Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Dev Deepawali 2019 : देव दीपावली का काशी में क्यों है विशेष महत्व

Dev Deepawali 2019 देव दीपावली इस साल 2019 में 12 नवंबर 2019 के दिन मनाई जाएगी, देव दीपावली के दिन धर्म नगरी काशी में इस दिन पूजन, हवन और दीप दान जैसे धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है तो आइए जानते हैं देव दीपावली का काशी में क्यों है विशेष महत्व

Dev Deepawali 2019 : देव दीपावली  का काशी में क्यों है विशेष महत्वदेव दीपावली 2019

Dev Deepawali 2019 कार्तिक पूर्णिमा का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व बताया गया है। इस दिन कार्तिक का पुण्य महिना समाप्त होता है और भगवान विष्णु (Lord Vishnu) चार मास की निद्रा के बाद सृष्टि संचालन का कार्य फिर से अपने हाथ में ले लेते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवता दीप दान करते हैं। इसलिए देव दिवाली कहते हैं। देव दीपावली (Dev Deepawali) पूरे भारत में मनाई जाती है। लेकिन काशी में देव दीपावली को विशेष महत्व दिया जाता है तो आइए जानते हैं देव दीपावली का काशी में क्यों है विशेष महत्व


काशी में क्यों मनाई जाती है देव दीपावली (Kashi Mai Kyu Manayi Jati Hai Dev Deepawali)

कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध करके उन्हें स्वर्ग वापस दिला दिया था। तारकासुर के वध के बाद उसके तीनों बेटों ने देवताओं से बदला लेने के लिए का फैसला कर लिया। उन्होंने ब्रह्मा जी की तपस्या करके तीन नगर मांगे और कहा की जब यह तीनों नगर जब अभिजित नक्षत्र में एक साथ आ जाएं तब असंभव व्रत , असंभव बाण से बिना क्रोध किए हुए ही कोई व्यक्ति ही उनका वध कर पाए। इस वरदान को पाकर त्रिपुरासुर अपने आपको अमर समझने लगें और अत्याचारी बन गए।

त्रिपुरासुर ने देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया और उन्हें स्वर्ग से बाहर निकाल दिया। सभी देवी देवता त्रिपुरासुर से बचने के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे। देवताओं का कष्ट दूर करने के लिए भगवान शिव स्वंय ही त्रिपुरासुर का वध करने के लिए पहुंच गए और त्रिपुरासुर का अंत करने में सफल रहे। इस खुशी में सभी देवी देवता भगवान शिव की नगर काशी में पधारे और दीप दान किया। माना जाता है तभी से काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिपावली मनाने की परंपरा चली आ रही है।


इसके अलावा देव दिपावली की एक और मान्याता भी है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु चर्तुमास की निद्रा से जागते हैं और चतुर्दशी के दिन भगवान शिव और सभी देवी देवता काशी में आकर दीप जलाते हैं। वाराणसी में इस दिन विशेष आरती का महा आयोजन किया जाता है। जो पूरे देश में प्रसिद्ध है। हर साल बनारस के घाटों को सजाया जाता है और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और दीप दान किया जाता है। इस दिन लोग काशी के घाटों पर आकर दीपक जलाते हैं।

माना तो यह भी जाता है कि इस दिन स्वंय भगवान आकर दीप जलाते हैं। यदि इस दिन कोई व्यक्ति सच्चे मन से काशी में जाकर दीप जलाता है और भगवान से प्रार्थना करता है तो उसके जीवन की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है और मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण से काशी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है और वैसे भी भगवान शिव को काशी में विशेष रूप से पूजा जाता है। इसलिए काशी को शिव की नगरी के नाम से भी जाना जाता है।

Next Story
Top