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Kartik Purnima 2018: कार्तिक पूर्णिमा में गंगा स्नान का महत्व

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 20 2018 5:07PM IST
Kartik Purnima 2018: कार्तिक पूर्णिमा में गंगा स्नान का महत्व

Kartik Purnima 2018: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहते हैं। कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान के कारण भी हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण पर्व है।

इस दिन को महोत्सव की तरह मनाया जाता है। इस अवसर पर पवित्र नदी का स्नान, दीपदान, भगवान की पूजा, आरती, हवन तथा दान का बहुत महत्व है। कार्तिक मास को बहुत पुण्य प्रदान करने वाला मास कहा गया है।

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इस बार कार्तिक पूर्णिमा 23 नवम्बर 2018 दिन शुक्रवार को है। दिनांक 22 को ही 12 बजकर 55 मिनट पर पूर्णिमा आरंभ होकर 23 को 11 बजकर 11 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस दिन गंगा स्नान का बहुत महत्व है। जिसके बारे में हम आपको आज बताएंगे...

कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा जी में स्नान करने से सात्त्विकता और पुण्यलाभ प्राप्त होता है। भारत की अनेक धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी का रूप बताया है। अनेक पवित्र तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये हैं जहां साल भर श्रद्धालु पूजा और दर्शन करने पहुंचते हैं।

गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र नदी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता अनुसार गंगा में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है। प्राण निकलने के बाद भी लोग गंगा में ही अंतिम संस्कार की इच्छा रखते हैं। साथ ही मृत्यु पश्चात गंगा में अपनी आस्थियां विसर्जित करवाकर मोक्ष प्राप्ति चाहते हैं। इसलिए लोग गंगा घाटों पर पूजा अर्चना करते हैं और ध्यान लगाते हैं।

गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त संस्कारों में उसका होना आवश्यक माना गया है। गंगाजल को अमृत समान माना गया है। अनेक पर्वों और उत्सवों का गंगा से सीधा संबंध है मकर संक्राति, कुंभ और गंगा दशहरा के समय गंगा में स्नान, दान एवं दर्शन करना महत्त्वपूर्ण समझा माना गया है। 

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गंगा पर अनेक प्रसिद्ध मेलों का आयोजन किया जाता है। गंगा तीर्थ स्थल सम्पूर्ण भारत में सांस्कृतिक एकता स्थापित करता है गंगा जी के अनेक भक्ति ग्रंथ लिखे गए हैं जिनमें श्रीगंगासहस्रनामस्तोत्रम एवं गंगा आरती बहुत लोकप्रिय हैं।

गंगा पूजन एवं स्नान से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का क्षय होता है। मान्यता है कि गंगा पूजन से मांगलिक दोष से ग्रसित जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है।

विधि-विधान से गंगा पूजन करना अमोघ फलदायक होता है। गंगा स्नान करने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त होता है। अमावस्या दिन गंगा स्नान और पितरों के निमित तर्पण व पिंडदान करने से सदगती प्राप्त होती है और यही शास्त्रीय विधान भी है।

पुराणों में एक अन्य कथा अनुसार गंगा जी भगवान विष्णु के अंगूठे से निकली हैं, जिसका पृथ्वी पर अवतरण भगीरथ के प्रयास से हुआ है। इसलिए कार्तिक में गंगा स्नान बहुत आवश्यक है। कार्तिक पूर्णिमा को प्रातः काल उठकर व्रत रहने का संकल्प लेना चाहिए। उसके बाद सर्वप्रथम गंगा स्नान कीजिए।

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