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गीता जयंती 2018: जानिए ''गीता जयंती'' कब, क्यों धर्म ग्रंथ की उत्त्पत्ति का मनाया जाता है महोत्सव

गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन को मोक्षदा एकादशी का उपवास भी रखा जाता है।

गीता जयंती 2018: जानिए

गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन को मोक्षदा एकादशी का उपवास भी रखा जाता है। 2018 में यह तिथि अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार 19 दिसंबर (बुधवार) को मनाई जाएगी।

कर्मण्यवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोSस्त्वकर्मणि।।

मनुष्य के हाथ में केवल कर्म करने का अधिकार है फल की चिंता करना व्यर्थ अर्थात निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिये। स्वंय भगवान श्री कृष्ण ने अपने मुखारबिंद से कुरुक्षेत्र की धरा पर श्रीमद्भगवदगीता का उपदेश दिया।

गीता का ज्ञान गीता पढ़ने वाले को हर बार एक नये रूप में हासिल होता है। मानव जीवन का कोई ऐसा पहलू नहीं है जिसकी व्याख्या गीता में न मिले। बहुत ही साधारण लगने वाले हिंदू धर्म के इस पवित्र ग्रंथ की महिमा जितनी गाई जाए उतनी कम है।

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किसी भी धर्म में ऐसा कोई ग्रंथ नहीं है जिसके उद्भव का जिसकी उत्पति का दिन महोत्सव के रूप में मनाया जाता हो एकमात्र गीता ही वह ग्रंथ है जिसके आविर्भाव के दिन को बतौर जयंती मनाया जाता है।

कब मनाई जाती है गीता जयंती

ब्रह्मपुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को दिया था। इसलिये इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है।

इस दिन हिंदू धर्म के अनुयायी श्रीमद्भगवद् गीता का पाठ करवाते हैं। वर्तमान में गीता की लोकप्रियता वैश्विक स्तर पर होने लगी है, विभिन्न भाषाओं में इसके अनुवाद से पूरी दुनिया में गीतोपदेश की स्वीकार्यता मानवता के उद्धारक, कल्याणकारी ग्रंथ के रूप में होने लगी हैं।

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अब गीता जयंती के उत्सव में विभिन्न धर्मों के लोग भी बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं। भगवान श्री कृष्ण आपकी मनोकामनाओं को पूर्ण करें व भगवद् गीता आपके जीवन के अंधकार को मिटाकर उसे ज्ञान से रोशन करें।

गीता का उपदेश है कि कर्म करें फल की चिंता न करें, लेकिन कई बार हमें अपेक्षानुसार परिणाम नहीं मिलते हैं। हो सकता है इसके कारण आपकी जन्म कुंडली में मौजूद हों।

भगवद्गीता का महत्व (Importance of Bhagavad Gita)

श्रीमद्भगवद् गीता का मानव जीवन के लिये बहुत अधिक महत्व है। इसका उपदेश मनुष्य को जीवन की वास्तविकताओं से परिचित करवाता है। उन्हें निस्वार्थ रूप से कर्म करने के लिये प्रेरित करता है। इन्हें कर्तव्यपरायण बनाता है।

सबसे अहम बात यह भी है कि जब भी आप किसी भी तरह की शंका में घिरे हों, गीता का अध्ययन करें आपका उचित मार्गदर्शन अवश्य होगा। इसके अध्ययन, श्रवण, मनन-चिंतन से जीवन में श्रेष्ठता का भाव आता है।

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लेकिन इसके संदेश में मात्र संदेश नहीं हैं बल्कि ये वो मूल मंत्र हैं जिन्हें हर कोई अपने जीवन में आत्मसात कर पूरी मानवता का कल्याण कर सकता है। गीता अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर आत्मज्ञान से भीतर को रोशन करती है।

अज्ञान, दुख, मोह, क्रोध, काम, लोभ आदि से मुक्ति का मार्ग बताती है गीता। दरअसल गीता भगवान श्री कृष्ण द्वारा अपने भक्तों के उद्धार के लिये गाया हुआ मधुर गीत ही है। अर्जुन तो उसे हम तक पंहुचाने का जरिया मात्र बने हैं।

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