किस दिन किया जाता है किसका श्राद्ध कर्म किया जाता है।

Pitru Paksha 2019 Dates : भूल जाने पर पितृ पक्ष में किस दिन करें किसका श्राद्ध, ये रही पूरी लिस्ट

Pitru Paksha 2019 पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से हमारे दिवगंत लोगों को ऊर्जा मिलती है, जिसकी वजह से वह प्रकाश की और अग्रसर होते हैं, अगर कोई व्यक्ति पितृ पक्ष में अपने पितरों का श्राद्ध नहीं करता है तो उसे अपने पितरों की श्राप से मिलता है और उसे अपने जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार जिन लोगों को पितरों का श्राप मिलता है उनकी कुंडली में पितृ दोष (Pitra Dosh) लग जाता है तो आइए जानते हैं पितृ पक्ष में तिथि याद न होने पर किस दिया जाता है किसका श्राद्ध


तिथि भूल जानें इन तिथियों पर करें अपने दिवगंत का श्राद्ध (Pitru Paksha 2019 Dates Shradh Date 2019 In India)

श्राद्ध दिवंगत परिजनों को उनकी मृत्यु की तिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया जाता है। अगर किसी परिजन की मृत्यु प्रतिपदा को हुई हो तो उनका श्राद्ध प्रतिपदा (Pitru Paksha Pratipada) के दिन ही किया जाता है। लेकिन अगर किसी को अपने दिवगंत की तिथि याद न हो तो वह पिता का श्राद्ध अष्टमी (Pitru Paksha Ashtami) के दिन और माता का नवमी तिथि (Pitru Paksha Navami) के दिन श्राद्ध कर सकता है। जिन परिजनों की अकाल मृत्यु हुई हो यानी किसी दुर्घटना या आत्महत्या के कारण हुई हो उनका श्राद्ध चतुर्दशी (Pitru Paksha Chaturdashi) के दिन किया जाता है।

साधु और संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी (Pitru Paksha Dwadashi) के दिन किया जाता है और अन्य पितरों का श्राद्ध अमावस्या (Pitru Paksha Amavasya) के दिन किया जा सकता है। इस दिन को सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध (Sarvapitra Amavasya) कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार अपने पितृगणों का श्राद्ध कर्म करने के लिए साल में 96 अवसर मिलते हैं। इनमें साल के 12 महिनों की 12 अमावस्या तिथि को भी श्राद्ध किया जा सकता है। साल की 14 मन्वादि तिथियां, 12 व्यतिपात योग और 15 महालय वैधृति योग और 15 महालय शामिल है। इनमें पितृ पक्ष का श्राद्ध कर्म उत्तम माना गया है।

श्राद्ध 2019 तिथियां (Shradh 2019 dates)

13 सितंबर 2019 : पूर्णिमा श्राद्ध पहला श्राद्ध

14 सितंबर 2019 : प्रतिपदा दूसरा श्राद्ध

15 सितंबर 2019 : द्वितीया तीसरा श्राद्ध

16 सितंबर 2019 : तृतीया चौथा श्राद्ध

17 सितंबर 2019 : चतुर्थी पांचवा श्राद्ध

18 सितंबर 2019 : पंचमी छठा श्राद्ध

19 सितंबर 2019 : षष्ठी सातवां श्राद्ध

20 सितंबर 2019 : सप्तमी आठवां श्राद्ध

21 सितंबर 2019 : अष्टमी नौवा श्राद्ध

22 सितंबर 2019 : नवमी दसवां श्राद्ध

23 सितंबर 2019 : दशमी एकादशी श्राद्ध

24 सितंबर 2019 : एकादशी द्वादशी श्राद्ध

25 सितंबर 2019 : द्वादशी त्रियोदशी श्राद्ध

26 सितंबर 2019 : त्रयोदशी चतुर्दशी श्राद्ध

27 सितंबर 2019 : मघा श्राद्ध 15वां श्राद्ध

28 सितंबर 2019 : सर्वपित्र अमावस्या



कौन-कौन कर सकता है श्राद्ध (Kon Kon Kar Sakta Hai Shradh)

ऐसे लोगों को पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। श्राद्ध तीन पीढ़ियों तक होता है। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध तीन पीढ़ियों तक होता है। देवतुल्य स्थिति में तीन पीढ़ियों के पूर्वज गिने जाते हैं। पिता को वासु, दादा को रूद्र और परदादा को आदित्य के समान दर्जा दिया गया है। श्राद्ध मुख्य तौर से पुत्र, पोता, भतीजा या भांजा करते हैं। जिनके घर में कोई पुरुष सदस्य नही है, उनमें महिलाएं भी श्राद्ध कर सकती हैं। इस तरह से श्राद्ध कर्म करने से तीन पीढ़ियों के पूर्वजों को तर्पण किया जा सकता है। अगर ऐसा नहीं होता तो हमें पूर्वजों की और श्राप मिलता है। जिसके बाद हमें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


श्राद्ध कर्म न होने पर दिवगंत भटकते हैं प्रेत योनी में (Shradh Karam Na Hone Per Divgant Bhtakte Hai Prat Yoni Mai)

हिंदू धर्म में मृ्त्यु के बाद श्राद्ध करना बेहद जरूरी मान जाता है। मान्यतासुर अगर किसी मनुष्य का विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण नही किया जाता तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती और वह प्रेत योनी के रूप में इस संसार में ही भटकता रहता है। ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहिए।

हिंदू ज्योतिष के अनुसार भी पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली दोषों मे से एक माना जाता है। मान्यता है कि अगर पितृ रुष्ट हो जाए तो मनुष्य को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पितरों की अशांति के कारण धन हानि और संतान पक्ष से समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। संतान- हीनता के दोष के लिए कुंडली में इसके लिए विशेष रूर से देखा जाता है।

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