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Dev Deepawali 2019 Date Time : देव दीपावली कब है, शुभ मुहूर्त, महत्व, देव दीपावली पूजा विधि और देव दीपावली कथा

Dev Deepawali 2019 Date Time आपको देव दीपावली 2019 की तिथि (Dev Deepawali 2019 Date), देव दीपावली का शुभ मुहूर्त (Dev Deepawali Shubh Mahurat), देव दीपावली का महत्व (Dev Deepawali Importance), देव दीपावली की पूजा विधि (Dev Deepawali Pujan Vidhi) और देव दीपावली की कथा (Dev Deepawali Story) के बारे में नहीं जाता तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे, देव दीपावली दिवाली के पंद्रह दिन बाद आती है, आइये जानते हैं देव दीपावली की सम्पूर्ण जानकारी...

Dev Deepawali 2019 Date Time : देव दीपावली कब है, शुभ मुहूर्त, महत्व, देव दीपावली पूजा विधि और देव दीपावली कथाDev Deepawali 2019 Date Time Dev Deepawali Kab Hai 2019 Mahatva Puja Vidhi Dev Deepawali Katha

Dev Deepawali 2019 देव दीपावली का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस देव दीपावली (Dev Deepawali) को त्रिपुरी पूर्णिमा (Tripuri Purnima) के नाम से भी जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुर नाम के राक्षस का अंत किया था। इसलिए इस दिन देवता अपनी प्रसन्न को दर्शाने के लिए गंगा घाट पर आकर दीपक जलाते हैं। इसी कारण से इस दिन को देव दीपावली के रूप मनाया जाता है तो आइए जानते हैं देव दीपावली कब है, देव दीपावली शुभ मुहूर्त, देव दीपावली का महत्व, देव दीपावली पूजा विधि और देव दीपावली कथा...


देव दीपावली 2019 तिथि (Dev Deepawali 2019 Tithi)

देव विपावली 2019 में 12 नवंबर 2019 को मनाई जाएगी

देव दीपावली 2019 शुभ मुहूर्त (Dev Deepawali 2019 Subh Muhurat)

देव दीपावली प्रदोष काल शुभ मुहूर्त - शाम 5 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 48 मिनट तक

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- शाम 6 बजकर 2 मिनट से (11 नवंबर 2019)

पूर्णिमा तिथि समाप्त - अगले दिन शाम 7 बजकर 4 मिनट तक (12 नवंबर 2019)


देव दीपावली का महत्व (Dev Deepawali Ka Mahatva)

देव दीपावली कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। जिस प्रकार मनुष्य दीए जलाकर दिवाली का त्योहार मनाते हैं। उसी प्रकार देवता भी दीए जलाकर दीपावली का पर्व मनाते हैं। यह देव दीपावली दिवाली के 15 दिन के बाद आती है।

दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के दिन मनाया जाता है और देव दीपावली का पर्व कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार देव दीपावली के दिन सभी देवता गंगा नदी के घाट पर आकर दीप जलाकर अपनी प्रसन्नता को दर्शाते हैं।

पुराणों के अनुसार देव दीपावली के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। त्रिपुरासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान पाकर तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था।

जिसके बाद सभी देवताओं ने भगवान शिव से इस समस्या का समाधान करने के लिए कहा था और भगवान शिव ने देवताओं की विनती पर त्रिपुरासुर से युद्ध करके उसका अंत किया था। देव दीपावली के पूजा - अर्चना को विशेष महत्व दिया जाता है।

वैसे भी कार्तिक मास का महिने में अनेकों पर्व पड़ते हैं। जिसकी वजह से यह महिना पूजा पाठ, जप, तप, साधना आदि के लिए अति विशेष माना जाता है।


देव दीपावली पूजा विधि (Dev Deepawali Puja Vidhi)

1. देव दीपावली के दिन गंगा स्नान को अधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए इस दिन गंगा स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें।

2. इसके बाद भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें। देव दीपावली के दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है।

3.इस दिन शाम के समय भगवान शिव को पुष्प, घी, नैवेद्य, बेलपत्र आदि अर्पित करें।

4. इसके बाद भगवान शिव के मंत्र 'ऊं नम: शिवाय' या ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !! मंत्र का जाप करना इस दिन शुभ रहता है। इसलिए इस मंत्र का जाप अवश्य करें।

5. इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, नैवेद्य, पीले वस्त्र, पीली मिठाई अर्पित करें।

6. इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्र और ऊं नम : नारायण या नमो स्तवन अनंताय सहस्त्र मूर्तये, सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे।सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युग धारिणे नम:।। मंत्र का जाप करें।

7. इसके बाद भगवान शिव और भगवान भगवान विष्णु को मिष्ठान का भोग लगाएं और उनकी विधिवत पूजा करें।

8.इसके बाद भगवान शिव और भगवान विष्णु की धूप व दीप से आरती उतारें। इसके बाद तुलसी के नीचे दीपक जलाएं।

9.अंत में गंगा घाट पर जाकर दीपक अवश्य जलाएं। क्योंकि इस दिन गंगा घाट पर दीपक जलाने से सभी देवताओं का आर्शीवाद प्राप्त होता है।

10. यदि आप गंगा नदी पर जाकर स्नान नहीं कर सकते तो आप घर पर ही गंगा स्नान करें और इसी प्रकार से पूजा करें।


देव दीपावली की कथा (Dev Deepawali Ki Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार त्रिपुर नामक राक्षस ने एक एक लाख वर्ष तक तीर्थराज प्रयाग में कठोर तप किया था। उसकी तपस्या से तीनों लोकों हिलने लगे थे। त्रिपुर की तपस्या देखकर सभी देवता गण भयभीत हो गए और उन्होंने त्रिपुर की तपस्या भंग करने का निश्चय किया।

इसके लिए उन्होंने अप्सराओं को त्रिपुर के पास उसकी तपस्या भंग करने के लिए भेजा लेकिन वह अप्सराएं त्रिपुर की तपस्या भंग नही कर सकी। अंत में ब्रह्मा जी को त्रिपुर की तपस्या के आगे विवश होकर उसे वर देने के लिए आना ही पड़ा। ब्रह्मा जी ने त्रिपुर के पास आकर उसे वर मांगने के लिए कहा।


त्रिपुर ने ब्रह्मा जी किसी मनुष्य या देवता के हाथों न मारे जाने का वरदान मांगा। इसके बाद त्रिपुर ने स्वर्गलोक पर आक्रमण कर दिया। सभी देवताओं ने एक योजना बनाकर त्रिपुर को भगवान शिव के साथ युद्ध करने में व्यस्त कर दिया।

जिसके बाद भगवान शिव और त्रिपुर के बीच में भयंकर युद्ध हुआ। भगवान शिव ने ब्रह्माजी और विष्णुजी की सहायता प्राप्त करके त्रिपुर का अंत कर दिया। इसी कारण से देवता अपनी खुशी को जाहिर करने के लिए दीपावली का त्योहार मनाते हैं जिसे देव दीपावली के नाम से जाना जाता है।

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