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Guru Purnima 2019 : गुरु पूर्णिमा पर जानें गुरु चाणक्य और शिष्य चंद्रगुप्त की कहानी

चाणक्य और चंद्रगुप्त की कहानी भारत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखी गई है। गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु वेद व्यासजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। लेकिन गुरु चाणक्य और शिष्य चंद्रगुप्त की कहानी भी काफी प्रसिद्द है। चाणक्य राजनीती और ज्योतिषशास्त्र के साथ साथ अन्य शास्त्रों के भी ज्ञाता रहे हैं। चाणक्य को पहली ही नजर में भारत का भावी सम्राट चंद्रगुप्त के रूप में मिला। जिसे मगध का राजा बनाया।

Guru Purnima 2019 : गुरु पूर्णिमा पर जानें कैसे  गुरु चाणक्य ने अपने शिष्य चंद्रगुप्त को बनाया महानGuru Purnima 2019 Chanakya Chandragupta Story

Guru Purnima 2019 चाणक्य और चंद्रगुप्त के बारे में सब जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैसे चाणक्य ने चंद्रगुप्त को महान बनाया था। इस गुरु पूर्णिमा पर गुरु की महिमा का बखान करते हुए । हम आपको चाणक्य और चंद्रगुप्त के बारे में बताएंगे। गुरु पूर्णिमा साल 2019 (Guru Purnima 2019) में 16 जुलाई 2019 के दिन मनाया जाएगी। गुरु पूर्णिमा के दिन लोग अपने गुरुओं का सम्मान करते हुए उनकी पूजा करते हैं और उन्हें उपहार देते हैं। गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima ) के दिन लोग अपने दिवगंत गुरुओं का सम्मान करते हुए उनकी चरण पादुकाओं को पूजते हैं। गुरु कितने महान होते हैं यहा आज हम आपको इस कहानी के माध्यम से बातएंगे तो चलिए जानते हैं चाणक्य (Chanakya) और चंद्र गुप्त (Chandragupta) के बारे में...


कैसे चाणक्य ने चंद्रगुप्त को बनाया महान (Kaise Chanakya Na Chandragupta Ko Banaya Mahan)

चाणक्य कितने महान थे । यह तो हर कोई जानता है। चाणक्य राजनीती , ज्योतिष और अन्य शास्त्रों के ज्ञाता थे। गुरुकुल में शिक्षा देने वाले चाणक्य एक साधरण शिक्षक थे। चाणक्य ने अखंड भारत का सपना देखा था और इसके कई प्रयास भी किए थे। चाणक्य ने एक साधरण से बालक को एक महान राजा बना दिया । क्योंकि वह भारत की अखंडता चाहते थे। चाणक्य ने एक शिक्षक के रूप मे ही अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे । वह राजनीती से दूर थे और शांति से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे । वह सिर्फ भारत को एक विशाल साम्राज्य और उसकी अखंडता चाहते थे।

चाणक्य की नजरे एक युवा की तलाश में थी जो भारत का नया इतिहास लिख सके। वह एक ऐसा शिष्य चाहते थे जो विकट से विकट परिस्थितियों का सामना कर सके। उनका शिष्य बल से ही नही मानसिक रूप से मजबूत हो। एक बार चाणक्य पाटलिपुत्र के राजा महापद्मनंद के यहां यज्ञ में गए और भोजन करन के लिए आसन ग्रहण करने लगे। राजा ने चाणक्य के काले रंग का मजाक बनाया और उन्हें उस आसन पर से उठने की आज्ञा दी। राजा ने चाणक्य का भरी सभा में अपमान किया। राजा का ऐसा व्यवहार देखकर चाणक्य बिना भोजन किए वहां से चले गए

चाणक्य का क्रोध अपने चरम पर था । उन्होंने प्रतिज्ञा कि की वह जबतक नंदवंश का नाश नहीं कर देंगे तब तक अपनी चोटी नही बांधेंगे। चाणक्य अपनी प्रतिज्ञा लेते हुए राजमहल से गुस्से में निकले। राजमहल से निकलकर उनकी नजर एक बालक पर पड़ी । जो अपने समान सभी दुसरे बालकों का प्रतिनिधित्व कर रहा था। चाणक्य को पहली ही नजर में उस बालक का इस तरह अन्य बालकों का प्रतिनिधित्व करते हुए देखकर आश्चर्यचकित रह गए। वह बालक इतनी सी उम्र में सबका बड़े ही सटीक अंदाज में नेतृत्व कर रहा था।


चाणक्य को पहली ही नजर में भारत का भावी सम्राट मिल गया था। चाणक्य ने चंद्रगुप्त के पास जाकर उसका नाम पूछा और उससे शिक्षा ग्रहण करने के लिए पूछा था। चंद्रगुप्त ने तुरंत शिक्षा के लिए हां कर दी। इसक बाद चाणक्य चंद्रगुप्त को अपने साथ गुरुकुल ले आए और शिक्षा देनी शुरु कर दी। चंद्रगुप्त ने पूरी लगन से चाणक्य से शिक्षा प्राप्त की । वह चाणक्य की सभी परिक्षाओं में खरा उतरा। चद्रगुप्त ने सभी छोटे राजओं के साथ मिलकर पाटलिपुत्र पर हमला कर दिया और नदों को युद्ध मे परास्त कर दिया।

नदों को पराजित करने के बाद चंद्रगुप्त ने मगध का राजा बना। चंद्रगुप्त को और भी ज्यादा पराक्रमी बनाने और मौर्य साम्राज्य का और भी ज्यादा विस्तार करने के लिए लिए राजनीतिक शिक्षा लेनी शुरु की और उसके मंत्री बने। चाणक्य ने चंद्रगुप्त को भारत को एक अंखड साम्राज्य बनाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद चंद्रगुप्त ने सत्ता के केंद्र पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया और एक विशाल सेना का नेतृत्व करते हुए विश्व विजेता बनने निकले सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस को हरा दिया और सिंकदर को यहां से जाने के लिए मजबूर कर दिया।

जिसकी वजह से सिंकदर का विश्व विजेता बनने का सपना टुट गया। इस तरह चाणक्य ने एक महान गुरु बनने के बनकर भारत को एक विशाल साम्राज्य में स्थापित किया और चंद्रगुप्त ने भी अपने गुरु को का सपना पूरा करके उन्हे गुरु दक्षिणा दी।

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