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Holi 2019 : होलिका दहन मुहूर्त, इस तरह करेंगे पूजा तो मिलेगा लाभ- जानें होलिका दहन की राख का महत्व

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Mar 15 2019 4:05PM IST
Holi 2019 : होलिका दहन मुहूर्त, इस तरह करेंगे पूजा तो मिलेगा लाभ- जानें होलिका दहन की राख का महत्व
Holi 2019 
 
होली के पर्व को रंगों के त्यौहार के रुप में मनाया जाता है। इसके अलावा इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। होली(Holi) का यह त्यौहार इस बार 20 से 21 मार्च 2019 तक मनाया जाएगा। इस बार 20 मार्च 2019 को होलिका दहन किया जाएगा । होलिका दहन के अगले दिन 21 मार्च 2019 को रंगो से होली जाएगी। शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन मास की पू्र्णिमा को होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन रंग लगाकर होली(Holi) के पर्व को मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिलकर होली के इस त्यौहार को बड़ी धूम-धाम से मनाते है।
 

क्या है होली दहन का शुभ मुहूर्त

होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त होना आवश्यक है । इस बार के पंचाग को देखा जाए तो भद्रा लगने के कारण इस बार होलिका दहन का समय रात्रि 9:01 मिनट से मध्यरात्रि  12: 30 तक रहेगा। पंचांग के अनुसार इस बार पू्र्णिमा का समय 20 मार्च 2019 को सुबह 10 बजकर 44 मिनट से अगले दिन 21 मार्च 2019 को सुबह 7 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। होलिका दहन के दिन भद्रा अलग- अलग समय पर पड़ती है। जिसकी वजह से होलिका दहन का समय भी हर बार अलग- अलग होता है। भद्रा एक ऐसा समयकाल होता है जब किसी भी शुभ काम को नही किया जाता। शास्त्रों के अनुसार भद्रा के समय होलिका दहन करने से मनुष्य के जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और उसे अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसलिए भद्रा को छोड़कर अन्य किसी भी समय जो शुभ हो उस समय होलिका दहन का कार्य किया जाता है।

होलिका पूजन की विधि

पूजन करते समय होलिका को हल्दी का टीका लगाया जाता है।हल्दी जो हिंदू धर्म में प्रत्येक शुभ कार्यों में प्रयोग की जाती है और इसे सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। इसके बाद होलिका पर रंग और अबीर चढ़ाए। अपनी स्थिति के अनुसार फल- फूल व मिठाई अर्पण करें। अंत में होलिका के चारों तरफ परिक्रमा करते हुए जल अर्पित करें। शास्त्रों के मत अनुसार विधि-विधान से होलिका पूजन करने से घर में सुख- समृद्धि और शांति आती है।इसलिए इस पूजन के समय विधि-विधान का ध्यान रखना आवश्यक है।

होलिका दहन की राख का महत्व

होलिका दहन की पवित्र अग्नि में लोग गेंहु की बाले भूनते है और अपने सगे संबंधियों मित्रों में बांटते है। माना जाता है ऐसा करने से लोगों के जीवन में शांति , सुख-समृद्धि आती है और अनिष्ट का नाश होता है। होलिका दहन के साथ ही नई फसल के अच्छी तरह आने की कामना की जाती है। हिंदु धर्म के अनुसार होली के पर्व को साल के  अंतिम पर्व के रुप में मनाया जाता है।  जिसके बाद से चैत्र नवरात्र को साल के पहले पर्व के रुप में मनाया जाता है।जो हिंदु पंचांग के अनुसार नया  साल माना जाता है।

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