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Makar Sankranti 2019: मकर संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति (2019) का महत्व शास्त्रों में बेहद खास बताया गया है। मकर संक्रांति साल 2019 में 15 जनवरी (मंगलवार) को मनाया जाएगा। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक और उत्तरायण को देवताओं का दिन यानि सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है।

Makar Sankranti 2019: मकर संक्रांति का महत्व
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मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2019) का महत्व शास्त्रों में बेहद खास बताया गया है। मकर संक्रांति (Makar Sankranti) साल 2019 में 15 जनवरी (मंगलवार) को मनाया जाएगा। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार,

दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक और उत्तरायण (Uttarayana) को देवताओं का दिन यानि सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2019) के दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रिया-कलापों का विशेष महत्व है।

ऐसी मान्यता है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी और कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। जैसा कि निचे लिखे श्लोक से स्पष्ठ होता है:-

मकर संक्रांति (2019) का महत्व (Makar Sankranti Importance)

"माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम। स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥" मकर संक्रांति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है।

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इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग (Tirthraj Prayag) और गंगासागर (Gangasagar) में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गई है। सामान्यत: सूर्य (Surya) सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है।

यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया 6-6 माह के अन्तराल पर होती है। भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात् भारत से अपेक्षाकृत अधिक दूर होता है।

मकर संक्रांति (2019) का महत्व (Makar Sankrati Importance)

इसी कारण यहाँ पर रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है। किन्तु मकर संक्रांति (Makar Sankranti) से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। इसलिए इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है।

दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अन्धकार कम होगा। अत: मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है।

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प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतनता एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होगी। ऐसा जानकर सम्पूर्ण भारतवर्ष में लोगों द्वारा विविध रूपों में सूर्यदेव की उपासना, आराधना एवं पूजन कर, उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की जाती है।

सामान्यत: भारतीय पंचांग पद्धति की समस्त तिथियाँ चन्द्रमा की गति को आधार मानकर निर्धारित की जाती हैं, किन्तु मकर संक्रांति को सूर्य की गति से निर्धारित किया जाता है।

इसी कारण यह पर्व प्रतिवर्ष 14 जनवरी को ही पड़ता है। लेकिन साल 2019 में मकर संक्रांति 15 जनवरी (मंगलवार) को मनाया जाएगा।

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