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Dussehra 2019 : भारत में इन जगहों पर लगता है देश का सबसे बड़ा दशहरा मेला

Dussehra 2019 Festival इस साल 2019 में दशहरे का पर्व (Dussehra Festival) 8 अक्टूबर 2019 (8 October 2019) के दिन मनाया जाएगा। भारत के बस्तर शहर में मां दंतेश्वरी मंदिर है , जहां पर दशहरे के दौरान हजारों आदिवासी जुड़ते हैं यहां पर रावण का पुतला नहीं फूंका जाता, तो आइए जानते हैं इसके अलावा ऐसी और कौन सी जगह है जहां पर सबसे बड़ा दशहरा मनाया जाता है।

Dussehra 2019 : भारत में इन जगहों पर मनाया जाता है सबसे बड़ा दशहराDussehra 2019 India top 5 largest Dussehra Celebrate

Dussehra 2019 भारत में दशहरे का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन भारत की ऐसी पांच जगह ऐसी हैं जहां पर लोग भारत से ही नही बल्कि दूर- दूर से यहां का मेला देखने के लिए आते हैं। इन जगहों पर दशहरे की रौनक कुछ अलग ही होती है। इस दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों को फूंका जाता है तो आइए जानते हैं भारत की किन जगहों पर मनाया जाता है सबसे बड़ा दशहरा


बस्तर का दशहरा (Bastar Ka Dussehra)

भारत के बस्तर जिले के दण्डकरण्य में भगवान राम अपने चौदह वर्ष के दौरान रहे थे। इसी जगह के जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर है जहां पर प्रत्येक साल दशहरे पर जंगलों के हजारो आदिवासी आते हैं। बस्तर के यह लोग 600 साल से यह त्योहार मनाते आ रहे हैं। इस जगह पर रावण का दहन नहीं किया जाता। यहां के आदिवासियों और राजाओं के बीच काफी अच्छा मेल जोल था। राजा पुरुषोत्तम ने यहां पर रथ चलाने की प्रथा शुरू की थी। इसी कारण से यहां पर रावण दहन नहीं बल्कि दशहरे के दिन रथ चलाया जाता है।


मैसुर का दशहरा (Maisur Ka Dussehra )

दशहरा को कर्नाटक का प्रादेशिक त्योहार माना जाता है। मैसुर का दशहरा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां पर दशहरा देखने के लिए लोग दुनिया भर से आते हैं। यहां पर दशहरा का मेला नवरात्रि से ही प्रारंभ हो जाता है। जिसमें लाखों लोग शिरकत करते हैं। मैसुर में दशहरा का सबसे पहला मेला 1610 में आयोजित किया गया था। मैसुर का नाम महिषासुर के नाम पर रखा गया था। इस दिन मैसुर महल को एक दुल्हन की तरह से सजाया जाता है। इस दिन गायन वादन के साथ शोभयात्रा निकाली जाती है।


कुल्लु का दशहरा (Kullu ka Dussehra )

भारत के कुल्लु के ढालपुर मैदान में मनाए जाने वाले दशहरे को भी दुनिया का प्रसिद्ध दशहरा माना जाता है। हिमाचल के कुल्लु में दशहरे को अंतर्राष्ट्रीय त्योहार घोषित किया गया है। यहां पर लोग बड़ी तदाद में आते हैं। यहां पर दशहरा का त्योहार 17वीं शताब्दी से मनाया जा रहा है। यहां पर लोग अलग- अलग भगवानों की मूर्ति को सिर पर रखकर भगवान राम से मिलने के लिए जाते हैं। यहां पर इस दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। यहां पर यह उत्सव सात दिनों तक मनाया जाता है।


मदि‍केरी का दशहरा (Madikari Ka Dussehra )

भारत के कर्नाटक में मदिकेरी शहर में यह दशहरा मनाया जाता है। इसी कारण से इसे मदिकेरी दशहरा कहा जाता है। मदिकेरी में दस दिनों तक यह दशहरा मनाया जाता है। मादिकेरी शहर मे इस दशहरे को मनाने की तैयारी तीन महिने पहले से ही शुरु कर दी जाती है। इस दशहरे को देखने के लिए काफी दूर- दूर से आते हैं। इसी कारण से इस दशहरे को यहां पर अधिक महत्व दिया जाता है। यहां पर लोग लाखों की तदाद में जुड़ते हैं । जिसकी वजह से इस छोटे से शहर में भी अधिक रौनक होती है।


कोटा का दशहरा (Kota Ka Dussehra )

भारत के राजस्थान के कोटा शहर मे भी दशहरा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। कोटा शहर का दशहरा देखने के लिए काफी दूर - दूर से आते हैं। कोटा में मेले का आयोजन महाराव भीमसिंह द्वितीय ने किया था। जो परंपरा आज तक निभाई जा रही है। इस दिन यहां पर मेले का आयोजन होता है। जिसमें लाखों लोग देश विदेश से यहां का मेला देखने के लिए आते हैं। इस दिन यहां पर भजन कीर्तन के साथ- साथ कई प्रकार की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है। इसलिए यह मेला प्रसिद्ध मेलों में से एक माना जाता है।

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