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Janmashtami 2019 : श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर इस दरगाह में लगता है विशाल मेला

जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण के कई मेलों का आयोजन होता है, लेकिन राजस्थान के झूंझनू जिले के नरहड़ कस्बें में बाबा हाजीब शकरबार शाह की दरगाह पर हर साल जन्माष्टमी मेले का आयोजन किया जाता है, जहां हर साल लोग इस मौके पर फूल चढ़ाने आते हैं।

Janmashtami 2019 : श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर इस दरगाह में लगता है विशाल मेला

Janmashtami 2019 जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण के मेले का आयोजन प्रत्येक जगह होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक दरगाह ऐसी भी है जहां पर जन्माष्टमी का मेला (Janmashtami Mela) पिछले सात सौ वर्षों से अधिक समय से लग रहा है। इस दरगाह में लोग काफी दूर- दूर से आते हैं। दरगाह की सबसे बड़ी बात है कि यहां पर हर धर्म के लोग आ सकते हैं। इसके अलावा यहां सभी धर्मों के लोगों को अपनी- अपनी पूजा पद्धति के अनुसार पूजा भी करने दी जाती है। इसी कारण इस दरगाह को कोमी एकता प्रतीक भी माना जाता है तो आइए जानते हैं जन्माष्टमी (Janmashtami) के मौके पर दरगाह लगने वाले इस मेले के बारे में....


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जन्माष्टमी का पर्व पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व पर देश के सभी मंदिरों को सजाया जाता है। जन्माष्टमी के त्योहार पर भगवान श्री कृष्ण की झांकियां निकाली जाती है और मेला भी लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर एक दरगाह पर भी मेला लगता है।

यह दरगाह राजस्थान के झूंझनू जिले के नरहड़ कस्बें में स्थित है। यह दरगाह हाजीब शकरबार शाह की दरगाह है। जो सभी कोमों की एकता को दर्शाती है। इस दरगाह की सबसे बड़ी विशेशता यह है कि यहां सभी धर्मों के लोग अपनी- अपनी धार्मिक पद्धति से पूजा करने दी जाती है।

कौमी एकता के प्रतीक के रूप में ही यहां प्राचीन काल से श्री कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर विशाल मेला लगता है। जिसमें हिंदूओं के साथ देशभर के मुसलमान भी शामिल होते हैं। जन्माष्टमी पर यहां तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है।

इस मेले में राजस्थान, पंजाब, गुजरात, हरियाणा,उत्तर प्रदेश दिल्ली,आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र लोखों जाइरीन आते हैं। इस मेलें में हिंदू धर्म को मानने वालें लोग भी बढ़ी तादात में यहां आते हैं और हाजीब शकरबार शाह की दरगाह पर फूल चढ़ाते हैं। जाइरीन यहां आकर चादर,कपड़े, नारियल मिठाईयां और पैसे भी चढ़ाते हैं।


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जन्माष्टमी पर नरहड़ में लगने वाला ऐतिहासिक मेला और अष्टमी की सारी रात सूफी संत के द्वारा सूफी गीत गए जाते हैं। जिसे हिंदू धर्म के लोग भी अत्याधिक पसंद करते हैं। इसी कारण से ही इस दरगाह को कोमी एकता का प्रतीक भी माना जाता है। इस दरगाह पर बिना भेदभाव के लोग आकर बाबा को फूल चढ़ाते हैं।

माना जाता है कि इस दरगाह कि खादिम एवं इंतजामिया कमेटी करीब सात सौ वर्षों से अधिक समय से इस प्रकार के मेले का आयोजन कर रही है। जन्माष्टमी के इस मेले को उर्स के मेले की तरह ही आज भी आयोजित किया जाता है। जिसमें सभी धर्मों के लोगों को आने की अनुमति है।

नरहड़ में कभी राजपूत राजा रहा करते थे। उस समय में यहां के पर 52 बाजार हुआ करते थे। जिस समय यहां पठानों का आगमन हुआ उस समय के गर्वनर लोदी खां थे। राजपूतों ने उन्हें युद्ध में कई बार हराया था।

यह कितना महत्वपूर्ण स्थान है। इस बात का अंदाजा आप यहां के इतिहास ले लगा सकते हैं। लेकिन फिर भी सरकार की तरफ से यहां कोई भी समुचित इंतजाम नहीं है। इसी वजह से यहां आने वाले लोगों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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