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Pitru Paksha 2019 Date: पितृ पक्ष पर जानिए पितरों के तर्पण की विधि

Pitru Paksha 2019 पितृ पक्ष 2019 में 13 सितंबर से प्रारंभ हो रहे हैं, पितृ पक्ष (Pitru Paksha) पर पितृ तर्पण विधि (Pitru Tarpan Vidhi) अपनाकर पितृ दोष से छुटकारा पा सकते हैं, पितरों के तर्पण के लिए पिंड बनाने अत्यंत आवश्यक होते हैं, जो चावल और तिल के द्वारा बनाए जाते हैं, तो आइए जानते हैं पितरों के तर्पण संपूर्ण की विधि।

Pitru Paksha 2019 Date: पितृ पक्ष पर जानिए पितरों के तर्पण की विधि

Pitru Paksha 2019 पितृ पक्ष में पितरों की मुक्ति के लिए लोग अनेकों काम करते हैं। उन्हीं में से एक पितरों का तर्पण। अगर पितरों का तर्पण (Pitru Tarpan) ठीक प्रकार से न हो तो पितरों को मुक्ति प्राप्त नहीं होती है। पितृ पक्ष इस साल 2019 (Pitru Paksha 2019) में 13 सिंतबर 2019 से प्रारंभ हो रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार जिन लोगों का तर्पण ठीक प्रकार से नहीं होता वह लोग पितृ लोक तक नहीं पहुंच पाते और सदा के लिए इस मृत्युलोक में ही भटकते रहते हैं तो आइए जानते हैं पितरों के तर्पण की संपूर्ण विधि


पितर तर्पण विधि (Pitru Tarpan Vidhi)

1.सबसे पहले किसी पवित्र नदी में स्नान करें और बिना सीले वस्त्र धारण करें उसके बाद एक चटाई या साफ चादर ले लें। उसके बाद दक्षिण दिशा की और मुहं करके बैछ जाएं। इसके बाद एक लोटा लेकर उसमें गंगाजल भरें और धूप या अगरबत्ती लगा दें।

2.इसके बाद सीधे हाथ के नीचे उल्टा हाथ रखकर हाथ में गंगाजल लेकर पित्तरों का आह्वाहन करें। आह्वाहन करते समय ऊं आगच्छन्तु में पितर : इम गृह्वन्तु जलान्जलिम मंत्र का जाप करें। यदि आप यह मंत्र नहीं बोल पा रहे हैं तो अपने पितरों को याद करके बोले हें मेरे सभी पितरों में आपका आह्वाहन करता हुं कृपया करके मेंरा निमंत्रण स्वीकार करें। इसके बाद उस लोटे को दिए और धूपबत्ति से तीन बार आरती करके सीधे हाथ की तरफ रख दें।

3.इसके बाद थाली में केले का पत्ता रखकर उसमें तीन दूर्वा सीधी तरफ रखें। यदि आपके पास दूर्वा नही है तो भी कोई बात नही।

4. इसके बाद उबले चावल लेकर उसमें काले तिल मिलाकर पिंड बना लें। यह पिंड आपके मात्रु की तरफ से पहला अर्पण होगा। यदि आपके माता पिता जीवित है तो उन्हें अर्पण में शामिल न करें। सिर्फ माता की ही तीन पीढ़ियों को इसमें शमिल करें।

5. यदि माता या पिता का परलोक सिधार गए हैं तो उनका नाम अवश्य लें। आपने जो चावल और तिल का पिंड बनाया था उसे अपनी छाती के पास तक लेकर आएं और पूरी श्रद्धा से के साथ बोलें की यह पहला पिंड में अपनी मता की तीन पीढ़ियों को अर्पित करता हुं। पिंड को अर्पित करने के बाद उस पर पहली दूर्वा रख दें।


6.इसके बाद उलटे हाथ से गंगा जल का लोटा पकड़ें और जल की एक धार बनाकर सीधे हाथ की अंजुली बनाकर पिंड पर जल चढाएं। जल को इस प्रकार से चढ़ाएं की सीधे हाथ की तर्जनी ऊंगली और अंगूठे के बीच से जल का प्रवाह हो। इसके बाद फिर से कहें कि हे मां और आदरणीय पूर्वज गण मैं आपका वंशज आपको जो भी अर्पण करूं कृपया करके उसे ग्रहण करें और ऊर्जावान होकर रोशनी की तरफ जाएं।

7.इसी प्रकार से चावल और तिल का दूसरा गोला बनाएं और अपनी छाती के पास लाकर बोले की मैं अपने पिता की तीन पीढ़ियों और अपने पूर्वजों को यह पिंड अर्पित करता हुं आपको यह कार्य पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ करना है। यह पिंड स्वीकार करके मुझे अपना आर्शीवाद प्रदान करें।

8.इसके बाद उलटे हाथ से लोट पकड़कर सीधे हाथ से धार बनाकर उस पिंड को जल दें और फिर से दोहराएं की मेरे पिता की तीन पीढ़ी और मेरे सभी पूर्वज यह अन्न और जल स्वीकार करें और ऊर्जा प्राप्त करके प्रकाश की और जाएं। ऐसा कहने के बाद उनसे आर्शीवाद भी अवश्य मांगे।

9. अंत में जितने भी चावल और तिल बचे हैं उनका अंतिम पिंड बनाएं और छाती से लगाकर सभी पूर्वजों जो इस जन्म के हों, अगले जन्म के हों या जिन्हें आप न जानते हों। सभी से इस अन्न को ग्रहण करने का आह्वाहन करें और इसके साथ तीसरी दूर्वा भी रख दें।

10. अंत में सभी को जल चढ़ाकर सभी पूर्वजों से जाने अनजाने में हूई किसी भी प्रकार की गलती के लिए क्षमा मांगें और उनसे प्रार्थना करें कि वह इस अन्न और जल से ऊर्जा प्राप्त करके प्रकार की और जाएं।

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