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Nirjala Ekadashi 2019 : जानें कैसे इच्छाओं पर नियंत्रण करने की शक्ति देता है निर्जला एकादशी व्रत

Nirjala Ekadashi 2019 : एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat) को सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है और निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) को तो सभी एकादशियों में सबसे बड़ा स्थान दिया गया है। जिसका कारण यह है कि इस व्रत ज्येष्ठ मास की एकादशी (Jyestha Ekadashi) के दिन पड़ता है। जब गर्मी अपने चरम पर होती है। निर्जला एकादशी व्रत का एक नियम (Nirjala Ekadashi Vrat Niyam) है कि इस व्रत में पानी तो बिल्कुल भी नहीं पीया जाता। इसी वजह से कई लोग निर्जला एकादशी के व्रत (Nirjala Ekadasi vrat) को करने से घबराते हैं। लेकिन जो व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत (Nirjala Ekadashi Vrat 2019) करता है। उसे जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी का व्रत मनुष्य को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करना सीखाता है (Ichao Per Niyantran Karna Sikhata Hai Nirjala Ekadashi Vrat)। निर्जला एकादशी का व्रत मनुष्य को जीवन की उपयोगिता के बारे में सीखाता है। अगर आप भी निर्जला एकादशी की इन सब बातों के बारे में नहीं जानते। तो आज हम आपको बताएंगे कि कैसे निर्जला एकादशी का व्रत मनुष्य इच्छाओं पर नियंत्रण करना सीखाता है। तो चलिए जानते हैं निर्जला एकादशी की इन्हीं सब बातों के बारे में...

Nirjala Ekadashi 2019 : जानें कैसे इच्छाओं पर नियंत्रण करने की शक्ति देता है निर्जला एकादशी व्रत

Nirjala Ekadashi 2019 : एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat) को सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है और निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) को तो सभी एकादशियों में सबसे बड़ा स्थान दिया गया है। जिसका कारण यह है कि इस व्रत ज्येष्ठ मास की एकादशी (Jyestha Ekadashi) के दिन पड़ता है। जब गर्मी अपने चरम पर होती है। निर्जला एकादशी व्रत का एक नियम (Nirjala Ekadashi Vrat Niyam) है कि इस व्रत में पानी तो बिल्कुल भी नहीं पीया जाता। इसी वजह से कई लोग निर्जला एकादशी के व्रत (Nirjala Ekadasi vrat) को करने से घबराते हैं। लेकिन जो व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत (Nirjala Ekadashi Vrat 2019) करता है। उसे जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी का व्रत मनुष्य को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करना सीखाता है (Ichao Per Niyantran Karna Sikhata Hai Nirjala Ekadashi Vrat)। निर्जला एकादशी का व्रत मनुष्य को जीवन की उपयोगिता के बारे में सीखाता है। अगर आप भी निर्जला एकादशी की इन सब बातों के बारे में नहीं जानते। तो आज हम आपको बताएंगे कि कैसे निर्जला एकादशी का व्रत मनुष्य इच्छाओं पर नियंत्रण करना सीखाता है। तो चलिए जानते हैं निर्जला एकादशी की इन्हीं सब बातों के बारे में...


इच्छाओं पर नियंत्रण करना सिखाता है निर्जला एकादशी व्रत (Ichao Per Niyantran Karna Sikhata Hai Nirjala Ekadashi Vrat)

ज्येष्ठ मास में गर्मी अपने चरम पर होती है। इस समय नदी , तालाब आदि प्रत्येक जगह से जल सुखने लगता है और जीवन के लिए जल बहुत ही आवश्यक है। मनुष्य , जानवर और पक्षी सभी को जल की आवश्यकता होती है। लोग इस समय गर्मी से परेशान होते हैं । ऐसे मे जल वितरण करना न केवल धर्म की और से बल्कि मानवता के लिहाज से भी एक अच्छा कार्य माना गया है।

निर्जला एकादशी के दिन व्रती स्वंय तो जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करता । लेकिन दूसरों में जल बांटता है। जिसका कारण शास्त्रों में बताया गया है। मन की इच्छाओं को नियंत्रण रखना यानी व्रत रखने वाला व्यक्ति इस दिन अपने जीवन की सभी जरूरी चीजें त्याग करके वहीं चीजे दूसरों में बांट देना।


यह दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति के लिए परीक्षा का दिन है। उसके चारों और जीवन के सभी साधन उपलब्ध रहते हैं । अगर उसका मन इन साधनों की ओर चला जाता है तो उसका व्रत खंडित हो जाता है। वहीं व्रती चोरों तरफ इन साधनों के होने का बाद भी सिर्फ अपने व्रत के नियमों का पालन ही करता है तो वह भगवान विष्णु की कृपा का पात्र बन जाता है।

अपनी सभी इच्छाओं का त्याग करके व्रत रखने वाला व्यक्ति इस समय पूरी तरह भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहता है और दूसरों को सेवा से ही स्वंय भी संतुष्ट होता है। इसी कारण निर्जला एकादशी के व्रत को शास्त्रों में सबसे बड़ा व्रत बताया गया है और इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति अपनी इच्छाओं का त्याग करके महान बनता है।

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