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Janmashtami 2019 : जन्माष्टमी पर जानिए अटूट प्रेम होने पर भी क्यों नही हुआ श्री कृष्ण और राधा का विवाह

राधा और कृष्ण को लोग आज भी याद करते हैं, जन्माष्टमी पर लोग राधा और कृष्ण की प्रेम लीला का मंचन करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्री कृष्ण और राधा जी का विवाह नहीं हो पाया था, इसके पीछे का क्या कारण था , आइए जानते है कि राधा और कृष्ण का विवाह क्यों नही हो सका था।

Janmashtami 2019 : जन्माष्टमी पर जानिए अटूट प्रेम होने पर भी क्यों नही हुआ श्री कृष्ण और राधा का विवाह

Janmashtami 2019 जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण और राधा के प्रेम को याद किया जाता है। लोग इस दिन आनंदित होकर राधा और कृष्ण की प्रेम की कथाएं सुनते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्री कृष्ण (Shri Krishna) और राधा (Radha) जी का विवाह क्यों नही हो सका। अगर नहीं तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। जन्माष्टमी का पर्व इस साल 2019 में 24 अगस्त 2019 के दिन मनाया जाएगा। यह दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है तो आइए जन्माष्टमी के मौके पर जानते हैं कि क्यों नहीं हो सका भगवान श्री कृष्ण और राधा का विवाह

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जानें क्यों नही हुआ श्री कृष्ण और राधा का विवाह (Jane Kyu Nahi Hua Shri Krishna or Radha Ka Vivha)

भगवान श्री कृष्ण और राधा के बीच में अटूट प्रेम था। जिससे पूरा संसार परिचित है। जब भी भगवान श्री कृष्ण बासुंरी बजाते थे तो राधा जी अपने आपको रोक नही पती थी। एक बार पूर्णिमा की शाम के समय श्री कृष्ण की बांसुरी की आवाज सुनकर राधा को लगा कि वह सब कुछ छोड़कर उनके कृष्ण के पास चली जाएं। लेकिन वह ऐसा कर नहीं सकती थी। क्योंकि उनके घर वालों ने उन्हें खाट से बांध रखा था। भगवान श्री कृष्ण उद्धव और बलराम को लेकर राधा जी के घर गए।भगवान श्री कृष्ण ने उनके घर जाकर कहा कि आज से आठ वर्ष पूर्व जब मेरी माता ने मुझे ओखली से बांध दिया था। उस समय यह लड़की मेरे पास आई थी। उस समय ही मैने इसे देखा था।


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यह कहकर उन्होंने राधा जी को आजाद कराया। इतने में बलराम भी वहां आ गए और उन्होंने दोनों को उठाया और बाहर ले आए। अगले दिन जब राधा की मां ने घर में राधा को देखा तो वह अपने बिस्तर पर नहीं सो रही थी। यह रास पूर्णिमा का अंतिम रास था। भगवान कृष्ण अपनी माता यशोदा जी के पास गए और उन्होंने अपनी माता से राधा के साथ विवाह करने की इच्छा जाहिर की। इस पर यशोदा जी ने श्री कृष्ण से कहा कि राधा तुम्हारे लिए ठीक लड़की नही है। वह तुमसे उम्र में बड़ी है और उसकी मंगनी भी हो चुकी है जो कंस की सेना में है। राधा का मंगेतर इस समय युद्ध के लिए गया है। इसलिए तुम उससे विवाह नहीं कर सकते। मैने जिस बहु की कल्पना की है। वह बिल्कुल भी वैसी नही है।

वह तो एक साधारण सी ग्वालन है। इसलिए तुम उससे विवाह नहीं कर सकते। इस पर श्री कृष्ण ने अपनी माता से कहा कि मुझे नहीं पता कि वह मेरे लिए सही है या गलत लेकिन मैं उससे प्रेम करता हुं और उससी से विवाह भी करना चाहता हुं।दोनों के विवाद इतना बढ़ा कि यह बात नंद बाबा तक पहुंच गई। यशोदा जी ने नंद बाबा से कहा कि यह उस राधा के साथ विवाह करना चाहता है। जो पूरे गांव में नाचती रहती है। नंद बाबा ने भी श्री कृष्ण को समझाने का प्रयत्न किया। लेकिन जब उन्हें कोई रास्ता दिखाई नहीं दिया तो वह श्री कृष्ण को गर्गाचार्य और उनके शिष्य संदीपनी के पास ले गए। जिसके बाद उनके गुरु नें उन्हें उनके जीवन के लक्ष्य से अवगत कराय और उन्हें उनकी सच्चाई के बारे में बताया। जिसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने राधा के विवाह करने की इच्छा का त्याग कर दिया।

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