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Navratri 2019 : नवरात्रि पर जानिए झंडेवाली माता की कहानी

Navratri 2019 झंडेवाली माता का मंदिर सिद्ध मंदिरों में से एक है, झंडेवाली माता की कहानी बहुत कम लोग जानते हैं, प्राचीन काल में खुदाई के समय झंडेवाली वाली माता की मूर्ति के नाम निकली, लेकिन खुदाई के समय माता की मूर्ति खंडित हो गई।

Navratri 2019 : नवरात्रि पर जानिए क्या है मां झंडेवाली का रहस्यNavratri 2019 Navratri Special Jhandewali Mata Story

Navratri 2019 नवरात्रि में लोग मां दुर्गा के मंदिरों में उनके दर्शनों के लिए जाते हैं। उन्हीं में से एक है मां झंडेवाली का मंदिर। जहां पर लोग झंडेवाली माता के दर्शनों के लिए दूर- दूर से आते हैं। शारदीय नवरात्रि (Shardiye Navratri) इस साल 2019 में 29 सितंबर 2019 (29 September 2019) से प्रारंभ हो रही है। मां झंडेवाली का मंदिर एक सिद्धपीठ है। जहां पर लोग मां से अपनी मुरादें पूरी करवाने के लिए आते हैं। मां के इस मंदिर की भव्यता नवरात्रि में देखने लायक होती है क्योंकि हर साल नवरात्रि में यहां पर कुछ नया अवश्य किया जाता है। तो आइए जानते हैं नवरात्रि पर मां झंडेवाली की कहानी (Jhandewali Mata Story)...


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झंडेवाली माता की कहानी (Jhandewali Mata Story)

दिल्ली का झंडेवाला मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। इस मंदिर में लाखों लोग मां झंडेवाली के दर्शनों के लिए आते हैं। यहां पर श्रद्धालुओं की जो भीड़ उमड़ती है। वह देखने लायक होती है। झंडेवाले मंदिर को झंडेवालन के नाम से भी जाना जाता है। जो दिल्ली के पहाड़ गंज में स्थित है। यह मंदिर बहुत ही विशाल है। वैसे तो इस मंदिर में हजारो लोग मां के दर्शनों के लिए आते हैं। लेकिन नवरात्रि में मां के मंदिर की रौनक देखने लायक होती है।

क्योंकि इस समय बहुत से श्रद्धालु मां के दर्शनों के लिए आते हैं। इस समय इस मंदिर को बड़े ही भव्य तरीके से सजाया जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर को हर बार नवरात्रि पर नए - नए तरीके से सजाया जाता है। मां झंडेवाली का यह मंदिर इतना लोकप्रिय कैसे बना । इसके बारे में एक प्राचीन कथा प्रसिद्ध है। जिसके अनुसार मां वैष्णों देवी के एक परम भक्त बद्री दास हुआ करते थे। जो एक कपड़ा व्यापारी थे।

एक दिन बद्री दास मां की पूजा कर रहे थे । तब ही उन्हें एहसास हुआ कि इस जमीन के नीचे जरूर कुछ है। बद्री दास ने उस जगह पर जमीन की खुदाई करवानी शुरू कर दी। खुदाई करने पर उन्हें वहां पर एक झंडा मिला। जिसके कारण इस मंदिर का नाम झंडेवालान रखा गया और जब आगे की खुदाई शुरू की गई तो वहां पर एक देवी की मूर्ति दिखाई दी। जिसके हाथ खुदाई के समय टुट गए थे।


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मूर्ति को स्थापित करने के बाद मां के हाथों को चांदी का बनवाया गया। ताकि खंडित मूर्ति की पूजा का दोष न लगे। मां की यह मूर्ति आज भी गुफा में स्थित है। जिसके दर्शन मात्र से ही सभी प्रकार के कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। यह मंदिर मां का एक सिद्धपीठ है। इस मंदिर के मध्य में मां झंडेवाली की एक विशाल मूर्ति स्थापित है। जिसके दाई और मां काली और बाईं और मां सरस्वती विद्यमान है।

इस मंदिर में नीचे की और एक गुफा भी है। जिसमें भगवान शिव और मां काली का मंदिर भी है। नवरात्रि में इस मंदिर में आम लोगों के लिए भण्डारा 24 घंटे चलता रहता है। वहीं इस झंडेवालान मंदिर के सामने एक और छोटा मंदिर भी है। जिसमें एक पीपल का पेड़ है जहां पर भी लोग पूजा - अर्चना करते हैं और मंदिर के अंदर सभी देवी- देवताओं की मूर्ति स्थापित है। झंडेवालान मंदिर के थोड़ा सा आगे जाकर काली मां का एक छोटा से मंदिर भी है।

जहां पर श्रद्धालु मां को तेल का दिया जलाकर उनका पूजन करते हैं। इस मंदिर में मां काली के अलावा हनुमान जी की मूर्ति भी है। जहां पर लोग बंजरंग बली के दर्शन करते हैं। बजरंग बलि के अलावा अंदर जाकर अन्य देवी देवताओं की मूर्ति भी स्थापित की गई हैं।

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