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Navratri Special : नवरात्रि पर जानिए मां कैला देवी की कथा

Navratri Special शारदीय नवरात्रि का पर्व (Shardiye Navratri Festival) इस साल 2019 में 29 सितंबर 2019 (29 September 2019) से मनाया जाएगा, इस समय मां कैला देवी के मंदिर में श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ मां कैला के दर्शनों के लिए उमड़ती है, मां कैला देवी का मंदिर अरावली पहाड़ियों की वनस नदी की एक उपनदी काली सील के तट पर स्थित है,जहां कैला देवी विराजमान है तो आइए जानते हैं नवरात्रि पर मां कैला देवी का रहस्य

Navratri 2019: नवरात्रि पर जानिए मां कैला देवी का रहस्यNavratri 2019 Navratri Goddess Kaila Devi Karoli Mata Secret

Navratri 2019 नवारात्रि पर लोग मां दुर्गा (Maa Durga) की उपासना के करते हैं और उनके कई रूपों के दर्शन के लिए दूर- दूर मंदिरों में जाते हैं। इन्हीं मंदिरों मे से एक मंदिर है कैला देवी मंदिर। इस मंदिर को मां दुर्गा के 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। जहां पर मां कैला देवी (Maa Kaila Devi) स्वयं विराजमान है। इस मंदिर को राजपूत शासकों ने 1600 ईसवीं पूर्व में बनवाया था। कैला देवी के इस मंदिर में चैत्र नवरात्रि में बहुत ही विशाल मेला लगाता है। जहां पर लोग मां के दूर- दूर से दर्शनों के लिए आते हैं तो आइए जानते हैं नवरात्रि पर मां कैला देवी की कथा...


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मां कैला देवी की कथा (Kaila Devi Story)

कैला देवी मंदिर करौली जो एक हिंदू मंदिर है। जिसमें लोगों की बहुत आस्था है। जो राजस्थान के करौली जिले के कैला देवी गांव में स्थित है। यह मंदिर अरावली की पहाड़ियों की वनस नदी की एक उपनदी काली सील नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर देवी कैला को समर्पित है। इस मंदिर की खास बात यह है कि इस मंदिर में विराजमान माता को अपने एक खास भक्त का इंतजार है। राजस्ठान का कैला देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

कैला देवी मंदिर से एक खास मान्यता जुड़ी हुई है। जिसके अनुसार लगभग 1600 ईसवीं पूर्व इस मंदिर का निर्माण करौली राज्य के पूर्ववर्ती रियासत जदान राजपूत शासकों ने करवाया था। यह मंदिर कैला देवी यानी दुर्गा देवी को समर्पित है। जो उत्तर भारत के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है। माना जाता है कि माता कैला देवी के एक परम भक्त ने मां के दर्शन करने के बाद बहुत जल्द वापस आने के लिए मां से कहा था।

लेकिन वह फिर कभी भी मां के पास वापस लौटकर नहीं आया था। उस परम भक्त के लिए माता आज भी इंतजार में और उसी दिशा में देख रही हैं। जिस तरफ से वह भक्त गया था और इसी कारण से मां का मुंह आज भी टेढ़ा है। यह मंदिर संगमरमर से बना हुआ है। जिसमें बड़े आंगन हैं। कैला देवी का वार्षिक मेला चैत्र मास के नवरात्रि में गांव कैला देवी में आयोजित किया जाता है।


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यहां भैरों को समर्पित छोटे मंदिर भी हैं। जो इस मंदिर के आंगन में स्थित हैं और कैला देवी के मंदिर के सामने हनुमान जी का मंदिर भी है। जिसे स्ठानीय तौर पर लंगूरिया कहा जाता है। मुख्य रूप से मध्य प्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों से लगभग लाखों हिंदू भक्त चैत्र नवरात्रि में मेले के दौरान इकट्ठा होते हैं।

कनक दंडोत्स का अनुष्ठान कट्टर श्रद्धालुओं द्वारा मनाया जाता है। यहां पर लोगों के बहुत से समूह यहां लोक गीत और नृत्य करते हैं और जीवंत भक्तिमय वातावरण बनाते हैं। विशाल आंगन में देवी देवताओं की प्रशंसा में गाने गाए जाते हैं और नृत्य से पूरा कैला देवी का परिसर भक्तिमय स्थल बन जाता है।

मां कैला देवी के इस मंदिर में पूरे साल भक्तों की भीड़ लगी रहती है। माना जाता है कि जो भी मनुष्य मां के इस दरबार में सच्ची श्रद्धा के साथ आता है उसकी सभी इच्छांए पूर्ण होती है। कुछ लोग यहां पर अपनी इच्छा के पूर्ण होने पर पेढ़ भरते (लेटकर )हुए मां के दर्शनों के लिए मंदिर में जाते हैं। इसके अलावा चैत्र मास की नवरात्रि में लोग काफी दूर से मां के दरबार में हाजरी देने के लिए आते हैं।

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