Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

Jyeshtha Purnima 2019 : ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि

Jyeshtha Purnima 2019 : ज्येष्ठ पूर्णिमा 2019 में कब है (Jyeshtha Purnima 2019 Mai Kab Hai) , क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा की पूजा विधि (Kya Hai Jyeshtha Purnima Puja Vidhi) अगर आपको इन सब के बारे में नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व (Jyeshtha Purnima Festival) उत्तर भारत में मनाया जाता है । जबकि इसी व्रत को गुजरात , महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में वट पूर्णिमा (Vat Purnima) के रूप में मनाया जाता है। वट सावित्री (Vat Savitri) की तरह ही ज्येष्ठ पूर्णिमा के व्रत (Jyeshtha Purnima Vrat) में मां सावित्री (Maa Savitri) से पति की लंबी उम्र की प्रार्थना की जाती है। लेकिन अगर आप ज्येष्ठ पूर्णिमा की पूजा विधि (Jyeshtha Purnima Puja Vidhi) के बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो चलिए जानते है वट पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि के बारे में...

Jyeshtha Purnima 2019 : ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि

Jyeshtha Purnima 2019 : ज्येष्ठ पूर्णिमा 2019 में कब है (Jyeshtha Purnima 2019 Mai Kab Hai) , क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा की पूजा विधि (Kya Hai Jyeshtha Purnima Puja Vidhi) अगर आपको इन सब के बारे में नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व (Jyeshtha Purnima Festival) उत्तर भारत में मनाया जाता है । जबकि इसी व्रत को गुजरात , महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में वट पूर्णिमा (Vat Purnima) के रूप में मनाया जाता है। वट सावित्री (Vat Savitri) की तरह ही ज्येष्ठ पूर्णिमा के व्रत (Jyeshtha Purnima Vrat) में मां सावित्री (Maa Savitri) से पति की लंबी उम्र की प्रार्थना की जाती है। लेकिन अगर आप ज्येष्ठ पूर्णिमा की पूजा विधि (Jyeshtha Purnima Puja Vidhi) के बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो चलिए जानते है वट पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि के बारे में...


ज्येष्ठ पू्र्णिमा पूजा विधि (Jyeshtha Purnima Puja Vidhi)

1.ज्येष्ठ पू्र्णिमा पूजा विवाहित महिलांए के लिए होती है। इसके लिए ज्येष्ठ पू्र्णिमा व्रत वाले दिन विवाहित महिलाओं को सुबह स्नान करने के बाद एक नई दुल्हन की तरह सजना चाहिए।

2.ज्येष्ठ पू्र्णिमा वाले दिन महिलाओं को एक थाली में गुड़, भीगे हुए चने, आटे से बनी हुई मिठाई, कुमकुम, रोली, मोली, 5 प्रकार के फल, पान का पत्ता, धुप, घी का दीया, एक लोटे में जल और एक हाथ का पंखा लेकर बरगद के वृक्ष के समीप जाना चाहिए।

3. इस दिन मुख्य रूप से बरगद के वृक्ष की पूजा होती है। इसके बाद पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं, फिर प्रसाद चढाकर धूप, दीपक जलाएं।

4.उसके बाद सच्चे मन से पूजा करके अपने पति के लिए लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।

5.पंखे से वट वृक्ष को हवा करें और सावित्री मां से आशीर्वाद लें ताकि आपका पति दीर्घायु हो।


6.इसके पश्चात् बरगद के पेड़ के चारो ओर कच्चे धागे से या मोली को 7 बार बांधे और प्रार्थना करें।

7.वट सावित्री की कथा वहीं बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ें ।

8. घर आकर जल से अपने पति और बड़ो का आशीर्वाद लें।

9. इसके बाद जो भी आप से बड़ी सुहागन स्त्रियां हो उनके भी पैर छुकर उनसे आर्शीवाद लें।

10. सभी पूजा विधि संपूर्ण करने के बाद किसी निर्धन व्यक्ति या ब्राह्मण को दान अवश्य दें।

Share it
Top