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Nirjala Ekadashi 2020: निर्जला एकादशी 2020 कब है, पारण मुहूर्त और व्रत विधि

निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ मास की एकादशी को कहा जाता है, इस भीम एकादशी का व्रत भी कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत बिना पानी के रखा जाता है, इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। यह व्रत बहुत ही कठिन है क्योंकि इसे रखने के नियम काफी सख्त है। आज हम आपको बताएंगे कि निर्जला एकादशी 2020 कब है? निर्जला एकादशी 2020 पारण मुहूर्त और निर्जला एकादशी व्रत विधि क्या है।

Nirjala Ekadashi 2020: निर्जला एकादशी 2020 कब है, पारण मुहूर्त और व्रत विधि

Nirjala Ekadashi 2020: हिंदू पंचांग के अनुसार साल में कुल 24 एकादशी पड़ती है। सभी एकादशियों में व्रत करने के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। इस में एक निर्जला एकादशी का सबसे ज्यादा निर्जला एकादशी का महत्व है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत बहुत ही लाभकारी है। जो लोग सभी एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं, वे सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत रख लें तो उन्हें पूरे साल की एकादशियों के व्रत के बार फल मिल जाता है। व्रत का फल केवल एक निर्जला एकादशी व्रत रखने से मिल जाता है। आज हम आपको बताएंगे कि निर्जला एकादशी 2020 कब है? निर्जला एकादशी 2020 पारण मुहूर्त और निर्जला एकादशी व्रत विधि के बारे में।

निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ मास की एकादशी को कहा जाता है, इस भीम एकादशी का व्रत भी कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत बिना पानी के रखा जाता है, इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। यह व्रत बहुत ही कठिन है क्योंकि इसे रखने के नियम काफी सख्त है। जो व्रति इस व्रत को रखता है उस ना की भोजन का त्याग करना पड़ता है बल्कि पानी भी ग्रहण करने की मनाई होती है। निर्जला एकादशी पर निर्जल रहकर भगवान विष्णु की अराधना की जाती है और दीर्घ आयु और मोक्ष का वरदान प्राप्त किया जाता है।

निर्जला एकादशी 2020 कब है?

इस साल निर्जला एकादशी व्रत 2 जून (मंगलवार) को पड़ रहा है।

निर्जला एकादशी 2020 पारण मुहूर्त

3 जून को पारण का समय सुबह 5.41 बजे से 8.18 यानि 2 घंटे 37 मिनट रहेगा।

निर्जला एकादशी 2020 व्रत विधि

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर मन में व्रत का संकल्प लेना चाहिए। व्रत का संकल्प लेने के लिए अपना नाम और गोत्र बोलना बहुत ही जरूरी होता है। सुबह पूजा समाप्त करने बाद दिनभर निर्जला व्रत रखना है और व्रत की कथा पढ़नी चाहिए और संध्याकाल में भगवान विष्णु की पूजा- अर्चाना और आरती करनी चाहिए। रात में भजन कीर्तन करना चाहिए और जमीन पर ही सोना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा के लिए आप पीले चंदन का उपयोग करें, पीले फूल - फल अर्पित करें और पीली मिठाई संभव हो तो भगवान विष्णु को अर्पित करें और तुलसी

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