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Janmashtami 2019 : जन्माष्टमी व्रत की उद्यापन विधि

जन्माष्टमी व्रत की उद्यापन विधि की सामग्री में पंचामृत, दक्षिणावृत्ति शंख, पीले वस्त्र, बांसुरी, मोर पंख, फल, फूल, माला गोपीचंदन, धनिए के पंजीरी का प्रसाद, चंदन और तुलसी होती है,आइए जानते हैं जन्माष्टमी व्रत की संपूर्ण उद्यापन विधि के बारे में...

Janmashtami 2019 : जन्माष्टमी व्रत की उद्यापन विधि

Janmashtami 2019 जन्माष्टमी का व्रत करके लोग भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करते हैं। लेकिन क्या आप जानते है कि कोई भी व्रत बिना उद्यापन के पूर्ण नहीं होता। अगर आप भी जन्माष्टमी का व्रत (Janmashtami Fast) करते हैं और आपको जन्माष्टमी के व्रत की उद्यापन विधि के बारे में नही पता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। जन्माष्टमी का यह पर्व (Janmashtami Festival) आज 24 अगस्त 2019 के दिन पूरे भारतवर्ष में मनाया जाएगा। इस दिन लोग भगवान श्री कृष्ण के लिए उपवास करते हैं और रात को 12 बजे ही अपना व्रत खोलते हैं तो आइए जानते हैं जन्माष्टमी व्रत की उद्यापन विधि


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जन्माष्टमी व्रत उद्यापन विधि (Janmashtami Vrat Udyapan Vidhi)

1. जन्माष्टमी के व्रत की उद्यापन विधि की सभी तैयारियां एक दिन पहले ही कर लें। उद्यापन के दिन सुबह जल्दी उठें और नहाकर साफ वस्त्र धारण करें।

2.वस्त्र धारण करने के बाद उद्यापन विधि का संकल्प लें और किसी विद्वान पंडित को जन्माष्टमी व्रत की उद्यापन विधि के लिए आमंत्रित करें।

3.इसके बाद उद्यापन की सभी सामग्री जिसमें भगवान श्री कृष्ण के लिए पंचामृत, दक्षिणावृत्ति शंख, पीले वस्त्र, बांसुरी, मोर पंख, फल, फूल, माला गोपीचंदन, धनिए के पंजीरी का प्रसाद, चंदन और तुलसी होना अत्यंत आवश्यक है।

4. इसके बाद भगवान पंडित जी द्वारा भगवान श्री कृष्ण को पंचामृत से स्नान कराएं। जिसमें तुलसी अवश्य हो। पंचामृत से स्नान कराने के बाद श्री कृष्ण को गंगाजल से फिर से स्नान कराएं

5.इसके बाद एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान श्री कृष्ण को स्थापित करें और उनका विधिवत पूजन करें।



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6. पूजन के बाद भगवान श्री कृष्ण को फल, फूल और सभी वस्तुएं अर्पित करें।

7. सभी वस्तुएं भगवान श्री कृष्ण को अर्पित करने के बाद भगवान श्री कृष्ण के मंत्रों का जाप करें।

8. इसके बाद भगवान श्री कृष्ण को पंजीरी के प्रसाद का भोग लगाएं और भगवान श्री कृष्ण की आरती उतारें।

9. श्री कृष्ण की आरती उतारने के बाद पंडित जी को भोजन कराएं और उन्हे दक्षिणा दें।

10.अंत में गाय को भोजन अवश्य कराएं और कृष्ण जी की छठी अवश्य पूजें क्योंकि इसके बिना जन्माष्टमी के व्रत की उद्यापन विधि संपन्न नही हो सकती।

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