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Nirjala Ekadashi 2019 : निर्जला एकादशी शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और कथा

Nirjala Ekadashi 2019 : एकादशियों में महान कही जाने वाली निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। जिसका कारण है कि निर्जल होकर व्रत (Nirjal Vrat) रखना और भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) की स्तुति करना । शास्त्रों के अनुसार जो कोई व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत (Nirjala Ekadashi Vrat) रखता है। उसे जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है इस साल निर्जला एकादशी 2019 (Nirjala Ekadashi 2019 ) में 13 जून 2019 ( 13 June 2019) यानी आज ही के दिन मनाई जाएगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पुण्यदायी एकादशी का शुभ महुर्त क्या है (Ekadashi Subh Mahurat), क्या है निर्जला एकादशी का महत्व (Kya Hai Nirjala Ekadashi Ka Mahatva) , क्या है निर्जला एकादशी की पूजा विधि (Kya Nirjala Ekadashi ki Puja Vidhi) और क्या है निर्जला एकादशी की कथा (Kya Nirjala Ekadashi Ki Katha) अगर आपको निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) की इन सभी बातों के बारे में नहीं पता तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो चलिए जानते हैं क्या है निर्जला एकादशी का शुभ महुर्त क्या है निर्जला एकादशी का महत्व , क्या है की पूजा विधि.....

Nirjala Ekadashi 2019 : निर्जला एकादशी शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और कथा
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Nirjala Ekadashi 2019 : एकादशियों में महान कही जाने वाली निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। जिसका कारण है कि निर्जल होकर व्रत (Nirjal Vrat) रखना और भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) की स्तुति करना । शास्त्रों के अनुसार जो कोई व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत (Nirjala Ekadashi Vrat) रखता है। उसे जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है इस साल निर्जला एकादशी 2019 (Nirjala Ekadashi 2019 ) में 13 जून 2019 ( 13 June 2019) यानी आज ही के दिन मनाई जाएगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पुण्यदायी एकादशी का शुभ महुर्त क्या है (Ekadashi Subh Mahurat), क्या है निर्जला एकादशी का महत्व (Kya Hai Nirjala Ekadashi Ka Mahatva) , क्या है निर्जला एकादशी की पूजा विधि (Kya Nirjala Ekadashi ki Puja Vidhi) और क्या है निर्जला एकादशी की कथा (Kya Nirjala Ekadashi Ki Katha) अगर आपको निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) की इन सभी बातों के बारे में नहीं पता तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो चलिए जानते हैं क्या है निर्जला एकादशी का शुभ महुर्त क्या है निर्जला एकादशी का महत्व , क्या है की पूजा विधि.....


निर्जला एकादशी शुभ मुहूर्त (Nirjala Ekadashi Subh Mahurat)

एकादशी तिथि प्रारंभ- 6 बजकर 27 मिनट से (12 जून 2019)

एकादशी तिथि समाप्ति - 4 बजकर 49 मिनट तक (13 जून 2019)

पारण का समय - सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक (14 जून 2019)


निर्जला एकदशी का महत्‍व (Nirjala Ekadashi Ka Mahatva)

एकदशी में मुख्य रूप में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे बड़ा स्ठान दिया गया है । पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पता । वह सिर्फ निर्जला एकादशी का ही व्रत कर ले तो उसे सभी एकादशियों का फल मिल जाएगा।

प्रत्येक साल में 24 एकादशियां आती है। इन्हीं में से एक निर्जला एकादशी भी होती है। विष्णु पुराण के अनुसार एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। साल की सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी का पुण्य फल कई गुना है। कई बार साल में मलमास या अधिमास होने के कारण 24 एकादशियों की जगह 26 एकादशियां भी पड़ जाती है।

इसलिए माना जाता है कि जो व्यक्ति साल की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पता। अगर वह सिर्फ निर्जला एकादशी का ही व्रत कर ले तो उसे सभी एकादशियों का फल मिल जाता है। निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की जाती है। निर्जला एकादशी का व्रत इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस व्रत में पानी तक नहीं पिया जाता।


निर्जला एकादशी पूजा विधि (Nirjala Ekadashi Puja Vidhi)

1.निर्जला एकादशी के नियमों का पालन दशमी तिथि से ही करना चाहिए।

2.सभी नित्य कर्म से निवृत होकर घर की साफ सफाई करें और नहाधोकर साफ वस्त्र धारण करें।

3.भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित के बाद लाल पुष्प की माला , अक्षत , फल व नैवेध भगवान विष्णु को अर्पण करें।

4.निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु के 'ऊं नमो वासुदेवाय' का जाप करना अत्यंथ शुभ होता है।

5. निर्जला एकादशी के दिन गोदान का विशेष महत्व है। इसलिए हो सके तो इस दिन गौ -दान अवश्य करें।


निर्जला एकादशी व्रत कथा (Nirjala Ekadashi Vrat Katha)

निर्जला एकादशी से संबंधित पौराणिक कथा के कारण इसे पाण्डव एकादशी और भीमसेनी या भीम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पाण्डवों में दूसरा भाई भीमसेन खाने-पीने का अत्यधिक शौकीन थे। अपनी भूख को नियन्त्रित करने में सक्षम नहीं थे इस कारण वह एकादशी व्रत को नही कर पाते थे।

भीम के अलावा बाकि पाण्डव भाई और द्रौपदी साल की सभी एकादशी व्रतों को पूरी श्रद्धा भक्ति से किया करते थे। भीमसेन अपनी इस लाचारी और कमजोरी को लेकर परेशान था। भीमसेन को लगता था कि वह एकादशी व्रत न करके भगवान विष्णु का अनादर कर रहा है।

इस दुविधा से उभरने के लिए भीमसेन महर्षि व्यास के पास गया तब महर्षि व्यास ने भीमसेन को साल में एक बार निर्जला एकादशी व्रत को करने कि सलाह दी और कहा कि निर्जला एकादशी साल की चौबीस एकादशियों के तुल्य है। जिसके बाद भीम ने निर्जला एकादशी का पूरे विधि-विधान से व्रत किया।

इसी पौराणिक कथा के बाद निर्जला एकादशी भीमसेनी एकादशी और पाण्डव एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हो गयी। इस एकादशी को सभी एकादशीयों में विशिष्ट स्थान प्राप्त है । इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को अपने जीवन के सभी पापों से छुटकारा मिलता है।

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