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Navratri 2019: ये मंदिर है मां दुर्गा के 10 मशहुर मंदिर, जहां दर्शन मात्र से ही मिल जाती है जीवन के सभी परेशानियों से मुक्ति

शारदीय नवरात्रि का पर्व कल यानी 29 सितंबर 2019 से प्रारंभ हो रहा है, मां दुर्गा के अनन्य भक्त नवरात्रि पर मां के मंदिरों उनके दर्शनों के लिए जाते हैं, इन मंदिरों में मां दर्शन मात्र से ही जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति हो जाती है तो आइए जानते हैं मां दुर्गा के 10 मशहुर मंदिर कौन से हैं।

Navratri 2019: ये मंदिर है मां दुर्गा के 10 मशहुर मंदिर, जहां दर्शन मात्र से ही मिल जाती है जीवन के सभी परेशानियों से मुक्तिNavratri 2019 Navratri Ten Famous Temple of Goddess Durga

Navratri 2019 नवरात्रि पर मां दुर्गा की पूजा (Maa Durga Ki Puja) अर्चना करने का विधान है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां दुर्गा के कुछ मंदिर ऐसे भी हैं। जहां पर केवल दर्शन मात्र से ही आप अपने जीवन के सभी दुखों को दूर कर सकते हैं और अपने जीवन के सभी सुखों को प्राप्त कर सकते हैं। क्योंकि यह सभी मंदिर मां दुर्गा (Maa Durga) के सिद्ध मंदिर माने जाते हैं। इन मंदिरो में जो भी भक्त सच्चे मने से मां दुर्गा के दर्शनों के लिए आता है मां उसे अपना कृपा का पात्र अवश्य बनाती है तो आइए जानते हैं मां दुर्गा के 10 मशहुर मंदिर कौन से हैं।

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नैना देवी मंदिर (Naina Devi Temple)

नैना देवी मंदिर में माता सती की पूजा- अर्चना की जाती है। यह मंदिर 51 सिद्ध शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। इस मंदिर में देवी सती के दोनों नेत्र गिरे थे। इसलिए इस मंदिर को नैना देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है। नैना देवी का यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है।


ज्वाला देवी मंदिर (Jwala Devi Temple)

ज्वाला देवी का यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर कि विशेष बात यह है कि इसमें एक दिव्य ज्योति हमेशा ही जलती रहती है और मां के दर्शन इसी दिव्य ज्योति के रूप में किए जाता है। मां ज्वाला को अकबर ने भी अपने अहंकार में सोने को छत्र चढ़ाया था। जिसे मां कि दिव्य ज्योति ने काला कर दिया था।


कागंड़ा देवी मंदिर (Kangra Devi Temple)

कांगड़ा देवी का यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है। मां कागंड़ा को नगरकोट की देवी और वृजेश्वरी देवी के नाम से भी जाना जाता है। कांगड़ा का पुराना नाम नगरकोट था और माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों के द्वारा कराया गया था। यहां पर मां कांगड़ा एक पिंडी रूप में विद्यमान हैं।


मां दक्षिणेश्वरी काली मंदिर (Maa Dakshineshwari Kali Temple)

मां दक्षिणेश्वरी काली का मंदिर बंगाल की राजधानी कोलकत्ता में हुगली नदी के किनारे एक मठ के किनारे स्थित है। यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। इस जगह पर मां सती के पैर की चार उंगलियां गिरी थी। इस मंदिर में 12 गुंबद और 12 भगवान शिव की प्रतिमा स्थित हैं।


मां चिंतपूर्णी मंदिर (Maa Chintpurni Temple)

मां चिंतपूर्णी का मंदिर हिमाचल प्रदेश में स्थित है। यह मंदिर माता सती के 51 सिद्ध शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि यहां पर मां सती के चरण गिरे थे। मां चिंतपूर्णी के दर्शन से उनके भक्तों की सभी चिंताएं समाप्त होती है। यहां पर नवरात्रि का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।

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मां वैष्णों देवी मंदिर (Mata Vaishno Devi Temple)

मां वैष्णों देवी का यह जम्मू कश्मीर के कटरा जिले के त्रिकुट पर्वत पर स्थित है। शास्त्रों के अनुसार यहां पर मां स्वंय विराजित हैं। यहां पर मां के दर्शन करने के लिए लगभग 14 किलोमीटर की लंबी चढ़ाई करके जाना पड़ाता है। इसके अलावा मां वैष्णों देवी के दर्शन के बाद भैरोनाथ बाबा के भी दर्शन करने पड़ते हैं। क्योंकि उनके दर्शनों के बिना वैष्णों देवी की यात्रा पूर्ण नही होती।


करणी माता का मंदिर (Karni Mata Temple)

करणी माता का मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है। इस मंदिर में मां करणी की मूर्ति स्थापित की गई है। यह मंदिर चूहों के कारण अत्याधिक प्रसिद्ध है। इस मंदिर में संगमरमर के पत्थरों की नक्काशी की गई है। यहां पर लोग चूहों का झूठा प्रसाद खाते हैं।


श्री महालक्ष्मी मंदिर (Shri Mahalaxmi Temple)

मां महालक्ष्मी का यह मंदिर महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है। इस मंदिर में देवी महालक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है। श्री महालक्ष्मी मंदिर मंदिर की खास बात यह है कि यहां पर चारों दिशाओं से प्रवेश किया जा सकता है। यह मंदिर भी 51 सिद्ध पीठों में से एक माना जाता है।


मां कामाख्या देवी मंदिर (Maa Kamakhya Devi Temple)

कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर को 51 सिद्ध पीठों में से एक माना जाता है। यहां पर मां सती की योनी का भाग आकर गिरा था। इस मंदिर में तांत्रिक साधनाएं और तंत्र मंत्र से जुड़े अनुष्ठान किए जाते हैं।


मां दंतेश्वरी मंदिर (Maa Danteshwari Tample )

मां दंतेश्वरी मंदिर मां सती के 51 सिद्ध पीठों में से एक माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार यहां पर मां सती का दांत आकर गिरा था। मां दंतेश्वरी का यह मंदिर छतीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण चालुक्य राजाओं ने 14 वीं शताब्दी में कराया था।

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