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Jyeshtha Purnima 2019 : ज्येष्ठ पूर्णिमा शुभ मुहूर्त , महत्व ,कथा और उपाय

jyeshtha purnima 2019 : ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व (jyeshtha purnima Festivsal) आज यानी 17 जून 2019 (17 June 2019) सोमवार के दिन पूरे देश में मनाया जाएगा। अगर आप नहीं जानते क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा का शुभ मूहूर्त (Kya Hai Jyeshtha Purnima Ka Subh Mahurat ) , क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व (Kya Hai Jyeshtha Purnima Ka Mahatva) ,क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा की कथा , क्या है (Kya Hai Jyeshtha Purnima Ki Katha) ,ज्येष्ठ पूर्णिमा के उपाय (Kya Hai Jyeshtha Purnima Ka Upay)। अगर आप इसके बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। उतर भारत में इस पर्व को ज्येष्ठ पूर्णिमा (jyeshtha purnima) के रूप में मनाया जाता है। वहीं गुजरात , महाराष्ट्र, और दक्षिण भारत में इस वट पूर्णिमा (Vat Purinma) के नाम से जाना जाता है। इस दिन सुहागन महिलांए अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। अगर आप भी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखना चाहती हैं । और आपको नहीं पता है कि क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा, ज्येष्ठ पूर्णिमा का शुभ मूहूर्त , क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व ,क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा की कथा , क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा के उपाय तो चलिए जानते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा का शुभ मूहूर्त , ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व , ज्येष्ठ पूर्णिमा की कथा , ज्येष्ठ पूर्णिमा के उपाय के बारे में....

Jyeshtha Purnima 2019 : ज्येष्ठ पूर्णिमा शुभ मुहूर्त , महत्व ,कथा और उपाय

jyeshtha purnima 2019 : ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व (jyeshtha purnima Festivsal) आज यानी 17 जून 2019 (17 June 2019) सोमवार के दिन पूरे देश में मनाया जाएगा। अगर आप नहीं जानते क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा का शुभ मूहूर्त (Kya Hai Jyeshtha Purnima Ka Subh Mahurat ) , क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व (Kya Hai Jyeshtha Purnima Ka Mahatva) ,क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा की कथा , क्या है (Kya Hai Jyeshtha Purnima Ki Katha) ,ज्येष्ठ पूर्णिमा के उपाय (Kya Hai Jyeshtha Purnima Ka Upay)। अगर आप इसके बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। उतर भारत में इस पर्व को ज्येष्ठ पूर्णिमा (jyeshtha purnima) के रूप में मनाया जाता है। वहीं गुजरात , महाराष्ट्र, और दक्षिण भारत में इस वट पूर्णिमा (Vat Purinma) के नाम से जाना जाता है। इस दिन सुहागन महिलांए अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। अगर आप भी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखना चाहती हैं । और आपको नहीं पता है कि क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा, ज्येष्ठ पूर्णिमा का शुभ मूहूर्त , क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व ,क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा की कथा , क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा के उपाय तो चलिए जानते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा का शुभ मूहूर्त , ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व , ज्येष्ठ पूर्णिमा की कथा , ज्येष्ठ पूर्णिमा के उपाय के बारे में....


ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि (Jyeshtha Purnima Tithi)

17 जून 2019

ज्येष्ठ पूर्णिमा शुभ मुहूर्त (Jyeshtha Purnima Subh Mahurat)

पूर्णिमा प्रारंभ 16 जून 2019 दिन में 2 बजकर 3 मिनट से

पूर्णिमा समाप्त 17 जून 2019 दिन में 2 बजकर 2 मिनट तक

ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व (Jyeshtha Purnima Ka Mahatva)

पूर्णिमा तिथि यदि चतुर्दशी के दिन दोपहर से पहले व सूर्योदय के पश्चात प्रारंभ हो तो वट पूर्णिमा उपवास पहले दिन करना चाहिए अर्थात चतुर्दशी विद्धा पूर्णिमा को ही यह व्रत ग्रहण करने का विधान है। ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व स्नान-दान आदि के साथ-साथ भोले नाथ के दर्शनों के लिए भी होता है। दरअसल भगवान भोलेनाथ के दर्शन हेतु अमरनाथ की यात्रा के लिये गंगाजल लेकर आने की शुरुआत आज के दिन से ही आरंभ होती हैं।

ज्येष्ठ मास में पानी की महत्वता को समझाते हुए ही गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं पर्वों की महत्वता ही हमें ज्ञानीजन ने समझाए हैं। हमें भी पानी के महत्व की उपयोगिता को समझना चाहिए कि पानी हमारे लिए कितना आवश्यक है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत कथा (Jyeshtha Purnima ki Vrat Katha)

पौराणिक व्रत कथा के अनुसार कहा जाता है कि सावित्री के पति अल्पायु थे, एक दिन देव ऋषि नारद सावित्री के पास आए और कहने लगे की तुम्हारा पति अल्पायु है। आप कोई दूसरा वर मांग लें। पर सावित्री ने कहा- मैं एक हिंदू नारी हूं, पति को एक ही बार चुनती हूं। इसी समय सत्यवान के सिर में अत्यधिक पीड़ा होने लगी। सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे अपने गोद में पति के सिर को रख उसे लेटा दिया। उसी समय सावित्री ने देखा अनेक यमदूतों के साथ यमराज आ पहुंचे है। सत्यवान के जीव को दक्षिण दिशा की ओर लेकर जा रहे हैं। यह देख सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चल देती हैं। उन्हें आता देख यमराज ने कहा कि- हे पतिव्रता नारी! पृथ्वी तक ही पत्नी अपने पति का साथ देती है।

अब तुम वापस लौट जाओ। उनकी इस बात पर सावित्री ने कहा- जहां मेरे पति रहेंगे मुझे उनके साथ रहना है। यही मेरा पत्नी धर्म है। सावित्री के मुख से यह उत्तर सुन कर यमराज बड़े प्रसन्न हुए। उन्होंने सावित्री को वर मांगने को कहा और बोले- मैं तुम्हें तीन वर देता हूं। बोलो तुम कौन-कौन से तीन वर लोगी।

तब सावित्री ने सास-ससुर के लिए नेत्र ज्योति मांगी, ससुर का खोया हुआ राज्य वापस मांगा एवं अपने पति सत्यवान के सौ पुत्रों की मां बनने का वर मांगा। सावित्री के ये तीनों वरदान सुनने के बाद यमराज ने उसे आशीर्वाद दिया और कहा- तथास्तु! ऐसा ही होगा। सावित्री पुन: उसी वट वृक्ष के पास लौट आई। जहां सत्यवान मृत पड़ा था।

सत्यवान के मृत शरीर में फिर से संचार हुआ। इस प्रकार सावित्री ने अपने पतिव्रता व्रत के प्रभाव से न केवल अपने पति को पुन: जीवित करवाया बल्कि सास-ससुर को नेत्र ज्योति प्रदान करते हुए उनके ससुर को खोया राज्य फिर दिलवाया। वट सावित्री अमावस्या के दिन वट वृक्ष का पूजन-अर्चन और व्रत करने से सौभाग्यवती महिलाओं की ही मनोकामना पूर्ण होती है और उनका सौभाग्य अखंड रहता है।

सावित्री के पतिव्रता धर्म की कथा का सार यह है कि एकनिष्ठ पतिपरायणा स्त्रियां अपने पति को सभी दुख और कष्टों से दूर रखने में समर्थ होती है। जिस प्रकार पतिव्रता धर्म के बल से ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज के बंधन से छुड़ा लिया था। इतना ही नहीं खोया हुआ राज्य तथा अंधे सास-ससुर की नेत्र ज्योति भी वापस दिला दी।

उसी प्रकार महिलाओं को अपना गुरु केवल पति को ही मानना चाहिए। गुरु दीक्षा के चक्र में इधर-उधर नहीं भटकना चाहिए। वट अमावस्या का उत्तराखंड, उड़ीसा, बिहार, उत्तरप्रदेश आदि स्थानों पर विशेष महत्व है। अत: वहां की महिलाएं विशेष पूजा-आराधना करती हैं। साथ ही पूजन के बाद अपने पति को रोली और अक्षत लगाकर चरणस्पर्श कर मिष्ठान प्रसाद वितरित करती है।


ज्येष्ठ पूर्णिमा के उपाय (Jyeshtha Purnima Ka Upay)

1.जिन कन्याओं की शादी में रूकावट आ रही हैं । वह वट पूर्णिमा वट के वृक्ष में कच्चा दूध चढ़ा कर गीली मिट्टी से तिलक करें।

2.पितृ बाधा के लिए वट पूर्णिमा के दिन किसी नदी किनारे या धार्मिक स्थल पर बरगद का पेड़ लगांए।

3.बरगद के पेड़ पर रोज जल चढ़ाने से घर में खुशियों का वास होता है।

4.वट पूर्णिमा के दिन सुहागन स्त्रियों को कच्चे सुत को हल्दी से रंगकर तीन बार वट वृक्ष की परिक्रमा करनी चाहिए।

5.वट पूर्णिमा के दिन सुहागन स्त्रियां अगर कच्चा दूध वट के वृक्ष पर चढ़ाती हैं तो उनकी संतान संबंधी सभी समस्यांए समाप्त हो जाती है।

6.वट पूर्णिमा के दिन वट वृक्ष को हाथ के पंखे से हवा करें । इसके बाद उसी पंखे से घर आकर पति पर हवा करने से सारी नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।

7.वट पूर्णिमा के सावित्री और सत्यावान की कथा सुनना काफी शुभ रहता है।

8.वट पूर्णिमा के दिन शाम के समय मीठा जरूर खांए।9.बरगद के पत्ते को अपने बालों में लगाने से भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु तीनों का आर्शीवाद प्राप्त होता है।

10.वट पूर्णिमा के दिन सुहागन स्त्रियों को पति के साथ-साथ घर के बुजुर्गो का आर्शीवाद अवश्य लें।

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