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Chhinamastika jayanti 2019 Date : छिन्नमस्तिका जयंती कब है 2019 में, जानें इसका महत्व

Chhinamastika jayanti Date 2019 : छिन्नमस्तिका जंयती 2019 में कब है (Chhinamastika jayanti Kab Hai) , क्या है छिन्नमस्तिका जंयती का महत्व (Chhinamastika jayanti Ka Mahatva) , क्या है माता छिन्नमस्तिका के व्रत की पूजा विधि (Chhinamastika jayanti) और क्या है माता छिन्नमस्तिका की व्रत कथा (Chhinamastika jayanti ki Vrat Katha) । वैशाख मास की चतुर्दशी (Vaisakh Mass Chaturdashi ) के दिन छिन्नमस्तिका जंयती (Chhinamastika jayanti) का पर्व मनाया जाता है। माता छिन्नमस्तिका दस महाविद्याओं में से धठी महाविद्या मानी जाती है। छिन्नमस्तिका जंयती पर माता की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है। छिन्नमस्तिका जंयती पर मंदिरो को फूलों और रोशनियों से सजाया जाता है। छिन्नमस्तिका जंयती पर देश-विदेश से श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए आते हैं। छिन्नमस्तिका देवी को मां चिंतपूर्णी (Chintpurni) के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार माता छिन्नमस्तिका अपने भक्तों की सभी चिंताओं को हर लेती है। माता छिन्नमस्तिका की विधिवत पूजा करने वाले व्यक्ति को माता का आर्शीवाद प्राप्त होता है और उसके जीवन की सभी चिंताओं को माता के द्वारा हर लिया जाता है। माता छिन्नमस्तिका अपने भक्तों की सभी चिंताओं को नष्ट कर देती है। इसलिए इनका दूसरा नाम चिंतपूर्णी भी है। अगर आप छिन्नमस्तिका जंयती के बारे में कुछ भी नहीं जानते तो आज हम आपको माता छिन्नमस्तिका की जंयती से जुड़ी सभी बातों के बारे में बताएंगे। तो चलिए जानते हैं माता छिन्नमस्तिका की जंयती के बारे में.....

Chhinamastika jayanti 2019 Date : छिन्नमस्तिका जयंती कब है 2019 में, जानें इसका महत्व

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छिन्नमस्तिका जंयती की तिथि (Chhinamastika jayanti Date)

17 मई 2019


छिन्नमस्तिका जंयती का महत्व (Chhinamastika jayanti Mahatva/Imortance)

माता छिन्नमस्तिका की जयंती से कुछ दिन पहले से ही मंदिरों में जोरदार तैयारियां शुरू हो जाती हैं ।माता के दरबार को फूलों और रोशनियों से दुल्हन की तरह सजाया जाता है। इस मौके पर मां दुर्गा को मंत्रो और दुर्गा सप्तशती के पाठ का आयोजन भी किया जाता है जिसमें श्रद्धालुओं सहित सभी भक्त भाग लेते हैं। इस दिन श्रद्धालुओं को लंगर परोसा जाता है जिसमें तरह-तरह के लजीज व्यंजन शामिल होते हैं।

माना जाता है माता छिन्नमस्तिका के दरबार में जो भी सच्चे मन से आता है उसकी सभी मुरादें पूरी होती है। माता का आशीर्वाद सभी पर इसी तरह बना रहे इसके लिए मां के दरबार में विश्व शांति व कल्याण के लिए मां की स्तुति का पाठ भी किया जाता है। मंदिर न्यास की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए जाते हैं। छिन्नमस्तिका जंयती पर हजारों श्रद्धालु मां की पावन पिंडी के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं और मां का आर्शीवाद प्राप्त करते हैं।


माता छिन्नमस्तिका पूजन विधि ( Mata Chhinamastika Pujan Vidhi)

1.छिन्नमस्तिका जंयती के दिन साधक को नहाकर शुद्ध काले वस्त्र धारण करने चाहिए।

2.इसके बाद चौकी पर काले रंग का वस्त्र बिछाकर छिन्नमस्तिका या माता की प्रतिमा रखकर कुमकुम , रोली और अक्षत चढ़ाने चाहिए।

3.उसके बाद धूप और दीपक दिखाकर मां की पूजा करें।

4. पूजा करते समय मां छिन्नमस्तिका के मंत्रों का जाप करें।

5.पूजा के बाद किसी निर्धन व्यक्ति या किसी ब्राह्मण को दान अवश्य दें।


माता छिन्नमस्तिका की कथा (Mata Chhinamastika jayanti Ki katha)

शास्त्रों के अनुसार माता छिन्नमस्ता की कथा इस प्रकार है ।भगवती भवानी अपनी दो सहचरियों के संग मन्दाकिनी नदी में स्नान कर रही थी। स्नान करने पर दोनों सहचरियों को बहुत तेज भूख लगी। भूख कि पीडा से उनका रंग काला हो गया। तब सहचरियों ने भोजन के लिये भवानी से कुछ मांगा। भवानी के कुछ देर प्रतिक्षा करने के लिये उनसे कहा, किन्तु वह बार-बार भोजन के लिए हठ करने लगी।

तत्पश्चात सहचरियों ने नम्रतापूर्वक अनुरोध किया - "मां तो भूखे शिशु को अविलम्ब भोजन प्रदान करती है" ऐसा वचन सुनते ही भवानी ने अपने खडग से अपना ही सिर काट दिया। कटा हुआ सिर उनके बायें हाथ में आ गिरा और तीन रक्तधाराएं बह निकली। दो धाराओं को उन्होंने सहचरियों की और प्रवाहित कर दिया। जिन्हें पान कर दोनों तृ्प्त हो गई। तीसरी धारा जो ऊपर की प्रबह रही थी, उसे देवी स्वयं पान करने लगी. तभी से वह छिन्नमस्तिका के नाम से विख्यात हुई है।

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