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माघ पूर्णिमा 2019 : एक करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई डुबकी, घर लौटे 10 लाख कल्पवासी- महाशिवरात्रि पर होगा मेले पर अंतिम स्नान

विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम कुम्भ मेले के पांचवें प्रमुख स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर मंगलवार दोपहर तक अनुमानित 80 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में स्नान किया।

माघ पूर्णिमा 2019 : एक करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई डुबकी, घर लौटे 10 लाख कल्पवासी- महाशिवरात्रि पर होगा मेले पर अंतिम स्नान

विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम कुम्भ मेले के पांचवें प्रमुख स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर मंगलवार दोपहर तक अनुमानित 80 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में स्नान किया। इसके साथ ही 10 लाख श्रद्धालु कुंभ में कल्पवास कर रहे हैं। जिनका एक माह का तप पूरा हो गया।

मंगलवार के स्नान के बाद उनका कुंभ से प्रस्थान भी शुरू हो गया। कुम्भ मेलाधिकारी विजय किरण आनंद ने बताया कि मंगलवार को रात्रि 12 बजे से ही स्नान जारी है। शाम तक गंगा स्नान करने वालों की संख्या एक करोड़ से अधिक पहुंच सकती है। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा की तरह माघी पूर्णिमा पर गंगा में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं।

इसके अलावा इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में नदी स्नान करने से शारीरिक समस्याएं दूर हो जाती हैं। इस दिन तिल और कंबल का दान करने से नरक लोक से मुक्ति मिलती है। मेले का अंतिम स्नान महाशिवरात्रि आगामी 4 मार्च को पड़ेगा और इसके साथ कुम्भ मेला संपन्न हो जाएगा।

आज घर लौटे 10 लाख कल्पवासी

एक बुजुर्ग साधु ने बताया कि आमतौर पर कल्पवासियों से तात्पर्य प्रयाग कुंभ मेले में आने वाले आस्थावान श्रद्धालुओं से होता है। वे एक महीने तक गंगा के तट पर रह कर, बेहद कठोर नियमों के साथ जीवन जीने का संकल्प लेते हैं। आज के दिन पवित्र स्नान करने के बाद वे अपने अपने घर वापस लौट गए। पौष पूर्णिमा से कल्पवास आरंभ होता है और माघी पूर्णिमा के साथ संपन्न होता है।

ऐसी रही सुरक्षा

कुम्भ मेला के लिए डीआईजी के पी सिंह ने कहा कि स्नानार्थियों के लिए मेला क्षेत्र में सुरक्षा की प्रर्याप्त व्यवस्था की गई है। पुलिस के अलावा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान लगातार चप्पे-चप्पे पर नजर रखे हुए हैं। मेला क्षेत्र में 96 कन्ट्रोल वाच टॉवर स्थापित हैं। इसके साथ मेला क्षेत्र में 440 सीसीटीवी की मदद से निरन्तर निगरानी की जा रही है। मेला प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी श्रद्धालुओं को स्नान के बाद सुरक्षित उनके गंतव्य प्रस्थान की सुविधा देना है।

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