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Holastak Holi 2019 : होलाष्टक 2019, खरमास 2019, मीन संक्रांति 2019 और होली 2019, भूलकर भी ना करें ये तीन काम

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Mar 12 2019 5:36PM IST
Holastak Holi 2019 : होलाष्टक 2019, खरमास 2019, मीन संक्रांति 2019 और होली 2019, भूलकर भी ना करें ये तीन काम

Holastak Holi 2019 : होलिका दहन 20 मार्च 2019 (Holika Dahan 2019) को है और रंग वाली होली 21 मार्च 2019 (Holi 2019) को है। होलाष्‍टक 2019 (Holastak 2019) होली से 8 दिन पहले शुरू हो जाते हैं होलाष्‍टक और इस बार होलाष्‍टक 14 मार्च से 21 मार्च तक रहेंगे। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार होलाष्‍टक लगने के बाद कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि ये 8 दिन अशुभ माने जाते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष अष्टमी से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। होलाष्‍टक के दिन होली का डंडा गाडा जाता है और तब से ही होलिका दहन के लिए लकड़ियां एकत्रित करने का काम शुरू हो जाता है। होलाष्टक की रात में मीन संक्रांति 2019 भी है, मीन संक्रांति यानी सूर्य का राशि परिवर्तन होगा और इस दिन सूर्य अपनी मकर राशि से मीन राशि में संचरण करेंगे और 14 अप्रेल तक मीन राशि में ही रहेंगे। हिन्दू पंचांग की गणना के अनुसार 15 मार्च को सूर्यदय से पहले सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए ज्योतिषीय आधार पर यह संक्रांति 14 मार्च को कही जाएगी और इसका पुण्यकाल 15 मार्च को माना जाएगा। इसलिए होलाष्टक से खरमास भी लग रहा है और दौरान कोई भी शुभ कार्य, विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसा शुभ संस्‍कार नहीं किए जाते हैं। होलाष्टक से ही होलिका दहन के लिए स्‍थान का चयन कर लिया जाता है और पूर्णिमा के दिन सांयकाल के शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। 

इसलिए अशुभ है होलाष्टक के 8 दिन

होलाष्‍टक से होली तक विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसा शुभ संस्‍कार नहीं किए जाते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी अर्थात होलाष्‍टक से प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ जाता है। 

होलाष्‍टक से होली तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। 

होलाष्टक पर दैत्य राज हिरण्यकश्यप ने फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी को भक्त प्रह्लाद को बंदी लिया और यातनाएं दी। 

होलिका ने भी प्रह्लाद को जलाने की तैयारी इस दिन से शुरू कर दी थी। 

होलाष्टक के 8 दिन बाद होली पर 'होलिका' दहन के दिन भस्म हो गई 

होलिका दहन के बाद इस पर्व को रंगोत्सव के रूप में मनाया गया है।

भगवान शिव ने होलाष्टक के दिन कामदेव को भस्म कर दिया था। अगले दिन भगवान शिव से कामदेव के वापस जीवित होने का वरदान मिला।


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