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मार्गशीर्ष अमावस्या की 10 जरूरी बातें बदल देंगी जिंदगी, मात्र स्नान से दूर होंगे पितृ दोष

मार्गशीर्ष अमावस्या का शुभ मुहूर्त गुरुवार 6 दिसंबर 2018 में 12:12 मिनट से आरंभ होकर 7 दिसंबर 2018, शुक्रवार को 12:50 मिनट पर समाप्त होगा।

मार्गशीर्ष अमावस्या की 10 जरूरी बातें बदल देंगी जिंदगी, मात्र स्नान से दूर होंगे पितृ दोष

मार्गशीर्ष अमावस्या 7 दिसंबर शुक्रवार को मनाई जा रही है। इस अमावस्या में स्नान और तर्पण आदि का विशेष महत्व है। मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मार्गशीर्ष अमावस्या कहा जाता है। इसे अगहन और पितृ अमावस्या भी कहा जाता है। मार्गशीर्ष अमावस्या का शुभ मुहूर्त गुरुवार 6 दिसंबर 2018 में 12:12 मिनट से आरंभ होकर 7 दिसंबर 2018, शुक्रवार को 12:50 मिनट पर समाप्त होगा।


आइए जानते हैं कि क्यों महत्वपूर्ण है मार्गशीर्ष अमावस्या....

विष्णु पुराण के अनुसार मार्गशीर्ष माह माता लक्ष्मी को प्रिय है इसलिए मार्गशीर्ष अमावस्या पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। इसिलए अगहन मास की अमावस्या पर लक्ष्मी पूजा और व्रत से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है। मार्गशीर्ष अमावस्या में स्नान से भी पितृ दोष दूर होते हैं। इसलिए हम आपको मार्गशीर्ष अमावस्या की खास बातें बता रहे हैं....

  • मार्गशीर्ष अमावस्या में स्नान का विशेष महत्व है, इस दिन व्रत के साथ गंगा स्नान, नदी, तलाब में स्नान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
  • मार्गशीर्ष महीने में भगवान श्री कृष्ण ने गीता ज्ञान दिया था। जिस कारण मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि पुण्यदायी मानी जाती है।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन स्नान और तर्पण करने से पितरों का प्रसन्न किया जाता है।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितृ दोष दूर करने के उपाय किए जाते हैं।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या को पितृ पूजा से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या व्रत करने से व्यक्ति के कुंडली दोष दूर किए जा सकते हैं। व्रत-उपवास से जातक की कुंडली के पितृ दोष दूर होते हैं।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन व्रत पूजन करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन शाम के समय भगवान शिव के मंदिर में दीपक जलाना चाहिए।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन अधिकतर लोग घरों में श्री सत्यनारायण की पूजा करवाते हैं इससे अति लाभ होता है।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन दान-पुण्य करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। ऐसी मान्यता है कि पितरों को प्रसन्न देवताओं को प्रसन्न करने से भी अति लाभदायी है।

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