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Navratri 2019 : नवरात्रि पर जानिए किसने किया था पहली बार नवरात्रि का व्रत

Navratri 2019 शारदीय नवरात्रि का पर्व इस साल 2019 में 29 सितंबर 2019 से प्रारभ हो रहा, शास्त्रों की मानें तो नवरात्रि पर मां दुर्गा की आराधना करने से विजय का आर्शीवाद प्राप्त होता है,त्रेतायुग में अपनी जीत के लिए भगवान श्री राम और रावण दोनों ने ही अपनी विजय के लिए मां दुर्गा की आराधना की थी तो आइए जानते हैं हैं किसने किया था पहली बार नवरात्रि का व्रत और मां दुर्गा की पूजा

Navratri 2019 : नवरात्रि पर जानिए किसने किया था पहली बार नवरात्रि का व्रतNavratri 2019 History Of Navratri First Fast Story

Navratri 2019 नवरात्रि का पर्व भारत में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। लोग नवरात्रि पर मां दुर्गा (Maa Durga) के नौ रूपों की आराधना करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्री कब से शुरू हुई थी और किसने नवरात्रि का पहला व्रत करके मां भगवती देवी दुर्गा की आराधना की थी। अगर नहीं तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे।। शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) के खत्म होने के अगले दिन ही विजयदशमी का त्योहार मनायाा जाता है। जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है तो आइए जानते हैं किसने किया था पहली बार नवरात्रि का व्रत और मां दुर्गा की पूजा


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नवरात्रि का पहला व्रत किसने किया था (Navratri Ka Pahla Vrat Kisne Kiya Tha)

पौराणिक कथा के अनुसार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत भगवान राम ने कि थी। माना जाता है कि लंका में रावण से युद्ध से पहले भगवान राम ने शक्ति के प्रतीक मां दुर्गा की आराधना नौ दिनों तक की थी। तब ही जाकर भगवान श्री राम को लंका पर जीत हासिल हुई थी। लंका युद्ध में ब्रह्मा जी ने भगवान श्री राम से चंडी देवी का पूजन और व्रत कर प्रसन्न करने के लिए कहा और बताया कि चंडी पूजन और हवन हेतु दुर्लभ 108 नील कमल की व्यस्था करें। वहीं रावण ने भी अमृत्व के लोभ में विजय हेतु चंडी पाठ प्रारंभ कर दिया।

यह बात इंद्र देव ने पवन देव के माध्यम से श्री राम के पास पहुंचाई और परामर्श दिया की चंडी पाठ यथासंभव पूर्ण होने दिया जाए। इधर श्री राम के हवन सामग्री में और पूजा स्थल में से एक नील कमल रावण ने मायावी शक्ति से गायब कर दिया। यह देखकर भगवान श्री राम को अपना संकल्प टुटता हुआ नजर आया। भगवान श्री राम को इस बात का भी भय था कि कहीं देवी मां उनसे रुष्ट न हो जाएं। दुर्लभ नीलकमल की व्यस्था तत्काल असंभव थी। इसके बाद भगवान श्री राम को सहज ही यह स्मरण हुआ कि लोग मुझे कमल नयन नवकंच लोचन कहते हैं तो क्यों न संकल्प मैं अपना एक नेत्र देवी मां को अर्पित कर दूं।


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प्रभु श्री राम ने जैसे ही अपने तरकश में से एक तीर निकाला और अपना नेत्र निकालने के लिए तैयार हुए तब देवी मां प्रकट हुई और भगवान श्री राम का एक हाथ पकड़कर कहा कि राम मैं तुमसे अति प्रसन्न हुं और मैं तुम्हें विजय श्री का आर्शीवाद देती हुं। वहीं दूसरी और रावण के चंडी पाठ में यज्ञ कर रहे ब्राह्मणों में ब्राह्मण बालक का रूप रखकर हनुमान जी सेवा में जुट गए। निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हनुमान जी से ब्राह्मणों ने वर मांगने के लिए कहा। इस पर हनुमान जी ने विनम्रता पूर्वक कहा कि यदि आप सब मुझ पर प्रसन्न हैं तो जिस मंत्र से आप यज्ञ कर रहे हैं। उस मंत्र का एक अक्षर मेरे कहने से बदल दीजिए।

ब्राह्मण इस रहस्य को समझ नहीं सके और तथास्तु कह दिया। हनुमान जी ने कहा जया देवी भूर्ति हरणी में 'क' शब्द का प्रयोग करें। भूर्ति हरणी यानी की प्राणों की पीड़ा हरने वाली और भूर्ति करणी का अर्थ हो जाता है प्राणों पर पीड़ा करने वाली यह बदला हुआ मंत्र जैसे ही जपा गया। उसी समय देवी रुष्ट हो गई और रावण का सर्वनाश कर दिया। हनुमान जी ने श्लोक में ह की जगह क करवाकर रावण के यज्ञ की दिशा ही बदल दी और यही कारण है कि दशहरे के पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। इस तरह से भगवान श्री राम ने नवरात्रि पर नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की थी।

जहां तक नवरात्रि का सवाल है। इसे हर राज्य में अलग- अलग तरीके से मनाया जाता है। गुजरात में जहां नौ दिनों तक गरबा की धूम रहती है। वहीं पश्चिम बंगाल में चार से पांच दिनों तक दूर्गा पूजा की रौनक रहती है। भले ही इस त्योहार को अलग - अलग तरीके से मनाया जाता है। लेकिन हर राज्य में इसकी रौनक बहुत अधिक होती है।

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