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Hartalika Teej 2019 : हरतालिका तीज कब है 2019 में, मुहूर्त, महत्व, पूजन विधि और हरतालिका तीज व्रत कथा

हरतालिका तीज व्रत 2019 में 1 सितंबर को रखा जाएगा, हिंदू शास्त्रों में हरतालिका तीज का महत्व विस्तार से बताया गया है, हरतालिका तीज व्रत में शिव परिवार की पूजा विधि विधान से करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और हरतालिका तीज व्रत कथा का पाठ करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए आइये जानते हैं, हरतालिका तीज का शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजन विधि और हरतालिका तीज व्रत कथा...

Hartalika Teej 2019 : हरतालिका तीज कब है 2019 में, मुहूर्त, महत्व, पूजन विधि और हरतालिका तीज व्रत कथा

Hartalika Teej 2019 (हरतालिका तीज 2019) हरतालिका तीज का व्रत सुहागन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं, हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej Vrat) कुंवारी लड़कियां अच्छे वर के लिए भी रख सकती हैं, इतना ही नहीं हरतालिका तीज व्रत की सबसे बड़ी बात तो यह है कि इसे विधवा स्त्रियां भी कर सकती हैं। हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन हस्त नक्षत्र में होती है। हरतालिका तीज के दिन दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा का महत्व है। हरतालिता तीज का व्रत विधि विधान से करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है, हरतालिका तीज व्रत कथा को पढ़ने-सुनने से मोक्ष प्राप्त होता है, तो इसलिए आइए जानते हैं हरतालिका तीज व्रत का शुभ मुहूर्त, हरतालिका तीज का महत्व, हरतालिका तीज व्रत पूजन सामग्री, हरतालिका तीज व्रत विधि और हरतालिका तीज की कथा के बारे में...


हरतालिका तीज 2019 तिथि (Hartalika Teej 2019 Tithi)

1 सिंतबर 2019

हरतालिका तीज 2019 शुभ मुहूर्त (Hartalika Teej 2019 Subh Muhurat)

हरतालिका पूजा मुहूर्त- सुबह 8 बजकर 27 मिनट से 8 बजकर 37 मिनट तक

प्रदोष काल हरतालिका पूजा मुहूर्त - शाम 6 बजकर 39 मिनट से रात 8 बजकर 56 मिनट तक

तृतीया तिथि प्रारंभ- सुबह 8 बजकर 27 मिनट से (1 सितंबर 2019 )

तृतीया तिथि समाप्त- अगले दिन सुबह 4 बजकर 47 मिनट तक (2 सितंबर 2019)

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हरतालिका तीज का महत्व (Hartalika Teej Ka Mahatva)

हिंदू शास्त्रों के अनुसार हरतालिका तीज को सबसे बड़ा माना जाता है। वैसे तो इसके अलावा हरियाली तीज और कजरी तीज भी पड़ती है। लेकिन हरतालिका तीज को विशेष महत्व दिया जाता है। यह तीज भाद्र पद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में पड़ने के कारण इस तीज को हरतालिका तीज के नाम से जाना जाता है।

हरतालिका तीज का व्रत महिलाओं के लिए होता है। लेकिन इस व्रत को कम उम्र की लड़कियां भी रख सकती हैं। इस तीज में भगवान गणेश, शिव और पार्वती जी का पूजन किया जाता है। इस व्रत को निर्जल रहकर किया जाता है और रात में भगवान शिव और माता पार्वती के गीतों पर नृत्य किया जाता है।


हरतालिका तीज पूजा सामग्री (Hartalika Teej Puja Samigri)

गीली काली मिट्टी,केले का पत्ता,फल, एक लाल कपड़ा, भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए परात,चावल, कलश दीप, एक सिक्का, सुपारी, हल्दी, पांच पान के पत्तों का गुच्छ, चावल से भरी कटोरी, एक दीपक, दूब, रोली, मोली, इत्र,धूप, बेलपत्र, शमिपत्री, फूल, जनेऊ, हार, माला पगड़ी, माता पार्वती के लिए श्रृंगार का समान, देसी घी, कच्चा तेल, देसी कपूर, कामिका सिंदूर, कुमकुम, पंचामृत आदि सभी चीजें पूजन सामग्री में चाहिए। इन सभी सामग्रीयों के बिना हरितालिका की पूजा पूरी नहीं होती।


हरतालिका तीज पूजा विधि (Hartalika Teej Puja Vidhi)

1.हरतालिका तीज की पूजा करने से पहले भगवान गणेश, शिव जी और माता पार्वती का आह्वाहन करें और उनसे अपनी पूजा सफल कराने की प्रार्थना करें।

2. सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें। भगवान गणेश का रोली से तिलक करे और उन्हें दूब अर्पित करें।

3.इसके बाद तीनों की काली गीली मिट्टी से प्रतिमा बनाएं और उन्हें आसन ग्रहण कराएं। इसके बाद उन पर फूल चढ़ाएं।

4. फूल चढ़ाने के बाद 3 बार मंत्र पढ़कर आचमन करें और हाथ धो लें।

5. इसके बाद परात में जल भरकर शिवजी को स्नान कराएं। भगवान शिव को बेलपत्र शमिपत्री फल और फूल चढ़ाएं।

6.भगवान शिव को सभी चीजें अर्पित करने के बाद माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें।

7.इसके बाद दोनों को सभी चीजें जो आपने पूजा में रखी थी अर्पित कर दें।

8.सभी चीजें अर्पित करने के बाद हरतालिका तीज की कथा पढ़े अथवा सुनें।

9. कथा पढ़ने के बाद भगवान गणेश, शिव और माता पार्वती की आरती उतारें।

10.अंत में अपने से बड़े सभी लोगों के पैर छुकर उनका आर्शीवाद लें।

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हरतालिका तीज व्रत कथा (Hartalika Teej Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती अपने कई जन्मों से भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थी। इसके लिए उन्होंने माता पार्वती ने हिमालय पर्वत के गंगा तट पर बाल अवस्था में अधोमुखी होकर तपस्या की थी। माता पार्वती ने इस तप में अन्न और जल का भी सेवन नही किया था। वह सिर्फ सूखे पत्ते चबाकर ही तप किया करती थी।

माता पार्वती को इस अवस्था में देखकर उनके माता पिता अत्ंयत ही दुखी रहते थे। एक दिन देवऋषि नारज भगवान विष्णु की तरफ से पार्वती जी के विवाह को प्रस्ताव लेकर उनके पिता के पास गए। पार्वती जी के पिता ने तुरंत ही इस प्रस्ताव के लिए हां कर दी। जब माता पार्वती को उनके पिता ने उनके विवाह के बारे में बताया तो वह काफी दुखी हो गई और रोने लगीं।

उनकी एक सखी से माता पार्वती का यह दुख देखा नहीं गया और उन्होंने उनकी माता से इस विषय में पूछा। जिस पर उनकी माता ने उस सखी को बताया कि पार्वती जी शिव जी को पति रूप में पाने के लिए तप कर रही हैं। लेकिन उनके पिता चाहते की पार्वती का विवाह विष्णु जी से हो जाए। इस पर उनकी उस सहेली ने माता पार्वती को वन में जाने कि सलाह दी।

जिसके बाद माता पार्वती ने ऐसा ही किया और वो एक गुफा में जाकर भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गई थी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का बनाया और शिव जी की स्तुति करने लगी। पार्वती जी ने रात भर भगवान शिव का जागरण किया।

इतनी कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती को दर्शन दिए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। इसी कारण हरतालिका तीज को इतना महत्व दिया जाता है।

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