Breaking News
Top

जानिए कैसे ''डाकू'' से महर्षि बने वाल्मीकि, ये है पूरी कहानी

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 3 2017 2:00PM IST
जानिए कैसे ''डाकू'' से महर्षि बने वाल्मीकि, ये है पूरी कहानी

महर्षि वाल्मीकि का नाम रत्नाकर था। इनका पालन-पोषण जंगल में भील जाति में हुआ था। जिस कारण इन्होंने भीलों की परंपरा को अपनाया और आजीविका के लिए डाकू बन गए। अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए ये राहगीरों को लूटते थे और जरूरत पड़ने पर मार भी देते थे। इस तरह वे अपने पापों का घड़ा भर रहे थे। 

इसे भी पढ़ें: शरद पूर्णिमा 2017: अमृत वाली खीर खानी हो तो करें ये काम

एक दिन उनके जंगल के रास्ते नारद मुनि जा रहे थे तभी रत्नाकर ने उन्हें बंदी बना लिया। नारद मुनि ने रत्नाकर से पूछा कि तुम ऐसे पाप क्यों कर रहे हो। तब रत्नाकर ने जवाब दिया कि अपने और परिवार के भरण-पोषण के लिए। इसके बाद नारद ने पूछा कि जिसके लिए तुम पाप कर रहे हो क्या वह तुम्हारे पाप का भागी बनेगा। फिर रत्नाकर ने कहा कि बिल्कुल हमारे परिवार के लोग हमेशा मेरे साथ खड़े रहेंगे।

इसे भी पढ़ें: नरक चतुर्दशी 2017: इसलिए की जाती है यमराज की पूजा

नारद मुनि ने रत्नाकर से कहा कि जाओ और अपने परिवार से पूछकर आओ यदि वे हां कहेंगे तो मैं अपना सारा धन दे दूंगा। रत्नाकर अपने परिवार के सभी सदस्यों से पूछा लेकिन किसी ने भी हां नहीं कहा। इस बात का रत्नाकर पर गहरा प्रभाव पड़ा और उसने डकैती के पेशा को छोड़कर तप का मार्ग चुना और कई सालों तक कठोर तपस्या की। जिसके बाद इनको महर्षि वाल्मीकि के नाम से जाना जाने लगा। महर्षि वाल्मीकि ने ही संस्कृत भाषा में महाकाव्य रामायण की रचना की और इस प्रकार डाकू रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि कहलाए।

ADS

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )
mansoon
mansoon

ADS

ADS

मुख्य खबरें

ADS

ADS

ADS

ADS

Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo