Top

Mahashivratri 2019: शिव-पार्वती विवाह कथा, श्मशान में रहने वाले शिव की शादी पार्वती से कैसे हुई

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Feb 20 2019 5:27PM IST
Mahashivratri 2019: शिव-पार्वती विवाह कथा, श्मशान में रहने वाले शिव की शादी पार्वती से कैसे हुई
महाशिवरात्रि 2019 (Mahashivratri 2019) आने को है। बहुत से लोगों को नहीं पता कि महाशिवरात्रि 2019 कब है (Mahashivratri 2019 Kab Hai)। तो हम आपको बता दें कि महाशिवरात्रि 2019 मार्च की 4 तारीख को है। महाशिवरात्रि के मौके पर लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। इस दिन बेलपत्र, शहद, दूध चढ़ा कर लोग अपनी मनोकामना करते हैं। भगवान शिव के बारे में बहुत सी कहानियां हैं। आज हम आपको बता रहे हैं शिव और पार्वती के विवाह (Shiv Parvati Vivaah) की कहानी।
 
पर्वत-राजकन्या पार्वती शिव से प्रेम करती थीं। देवताओं की कामना थी कि शिव पार्वती से विवाह करें। इस लिए देवताओं ने कन्दर्प को पार्वती की सहायता करने के लिए कहा। लेकिन शिव ने कन्दर्प को अपनी तीसरी आंख की ज्वाला से भस्म कर दिया। इसके बाद भी पार्वती शिव की गुफा पर हर रोज भोजन और फूलों से भरी एक टोकरी लेकर पहुंचती थीं।
 
वह गुफा की साफसफाई करतीं और शिव की सेवा करतीं। लेकिन शिव हमेशा पार्वती के प्रति उदासीन बने रहते थे। हठी शिव से विवाह का संकल्प लेकर पार्वती ने अपना घर छोड़ दिया और वन में तपस्विनी की तरह रहने का फैसला किया। वह अपने अंदर सिमट गईं। उन्होंने इतनी कठोर तपस्या की कि पर्वतों की बुनियाद हिलने का खतरा पैदा हो गया।
 
ऐसे संकल्प के बाद शिव को अपनी आंख खोलनी पड़ी। उन्होंने पार्वती को अपने संकल्प से हटाने की कोशिश की और पार्वती को बताया कि तपस्वी के साथ जीवन किसी भी तरह उसके पिता के साथ राजसी जीवन जैसा नहीं होगा। शिव ने पार्वती से कहा कि वह किसी राजकुमार या देवता से विवाह कर लें।
 
 
कोई ऐसा युवा जो पौरुष सम्पन्न हो। लेकिन पार्वती शिव की बात को किसी भी तरह से मानने को तैयार नहीं थीं। वह हठ ठाने बैठी रहीं। शिव यह बात मान गए कि उन्हें उनके बराबर का हठी जोड़ीदार मिल गया है। वे पार्वती से विवाह करने को तैयार हो जाते हैं। शिव जैसे तपस्वी को गृहस्थ बनाने पर उतारू राज-कन्या ने हठ किया कि वे उसके साथ विवाह करें। 
 
पवित्र ग्रंथों के मुताबिक वर को अपने परिवार के साथ वधू के घर जाकर विवाह के लिए उसका हाथ मांगना पड़ता है। शिव तपस्वी थे। उनका कोई परिवार नहीं था। जिसके कारण उन्होंने अपने सारे गणों और संगियों को विवाह में चलने के लिए न्यौता दे दिया।
 
जब देवताओं ने यह बारात देखी तो वो लोग आतंकित हो। बारात में भूत-प्रेत, पिशाच, डाकिनियां, शाकिनियां, बौने, बैताल, चुड़ैलें, चमगादड़ थे। खुद भगवान शिव भी एक बैल पर बैठे हुए थे। उन्होंने भांग पी रखी थी। उनके संगियों ने जो दुनिया के रीति रिवाजों से परिचित नहीं थे, उन्होंने शिव को भस्म, मुन्ड माला, हड्डियों, सर्पों और पशु चर्म से सजा रखा था।
 
 
जब भगवान शिव पर्वतराज के महल के सामने पहुंचे तो स्वागत के लिए खड़ी महिलाएं वहां से डर कर भाग गईं। पार्वती की मां ने शिव को अपने दामाद के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया। जो भिखारी की तरह दिखता है और श्मशानों में रहता है।
 
पार्वती ने शिव से विनती की कि आपने मुझे विवाह का वचन दिया था। कृपया वह रूप धारण कर लें जो मेरे मात पिता को प्रसन्न हो। कम से कम हमारा विवाह होने तक तो जरूर ही वह रूप धर लें। तब शिव ने देवताओं को यह अनुमति दी कि वह उन्हें वैसे ही सजा दें जैसा वे उचित समझें।
 
देवदाओं ने तब शिव को दैवीय जल से नहलाया। रेशम, फूलों, स्वर्ण और रत्नों से सजाया गया। सजने के बाद शिव कंदर्प से भी सुंदर लगने लगे। उनका गोरापन ऐसा था कि चांद भी फीका पड़ जाए। उनके हाथ और पांव किसी नर्तक की तरह लचीले थे।
 
वहां इकट्ठा सभी स्त्रियां उन पर मोहित हो गईं। उन्होंने शिव को सौंदर्य का देवता सुन्दरेश्वर घोषित कर दिया। पार्वती की मां ने इसके बाद शिव से विवाह की अनुमति दे दी। देवताओं की उपस्थिति में, स्वयं ब्रह्मा की प्रधानता में शिव और पार्वती ने एक दूसरे को पति पत्नी बनने के लिए मालाएं पहनाईं। शिव का यह दूसरा विवाह था।

ADS

ADS

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )

ADS

मुख्य खबरें
Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo