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Holi Essay : होली पर निबंध बच्चों के लिए

नेहा | UPDATED Mar 15 2019 5:34PM IST
Holi Essay : होली पर निबंध बच्चों के लिए
Holi Essay : होली पर निबंध : होली कब है 2019 में (Holi 2019) अगर आपको नहीं पता तो आपको बता दें कि 20 मार्च को होलिका दहन (Holika Dahan) है और 21 मार्च को होली का उत्सव मनाया जाएगा। ऐसे में स्कूल के लिए होली पर निबंध (Holi Essay) लिखना है तो लेखिका नेहा द्वारा होली का निबंध (Holi ka Nibandh) आपके लिए मददगार साबित होगा। ये रहा सबसे बेस्ट होली पर निबंध (Holi Par Nibandh)...
 
Holi Essay : होली पर निबंध
होली का त्यौहार पास आते ही छोटे बड़े सभी एक दूसरे से इस बारे में सलाह मशवरा करने लगते हैं कि इस बार होली का त्यौहार कैसे मनाया जाए। किसको कैसे रंगों से सराबोर करना है। इस त्यौहार के बहाने किससे लंबे समय से चले आ रहे मनमुटाव को दूर किया जा सकता है। एक तरफ होली को जमकर मनाने वाले लोग हैं तो दूसरी तरफ ऐसे लोग भी होते हैं जो होली के दिन सुबह से ही अपने आपको घर में कैद कर लेते हैं इस डर से कि कोई उन्हें रंग न लगाये। कोई उनके साथ होली के बहाने अपनी भड़ास न निकाले। होली रंगों का त्यौहार है। होली मौसम के बदलाव का सूचक है। होली मतलब बसंत ऋतु का आगमन जब चारों ओर फैली प्रकृति में रंग बिरंगे फूल खिलकर पूरी धरती को रंगों से भर देते हैं। होली सिर्फ त्यौहार ही नहीं बल्कि संस्कार है। होली यानी हो हल्ला, हुल्लड़बाजी, मस्ती, शरारत...।
 
Holi Essay : होली पर निबंध
हमारे देश में त्यौहारों का विशिष्ट महत्व है। हो भी क्यों न, त्यौहार होते ही मनाने के लिए हैं। होली के स्वरूप में आज काफी बदलाव आ गया है। छोटे बड़े शहरों में ही नहीं बल्कि गांव और कस्बों में अब कई ऐसे लोग हैं जो होली मनाने से दूर रहते हैं। यहां तक कि गांवों में भी जहां खुलकर बिना भेदभाव के होली खेली जाती थी और इस दिन को खासतौर पर एक दूसरे के साथ भेदभाव, लड़ाई झगड़े भुलाकर एक होने का दिन माना जाता था, वहां पर भी आज ऐसे तमाम लोग हैं जो होली के रंगों में अपने को भिगोना पसंद नहीं करते। अकसर होली बच्चो की परीक्षाओं के दौरान आती है। पहले जहां अभिभावक इस बात से जरा भी परेशान नहीं होते थे कि बच्चे परीक्षा के दौरान होली में हुड़दंग न करें। लेकिन अब महानगरों में ही नहीं बल्कि छोटे बड़े शहरों में भी अभिभावकों को यही चिंता होती है कि कहीं बच्चे पानी में भीगने से बीमार न हों या त्यौहार मनाने के शौक में उनकी परीक्षाओं की तैयारी ढंग से न हो सके।
होली के त्यौहार से अब उच्च ही नहीं मध्यमवर्ग की कई महिलाएं इतनी ब्यूटी काॅन्शस हो र्गइं कि वह होली खेलने से पूरी तरह परहेज बरतने लगी हैं। होली के दिन पर वे सिर्फ दिखावे के तौरपर ही सूखा गीला रंग लगवाती हैं बल्कि वे अपना स्वयं घर में बना रंग अपने हाथ में रखती हैं और उसे ही लगाने के लिए कहती हैं। ताकि बाजार के रंगों से उनकी सुंदरता पर कोई बुरा असर न पड़े।
 
Holi Essay : होली पर निबंध
मनोवैज्ञानिकों की माने तो वे हर त्यौहार को हंसी खुशी के माहौल में मनाने को व्यक्तित्व विकास के लिए सहायक मानते हैं। होली के कई दिन पहले तैयारी, रंगों की खरीदारी, घर में आने वाले मेहमान, पकवानों की खूशबू, सबका साथ मिलकर होली खेलना, होली के हुड़दंग में छोटे बड़े सभी की हिस्सेदारी, बच्चों की धमाचैकड़ी यह सब अपने आपमें इतना उत्तेजक होता है कि हमारे भीतर का तनाव दूर हो जाता है और कई किस्म की मानसिक समस्याओं से हम थोड़ी देर के लिए दूर हो जाते हैं। होली खेलने वाले लोगों में पुरुष वर्ग ही नहीं औरते भी जमकर खेलती हैं। इतना ही नहीं शर्म और लिहाज के पर्दे में रहने वाली वे औरते जिन्हें गली मुहल्ले के लोग हमेशा शांत देखते थे वे औरते भी होली के धूम-धड़ाके में होली जमकर खेलती हैं और नाचती हैं।
 
Holi Essay : होली पर निबंध
आज हमारी जीवनशैली में काफी बदलाव आ गया है। संयुक्त परिवार टूटकर एकल परिवारों में बट गए हैं। जो लोग गांव, कस्बों से निकल बड़े शहरों में आए हैं तो अगर वे अपने घर होली खेलने नहीं जाते तो वे यहां अपने घर में अपने को कैद करके अपने बचपन की रंग भरी होली को ही याद करके घर से बाहर होली मनाने की मजबूरी पर दुखी होते हैं। खैर, होली क्यों न मनायी जाए, क्यों न अपनी आने वाली पीढ़ी को होली के संस्कार दिए जाए ताकि हमारी नयी पीढ़ी भी इस त्यौहार के बहाने अपने भेदभाव भुलाकर सबके साथ मिलकर रहना सीखें। क्यों न परिवार में बच्चों को होली के अवसर पर बनाए जाने वाले अपने परंपरागत व्यंजनों से अवगत कराएं। हां, लेकिन इनकी जगह पर चाइनीज या इटेलियन व्यंजन क्यों खाएं? बच्चे जब गुजिया और नमकीन की महक सूंघते हैं तो उन्हें महक से ही पता चल जाता है कि अब होली दूर नहीं।
 
Holi Essay : होली पर निबंध
त्यौहार मनाना किसी थैरेपी से कम नहीं होता। त्यौहार से लोगों के बीच मिलने जुलने, उनके साथ मस्ती करने से मन की थकान मिटती है। त्यौहारों से मुंह फेरना यानी एक अजब किस्म की नकारात्मकता को जबरन ढोना है। तन मन चंगा न भी हो तो भी होली के रंग में रंग जाएं। बड़े ही नहीं बल्कि बच्चों को भी इस त्यौहार से जोड़े। यही मौका है जब उन्हें घर के पकावान बनाने में साथ लगाएं, दूसरों के साथ मौजमस्ती का जीवन जीना सिखाएं और उन्हें दूसरो की इज्जत करने का संस्कार दें।
 
Holi Essay : होली पर निबंध
यदि आप बेहद क्रिएटिव हैं तो होली को अपने एक अलग नए अंदाज से मनाएं। होली के मौके पर अपने घर मेहमानों को आमंत्रित करें। उनके साथ लंच, डिनर लें। घर को फूलों से सजाएं। अपने बड़े बुजुर्गों को या रिश्तेदारों को गिफ्ट दें। अपने लिए कुछ नया खरीदें। रूटीन से हटकर हम जो कुछ भी नया करते हैं उससे हमारी जिंदगी में नयापन आता है। होली के हुड़दंग के बाद अपने पुराने रूटीन में वापिस आने के लिए यह त्यौहार हमें एक नयी ऊर्जा से भर जाता है और हम इंतजार करते हैं अगले साल की होली का।

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