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Nirjala Ekadashi 2019 : शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी पर पानी क्यों नहीं पीया जाता , जानें क्या है इसके पीछे का करण

Nirjala Ekadashi 2019 : निर्जला एकादशी का व्रत (Nirjala Ekadashi Vrat) सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है। लेकिन जो भी व्यक्ति इस व्रत को पूर्ण कर लेता है। उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है और उसके जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं रहता है। निर्जला एकादशी 13 जून 2019 (Nirjala Ekadashi 13 June 2019) में यानी आज के दिन है। निर्जला एकादशी के व्रत (Nirjala Ekadashi Ka Vrat) को शास्त्रों में सबसे बड़ा बताया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) को लेकर एक और मान्यता भी है और यह मान्यता है कि इस दिन बिल्कुल भी जल ग्रहण नहीं किया जाता। शास्त्रों में इसके पीछे क्या कारण बताया गया है आज हम आपको इन निर्जला एकादशी की इन सभी बातों के बारे में बताएंगे । तो चलिए जानते हैं कि क्या निर्जला एकादशी के दिन बिल्कुल भी पानी नहीं पीया जाता (Nirjala Ekadashi per pani Nahi Piya Jata)

Nirjala Ekadashi 2019 : शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी पर पानी क्यों नहीं पीया जाता , जानें क्या है इसके पीछे का करण

Nirjala Ekadashi 2019 : निर्जला एकादशी का व्रत (Nirjala Ekadashi Vrat) सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है। लेकिन जो भी व्यक्ति इस व्रत को पूर्ण कर लेता है। उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है और उसके जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं रहता है। निर्जला एकादशी 13 जून 2019 (Nirjala Ekadashi 13 June 2019) में यानी आज के दिन है। निर्जला एकादशी के व्रत (Nirjala Ekadashi Ka Vrat) को शास्त्रों में सबसे बड़ा बताया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) को लेकर एक और मान्यता भी है और यह मान्यता है कि इस दिन बिल्कुल भी जल ग्रहण नहीं किया जाता। शास्त्रों में इसके पीछे क्या कारण बताया गया है आज हम आपको इन निर्जला एकादशी की इन सभी बातों के बारे में बताएंगे । तो चलिए जानते हैं कि क्या निर्जला एकादशी के दिन बिल्कुल भी पानी नहीं पीया जाता (Nirjala Ekadashi per pani Nahi Piya Jata)


क्या निर्जला एकादशी पर बिल्कुल भी पानी नहीं पीया जाता ( Kya Nirjala Ekadashi Per Bilkul Pani Nahi Piya Jata)

निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। निर्जला एकादशी में व्रत करने वाले व्यक्ति का पानी पीना बिल्कुल माना है सिर्फ इस दिन मुंह में जल कुल्ला या आचमन करने के लिए ही लिया जाता हैं। इसके अलावा जल पीने से व्रत खंडित हो जाता है और उसके शुभ फल प्राप्त नहीं होते । निर्जला एकादशी व्रत में एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी यानी दूसरे दिन तक जल ग्रहण नहीं किया जाता।

लेकिन क्या निर्जला एकादशी के दिन पानी पिलाने सबसे पुण्य का काम माना जाता है।वैसे भी हिंदू शास्त्र में पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य का काम माना जाता है। अगर निर्जला एकादशी का व्रत रखने वाला व्यक्ति इस दिन किसी को पानी पिलाता है तो यह सबसे बड़ा पुण्य का काम है। माना जाता है कि इस दिन पानी पिलाने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति के लिए परीक्षा का दिन है।


उसके चारों और जीवन के सभी साधन उपलब्ध रहते हैं । अगर उसका मन इन साधनों की ओर चला जाता है तो उसका व्रत खंडित हो जाता है। वहीं व्रती चोरों तरफ इन साधनों के होने का बाद भी सिर्फ अपने व्रत के नियमों का पालन ही करता है तो वह भगवान विष्णु की कृपा का पात्र बन जाता है।

ज्येष्ठ मास में गर्मी अपने चरम पर होती है। इस समय मनुष्य , जानवर और पक्षी सभी को जल की आवश्यकता होती है। लोग इस समय गर्मी से परेशान होते हैं । ऐसे मे जल वितरण करना न केवल धर्म की और से बल्कि मानवता के लिहाज से भी एक अच्छा कार्य मान गया है।

गर्मी के इस मौसम में किसी भी जीव को एक गिलास पानी मिल जाए तो उसकी आत्म तृप्त हो जाती है और उसकी आत्मा पानी पिलाने वाले को आर्शीवाद देती है। इसलिए निर्जला एकादशी पर पानी पिलाने को सबसे पुण्यकारी कार्य माना गया है। अत: इस उपासना का सीधा संबंध एक ओर जहां पानी न पीने के व्रत की कठिन साधना है वहीं आम जनता को पानी पिलाकर परोपकार की प्राचीन भारतीय परंपरा भी है।

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