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Chandra Grahan 2019 : चंद्र ग्रहण कब है 2019 में, जानें चंद्र ग्रहण का समय, सूतक के समय क्या न करें और कथा

Chandra Grahan 2019 : चंद्र ग्रहण 2019 में कब (chandra grahan 2019 Mai Kab Hai) है , क्या है चंद्र ग्रहण का समय (Kya Hai chandra grahan Ka time) , और चंद्र ग्रहण के सूतक के समय क्या न करें (chandra grahan Sutak Kai samye Kya Na Kare),क्या है सूतक का समय (kya hai sutak ka time) क्या है चंद्र ग्रहण की कथा (chandra grahan Ki Katha) । अगर आप इसके बारे में नहीं जानते हैं तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। वैसे तो चंद्र ग्रहण एक खगोलिय घटना है। लेकिन हिंदू शास्त्रों में चंद्र ग्रहण को विशेष महत्व (chandra grahan Mahatva) दिया जाता है। चंद्र ग्रहण (chandra grahan) के समय कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। मानव जीवन पर इसका विशेष प्रभाव पड़ता है। इससे प्रकृति में कई बदलाव देखने को मिलते हैं। जिस तरह चंद्रमा के प्रभाव (chandrma Ka Prabhav) से समुद्र में ज्वार भाटा आता है। उसी तरह मनुष्यों के मन पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। अगर आप चंद्र ग्रहण की इन बातों के बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। तो चलिए जानते हैं चंद्र ग्रहण की तिथि (chandra grahan ki tithi) , चंद्र ग्रहण का समय (chandra grahan timing) , और चंद्र ग्रहण के सूतक के समय (chandra grahan Sutak time) क्या न करें , सूतक का समय (Sutak ka time) चंद्र ग्रहण की कथा (chandra grahan ki katha)

Chandra Grahan 2019 : चंद्र ग्रहण कब है 2019 में, जानें चंद्र ग्रहण का समय, सूतक के समय क्या न करें और कथा

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चंद्र ग्रहण की तिथि (chandra grahan tithi)

16 -17 जूलाई

चंद्र ग्रहण सूतक का समय

सूतक प्रारंभ- शाम 3 बजकर 55 मिनट से (16 जूलाई 2019)

सूतक समाप्त- शाम 4 बजकर 29 मिनट तक (17 जूलाई 2019)


चंद्र ग्रहण का समय (chandra grahan timing)

रात 1 बजकर 32 मिनट से

सुबह 4 बजकर 29 मिनट तक

चंद्र ग्रहण सूतक के समय क्या न करें (chandra grahan sutak Ka samye Kya Na Kare )

1.चंद्र ग्रहण का सूतक लगने पर किसी भी काम की शुरूआत न करें।

2. चंद्र ग्रहण का सूतक लगने पर न तो खाना बनांए और न हीं खांए।

3.इस समय न तो पूजा करें और न हीं मूर्ति स्पर्श करें।

4.चंद्र ग्रहण के सूतक के समय न तो नहाना चाहिए और न हीं मलमूत्र का त्याग करना चाहिए।

5.चंद्र ग्रहण के सूतक अपने ईष्ट के मंत्रों का जाप करना चाहिए।


चंद्र ग्रहण की कथा (chandra grahan ki katha)

पौराणिक कथानुसार समुद्र मंथन के दौरान जब देवों और दानवों के साथ अमृत पान के लिए विवाद हुआ तो इसको सुलझाने के लिए मोहनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। जब भगवान विष्णु ने देवताओं और असुरों को अलग-अलग बिठा दिया।

लेकिन असुर छल से देवताओं की लाइन में आकर बैठ गए और अमृत पान कर लिया। देवों की लाइन में बैठे चंद्रमा और सूर्य ने राहु को ऐसा करते हुए देख लिया। इस बात की जानकारी उन्होंने भगवान विष्णु को दी, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया।

लेकिन राहु ने अमृत पान किया हुआ था, जिसके कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई और उसके सिर वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु के नाम से जाना गया। इसी कारण राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को ग्रस लेते हैं। इसलिए चंद्रग्रहण होता है।

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