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लोकसभा चुनाव 2019 ज्योतिषीय भविष्यवाणियां : शनि-राहु-केतु की युति, जानें कौन बनेगा अगला प्रधानमंत्री

नरेंद्र सांवरिया | UPDATED Mar 12 2019 12:40PM IST
लोकसभा चुनाव 2019 ज्योतिषीय भविष्यवाणियां : शनि-राहु-केतु की युति, जानें कौन बनेगा अगला प्रधानमंत्री

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) की तारीखों के ऐलान होने के साथ ही ज्योतिषीय भविष्यवाणियां (lok sabha elections 2019 astrological predictions) भी होने लगी है। भारत में होने वाले आम चुनाव 2019 (general election 2019) पर देश ही नहीं दुनियाभर की नजरें टिकी हुई है। लोकसभा चुनाव 2019 की डेट (lok sabha elections 2019 date) घोषित होने के साथ ये आम चुनाव 2019 (Aam Chunav 2019) अभी से लोगों के दिलो-दिमाग पर छा गए हैं। साथ ही देशभर में यह बहस चल रही है कि भारत का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा ()। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार लोकसभा चुनाव 2019 पर आकाशीय ग्रहों की स्थिति अप्रत्याशित परिणामों की ओर इशारा कर रही है, क्योंकि जब भारत निर्वाचन आयोग ने यह बताया कि लोकसभा चुनाव 2019 कब है, तब राहुकाल चल रहा था, अर्थात लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा रविवार शाम 5 बजकर 29 मिनट पर हुई उस वक्त दक्षिण भारत में राहुकाल चल रहा था। जबकि चौघडिया की बात करें तो 'उद्वेग' यानि अशुभ समय चल रहा था। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अशुभ समय में किया गया कोई भी कार्य आसानी से पूर्ण नहीं होता इसलिए ये लोकसभा चुनाव तीखे प्रहारों के बीना संपन्न नहीं हो सकता।

कौन बनेगा अगला प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात करें तो जब लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों का ऐलान होगा तब शुक्र का वृषभ राशि में गोचर में होगा उस दौरान पीएम मोदी की राशि वृश्चिक पर इसका अनुकूल और प्रतिकूल दोनों प्रभाव पड़ेंगे क्योंकि मोदी की राशि से सप्तम भाव में शुक्र आ रहे हैं। सप्तम भाव आपके रिश्तों को दर्शाता है इसलिए इस दौरान कई संबंध टूटते हैं और कई संबंध नए बनते हैं। राजनीति के कोण से देखें तो आपको इस गोचर के दौरान मिला-जुला सहयोग मिलेगा। वहीं अगर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बात करें तो राहुल गांधी की राशि तुला है और शुक्र आपकी राशि के स्वामी भी हैं। शुक्र का गोचर तुला राशि के अष्टम भाव में होगा। अष्टम भाव व्यक्ति की आयु व मृत्यु को दर्शाता है। अष्टम भाव त्रिक (6, 8, 12) भावों में सर्वाधिक अशुभ स्थान माना गया है। इस गोचर के दौरान आपकी जान को हमेशा खतरा बना रहेगा। राजनीति के कोण से देखें तो आपको कोई लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है।

शनि-राहु-केतु की युति

चुनाव के ऐलान से पहले ही शनि-राहु-केतु की युति बन चुकी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि-राहु-केतु अगर अपना घर बदल लें तो किसी को राज योग दे देते हैं और किसी को कंगाल बना देते हैं। 7 मार्च 2019 को शनि-राहु-केतु ने अपनी चाल बदल ली थी जिसका असर भारत में होनें वाले आम चुनावों पर भी नजर आने वाला है। शनि न्याय के देवता हैं, जबकि राहु-केतु पाप ग्रह कहे जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी शनि और केतु की युति बनती है तो जातक अत्यधिक अपरिपक्व हो जाता है। क्योंकि इस दौरान शनि अपना मूल तत्व छोड़कर अप्रत्याशित काम करता है, जिसका असर पीएम नरेंद्र मोदी और उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंदी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर आने वाले दिनों में दिखेगा। 

शनि-केतु की युति से बनी 13 दिन की अटल सरकार

1996 में भी अप्रेल-मई में चुनाव हुए थे और इस दौरान भी शनि-केतु की यह युति मीन राशि में थी और शनि-केतु की इस युति का असर ऐसा था कि उस वक्त भी किसी भी पार्टी को पूरा बहुमत नहीं मिला। इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की महज 13 दिन की सरकार बनी। वहीं 1984 की बात करें तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद दिसंबर में चुनाव हुए और तब शनि-केतु का गोचर वृश्चिक राशि में था, जिसका असर ऐसा था कि राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को जबरदस्त जीत मिली। जबकि 1962 में चुनाव के दौरान भी शनि-केतु की युति मकर राशि में थी, जिसका असर ऐसा था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू को अपने तीसरे और आखिरी चुनाव में एक तरफा जीत मिली। इन तीन चुनावों के परिणाम बताते हैं कि शनि-केतु की युति किसी को भी राजा और रंक बना देती है। 


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