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कार्तिक मास 2018: कार्तिक में दीप दान का महत्व, नरक भोगने से बच जाएंगे आप

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 21 2018 12:10AM IST
कार्तिक मास 2018: कार्तिक में दीप दान का महत्व, नरक भोगने से बच जाएंगे आप

कार्तिक मास में दीप दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस साल कार्तिक मास 23 अक्टूबर 2018 यानी शरद पूर्णिमा के दिन से आरम्भ हो रहा है। हिन्दू पंचाग 2018 के अनुसार इस साल कार्तिक मास 24 नवम्बर 2018 तक चलेगा। माना जाएं तो कार्तिक मास में देवताओं की पूजा और धर्म-कर्म के काम ज्यादा आवश्यक बताएं गए हैं।  

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शास्त्रों में कार्तिक मास का विशेष महत्व बताया गया है। कार्तिक मास की महिमा देवों ने भी गाई है। हिंदी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास वर्ष का आठवां महीना होता है कार्तिक मास को हिन्दू धर्म ग्रंथों धार्मिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण बताया गया है। कार्तिक मास का पुण्यकाल अश्विन शुक्ल पूर्णिमा अर्थात शरद पूर्णिमा से ही आरंभ हो जाता है।
 
कार्तिक मास में व्रत, त्यौहार पूजा पाठ आदि के साथ दीप दान का भी विशेष महत्व है। चार महीने बाद जब भगवान विष्णु जागते है तो मांगलिक कार्यकर्मो की शुरुआत होती है। कार्तिक मास की समाप्ति पर कार्तिक पूर्णिमा होती है।

कार्तिक में दीप-दान का महत्व

  • ऐसा कहा गया है कि जो व्यक्ति कार्तिक मास में श्रीकेशव के निकट अखण्ड दीपदान करता है, वह दिव्य कान्ति से युक्त हो जाता है।
  • कार्तिक माह में पहले पंद्रह दिन की रातें वर्ष की अंधेरी रातों में से होती हैं। लक्ष्मी पति विष्णु के जागने के ठीक पूर्व के इन दिनों में दीप जलाने से जीवन का अंधकार छंटता है।
  • जो व्यक्ति कार्तिक मास में श्रीकेशव के निकट अखण्ड दीपदान करता है, वह दिव्य कान्ति से युक्त होकर विष्णुलोक में विहार करता है।
  • जो लोग कार्तिक मास में श्रीहरि के मन्दिर में दूसरों के द्वारा रक्खे गये दीपों को प्रज्वलित करते हैं, उन्हें नर्क नहीं भोगना पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि एक चूहे ने कार्तिक एकादशी में दूसरों के द्वारा रक्खे दीप को प्रज्वलित करके दुर्लभ मनुष्य जन्म लाभ लिया था।
  • समुद्र सहित पृथ्वी दान और बछड़ों सहित दुग्धवती करोड़ों गायों के दान का फल विष्णु मंदिर के ऊपर शिखर दीपदान करने के सोलहवें अंश के एक अंश के बराबर भी नहीं है। शिखर या हरि मन्दिर में दीपदान करने से शत-कुल का उद्धार होता है। 
  • जो व्यक्ति भक्ति सहित कार्तिक मास में केवल मात्र ज्योति -दीप्ति विष्णु मन्दिर के दर्शन करते हैं, उनके कुल में कोई नारकी नहीं होता। 
  • देवगण भी विष्णु के गृह में दीपदान करने वाले मनुष्य के संग की कामना करते हैं। 
  • कार्तिक-मास में, खेल खेल में ही सही विष्णु के मन्दिर को दीपों से आलोकित करने पर उसे धन, यश, कीर्ति लाभ होती है और सात कुल पवित्र हो जाते हैं। 
  • मिट्टी के दीपक में घी / तिल तेल डालकर कार्तिक पूर्णिमा तक दीप प्रज्वलित करें, इससे अवश्य लाभ होगा।

कार्तिक मास में दीपदान कैसे करें 

कार्तिक मास में दीप दान करने के भी नियम हैं। दीप दान किसी नदी में, किसी मंदिर, पीपल, चौराहा, किसी दुर्गम स्थान आदि में करना चाहिए। भगवान विष्णु को ध्यान में रखकर किसी स्थान पर दीप जलाना ही दीपदान कहलाता है। दीप दान का आशय अंधकार मिटाकर उजाले के आगमन से है। मंदिरों में दीप दान अधिक किए जाते हैं।

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