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Makar Sankranti 2019: मकर संक्रांति की तिथि और समय को लेकर है लोगों में भ्रम, यहाँ जानिए सही तिथि, समय और शुभ मुहूर्त

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jan 7 2019 2:17PM IST
Makar Sankranti 2019: मकर संक्रांति की तिथि और समय को लेकर है लोगों में भ्रम, यहाँ जानिए सही तिथि, समय और शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति 2019 की तिथि और समय को लेकर इस साल थोड़ी बहुत दुविधा बनी हुई है। दरअसल इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को पड़ रही है और पुण्यकाल का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 19 मिनट से लेकर 12 बजकर 30 मिनट तक है।

साल 2018 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को पड़ी थी। इसके अलावा दो साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब 15 जनवरी को मकर संक्राति का उत्सव मनाया जाएगा। मकर संक्रांति को लेकर आम धरना है कि यह पर्व हार साल 14 जनवरी को ही मनाई जाएगी।

शास्त्रों के अनुसार यदि मकर संक्रांति की तिथि और समय देखा जाए यह बिलकुल अलग है। दरअसल मकर संक्रांति 'संक्रांति' तिथि को मनाई जाती है। पंचाग के अनुसार यह कोई आवश्यक नहीं है कि संक्रांति हर साल 14 जनवरी को ही पड़े।

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वास्तविकता यह है कि जब मलमास पड़ता है तब तिथियों में बदलाव होता है और तिथियां आगे-पीछे हो जातीं हैं। यही कारण है कि इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी (मंगलवार) 2019 को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। 

मकर संक्रांति 2019: मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त:- 

पुण्य काल- 07:19 से 12:30

पुण्यकाल की कुल अवधि- 5 घंटे 11 मिनट

संक्रांति आरंभ- 14 जनवरी 2019 (सोमवार) रात्रि 20:05 से

मकर संक्रांति महापुण्यकाल शुभ मुहूर्त- 07:19 से 09:02 

महापुण्य काल की कुल अवधि- 1 घंटा 43 मिनट 

मकर संक्रांति 2019: मकर संक्रांति का महत्व 

शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है।

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मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है।

सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया 6-6 माह के अन्तराल पर होती है।

भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात् भारत से अपेक्षाकृत अधिक दूर होता है।


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