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महाशिवरात्रि 2019: शिव के त्रिशूल, टीका, आंख और बेलपत्र में छिपा है नंबर 3, यहां जानिए उसका रहस्य

महाशिवरात्रि 2019 (Maha Shivratri 2019) आने को है। महाशिवरात्रि कब है (Maha Shivratri Kab Hai) कई लोगों को नहीं पता तो हम आपको बता दें कि महाशिवरात्रि 2019 मार्च की 4 तारीख को है। इस दिन भक्त भगवान शिव (Shiv) की आराधना करते हैं। भक्त भगवान शिव को खुश रखने के लिए उनकी आराधना करते हैं। भगवान शिव के साथ हमेशा से 3 अंक का रहस्य जुड़ा रहता है। शिव के भक्त भी उनके इस तीन नंबर के रहस्य के बारे में परिचित नहीं हैं। शिव से जुड़ी हर चीज में आप 3 जरूर पाएंगे। जैसे उनके त्रिशूल में तीन ब्लेड होते हैं। शिव की तीन आंखें हैं। शिव के माथे पर लगा त्रिकुंड भी तीन रेखाओं वाला होता है। वहीं शिव को भक्त जो बेलपत्र चढ़ाते हैं वह भी तीन पत्तियों वाला होता है। आखिर इस तीन का शिव से क्या जुड़ाव है। आइए जानते हैं।

महाशिवरात्रि 2019: शिव के त्रिशूल, टीका, आंख और बेलपत्र में छिपा है नंबर 3, यहां जानिए उसका रहस्य
महाशिवरात्रि 2019 (Maha Shivratri 2019) आने को है। महाशिवरात्रि कब है (Maha Shivratri Kab Hai) कई लोगों को नहीं पता तो हम आपको बता दें कि महाशिवरात्रि 2019 मार्च की 4 तारीख को है। इस दिन भक्त भगवान शिव (Shiv) की आराधना करते हैं। भक्त भगवान शिव को खुश रखने के लिए उनकी आराधना करते हैं। भगवान शिव के साथ हमेशा से 3 अंक का रहस्य जुड़ा रहता है। शिव के भक्त भी उनके इस तीन नंबर के रहस्य के बारे में परिचित नहीं हैं। शिव से जुड़ी हर चीज में आप 3 जरूर पाएंगे। जैसे उनके त्रिशूल में तीन ब्लेड होते हैं। शिव की तीन आंखें हैं। शिव के माथे पर लगा त्रिकुंड भी तीन रेखाओं वाला होता है। वहीं शिव को भक्त जो बेलपत्र चढ़ाते हैं वह भी तीन पत्तियों वाला होता है। आखिर इस तीन का शिव से क्या जुड़ाव है। आइए जानते हैं।

त्रिपुर दाह

शिव के साथ जुड़े अंक 3 के बारे में समझने के लिए आपको शिवपुराण के त्रिपुर दाह की कहानी जाननी चाहिए। जिसके अनुसार तीन असुरों ने अजेय बनने की कोशिश में तीन उड़ने वाले नगर बनाए। जिनको त्रिपुर कहा गया। इन नगरों को अद्भुत कौशल के साथ निर्मित किया गया।
तीनों अलग-अलग दिशाओं में उड़ते थे। जिन्हें भेद पाना पूरी तरह से असंभव है। उन्हें नष्ट करने का बस एक ही रास्ता था कि तीनों को एक ही बाण से तब भेदा जाए जब वो एक सीध में हों। अपने आविष्कार पर खुश हो कर असुर पगला गए और आतंक फैलाने लगे। तब देवता शिव की शरण में गए।
शिव ने धरती को रथ बनाया। सूर्य और चंद्रमा को उस रथ का पहिया। मन्दार पर्वत को धनुष और काल के सर्प आदिशेष की प्रत्यंचा चढ़ाई। स्वयं विष्णु बाण बने। वे युगों तक इन नगरों का पीछा करते रहे जब तक वह क्षण नहीं आ गया कि तीनों पुर एक सीध में आ गए।
जैसे ही यह हुआ शिव ने पलक झपकते ही बाण मारा। तीनों नगर तुरंत ही जल कर राख हो गए। फिर शिव ने उन पुरों के भष्म को अपने शरीर पर मल लिया। जब शिव ने इन पुरों को नष्ट किया तब विषयगत संसारों का प्रतिनिधित्व कर रहे सूक्ष्म जगत, सामाजिक संसार और व्यापक संसार भी नष्ट हो गए।
वे तीन वस्तुगत संसारों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। आकाश जिसमें देवता रहते हैं। पृथ्वी जिसमें मनुष्य रहते हैं। और पाताल जिसमें असुर निवास करते हैं। जब शिव की तपस्या नगर को नष्ट करती है तो राख बचता है। जैसे शरीर को जलाने के बाद राख बचता है। राख को और नहीं नष्ट किया जा सकता। जिससे राख आत्मा का प्रतीक बनती हैं।

त्रिशूल

शिव के साथ हमेशा त्रिशूल देखने को मिलता है। शिव जी का त्रिशूल उनकी एक पहचान है। शिव जी का त्रिशूल त्रिलोक दर्शाता है। जिसमें आकाश, धरती और पाताल आते हैं। कई लोगों का मानना है कि यह तीन गुण हैं। जिनके बारे में भगवत् गीता में बताया गया है। तमस गुण, रजस गुण और सत्व गुण।

शिव के तीन नेत्र

शिव की आंखें तपस्या दिखाती हैं। तपस्या का उद्देश्य सत, चित्त, आनन्द है। मतलब पूर्ण सत्य, शुद्ध चेतना और पूर्ण आनंद।

शिव के मस्तक पर तीन आड़ी रेखाएं

शिव का त्रिकुंड सांसारिक लक्ष्य को दर्शाता है। जिसमें आत्म रक्षण, आत्म प्रसार और आत्म बोध आते हैं।

तीन पत्तों वाला बेल पत्र

शिव को भक्त के द्वारा चढ़ाया जाने वाला बेल पत्र पदार्थ के गुण को दर्शाता है। निष्क्रियता, उद्वग्निता और सामंजस्य आते हैं। सरल शब्दों में इसका अर्थ तम रज और सत् गुणों से है। बेल पत्र तीन शरीर को भी दर्शाता है। पहला भौतिक दूसरा मानसिक और तीसरा कारण को दर्शाता है।
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं...
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