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कुंभ मेला 2019 : शाही स्नान की तिथियां, कल्पवास शुरू

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jan 22 2019 4:04PM IST
कुंभ मेला 2019 : शाही स्नान की तिथियां, कल्पवास शुरू
मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के प्रथम स्नान के बाद सोमवार को पौष पूर्णिमा का स्नान किया गया। सोमवार को संगम (Sangam) में 1 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई है। इसके पहले मकर संक्राति (Makar Sankranti) पर पहले शाही स्नान में दो करोड़ से ज्यादा लोगों ने स्नान किया था।
 
35 देशों के नागरिकों ने संगम में स्नान किया। सोमवार को गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर देश-दुनिया के हर कोने से आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रयागराज (Prayagraj) की सड़कें सभी दिशाओं में श्रद्धा पथ में तब्दील हो गईं।
 
 
देश-दुनिया भर से संतों, श्रद्धालुओं, पर्यटकों का सागर उमड़ा तो 5.50 किमी लंबे संगम तट पर कहीं तिल रखने भर की जगह नहीं बची। कड़ाके की सर्दी के बीच श्रद्धालुओं ने किया जय श्री राम के गगनभेदी जयघोष करते हुए आस्था की डुबकी लगाई।

शाही स्नान की तिथियां

4 फरवरी, मौनी अमावस्या (दूसरा शाही स्नान)
10 फरवरी, बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)
19 फरवरी, माघ पूर्णिमा (चौथा शाही स्नान)
4 मार्च, महाशिवरात्रि (पांचवा शाही स्नान)

रात 12 बजे से ही शुरू हो गए थे स्नान

कुंभ मेला प्रशासन के अनुसार एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में डुबकी लगाई। इससे पहले शाही स्नान के दिन 1 करोड़ 26 लाख से अधिक लोगों ने संगम में डुबकी लगाई थी। संगम तट पर मकर स्नान के लिए गंगा-यमुना के घाटों पर श्रद्धालुओं का खचाखच जमावड़ा सोमवार रात 12 बजे से ही शुरू हो गया था।
 
 
भीड़ प्रबंधन के चलते तीन किमी पहले ही वाहनों को रोक दिए जाने की वजह से सड़कें हर तरफ पैदल पथ में तब्दील हो गईं। सिर पर गठरी, कंधे पर झोला हाथों में बच्चों और महिलाओ अपनों का हाथ थामे लोग संगम तट की ओर लंबे डग भरते रहे।

पौष पूर्णिमा स्नान के साथ कल्पवास शुरू

दिव्य कुम्भ में आज से गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगमतट पर कल्पवास शुरू हो रहा है। जीवन-मृत्यु के बंधनों से मुक्ति की कामना लेकर संगम की रेती में आने वाले कल्पवासी यहां से अलौकिक शक्ति बटोर कर ले जाएंगे। आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. टीएन पांडेय के अनुसार कल्प का अर्थ कायाकल्प से है।
 
 
कल्पवास शरीर का आध्यात्मिक चेतना से जोड़ता है। इसमें एक माह गंगाजल का सेवन, एक समय भोजन, भजन, सत्संग, कीर्तन, सूर्यदेव को नियमित अर्घ्य से मन, वचन और कर्म की शुद्धि होती है। गंगातट पर रहने से शरीर के अंदर में व्याप्त काम, क्रोध, लोभ और मद खत्म हो जाता है।

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