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Navratri 2019: जानिए नवरात्रि के पीछे का वैज्ञानिक कारण

Navratri Scientific Reason In Hindi नवरात्रि का आगमन ऋतुओं के साथ होता है और इसके साथ ही नवरात्रि का धार्मिक के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी होता है। नवरात्रि के दौरान की गई प्रार्थना, जप और ध्यान से मन मस्तिष्क शांत रहते हैं। मन का आत्मा से संपर्क होने पर हमारे भीतर सकारात्मक गुणों का संचार होता है और आलस्य, घमंड, जुनून, तड़प और उथल-पुथल को नष्ट हो जाते हैं।

Navratri 2019: जानिए नवरात्रि के पीछे का वैज्ञानिक कारणNavratri 2019 Navratri Scientific Reason In Hindi

Navratri 2019 नवरात्रि वह समय होता है। जब हवन, यज्ञ और पूजा पाठ करने से अत्याधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। नवरात्रि (Navratri) को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अधिक लाभप्रद माना जाता है। यह वह समय होता है जब सभी शुभ कामों की शुरुआत होता है। हवन और पूजा पाठ करने से न केवल मानसिक शक्ति मिलती है। बल्कि इससे विचारों में भी शुद्धि आती है। शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर 2019 (Shardiya Navratri 29 September 2019) से प्रारंभ हो रही है तो आइए जानते हैं नवरात्रि के पीछे का वैज्ञानिक कारण (Navratri Scientific Reason) क्या है ?


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नवरात्रि के पीछे का वैज्ञानिक कारण (Navratri Ka Vagyanik Karan)

नवारात्रि का त्योहार प्रत्येक साल बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्योहार पर लोग वैदिक परंपरा से पूजा करते हैं और हजारों लोग माता दुर्गा के दर्शनों के लिए जाते हैं। नवरात्रि पर 1005 कुंभाभिषेक और 2100 से अधिक चंडी होम आयोजित किए जाते हैं। नवरात्रि पर यज्ञ का भी आयोजन किया जाता है। इस समय में किया गया हवन, पूजा और यज्ञ बहुत अधिक लाभ पहुंचाता है। हवन और यज्ञ करने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं। इसी कारण से नवरात्रि को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवरात्रि का त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है। एक तो चैत्र मास के महिने में जिसे चैत्र नवरात्रि कहा जाता है और दूसरा शारदीय नवरात्रि जो कुंवार मास में मनाया जाता है। चैत्र नवरात्रि और शारदिय नवरात्रि उत्तर भारत में मुख्य रूप से मनाया जाता है। लेकिन शारदीय नवरात्रि दक्षिण भारत में भी मनाया जाता है। नवरात्रि का समय अत्यंत ही महत्वपूर्ण और शुभ समय माना जाता है। इस समय में सभी प्रकार के शुभ कामों का आरंभ होता है। यही वह समय भी होता है जब मौसम अपनी करवट बदलता है यानी मौसम में बदलाव आता है।


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नवारत्रि को त्योहार प्रत्येक जीव के लिए कल्याण, शांति और समृद्धि के लिए होता है। नवरात्रि का समय वह समय होता है जब ऋतु बदलती है। शास्त्रों के अनुसार इस समय असुरी शक्तियों को नष्ट करने के लिए हवन और पूजन किया जाता है। नवरात्रि पर हवन पूजन करने से स्वास्थय भी ठीक रहता है। यही कारण हैं कि साल में आने वाले सभी नवरात्र ऋतुओं के संधिकाल में होते हैं। यही वह समय होता है जब मौसम बदलता है। जिससे शरीर और मानसिकता में कमीं आती है। इसलिए शरीर और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए व्रत और पूजा की जाती है।

नवरात्रि को स्वास्थय के दृष्टिकोण से अत्याधिक महत्व दिया जाता है। इस समय व्रत करने से न केवल मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। बल्कि शरीर और विचारों की भी शुद्धि होती है। जिस प्रकार से हम नहाकर अपने शरीर की सफाई करते हैं। उसी प्रकार नवरात्रि के इस पावन अवसर पर शरीर के साथ - साथ विचारों की शुद्धि की जाती है। जो अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। जिस समय मौसम बदलता है। उस समय शरीर को रोगों से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाना पड़ता है। नवरात्रि पर व्रत करने से शरीक की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। इसलिए नवरात्रि को विशेष माना जाता है।

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