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Buddha Purnima 2019 : कैसे गौतम बुद्ध के विचारों को अपनाकर दलाई लामा, राहुल सांकृत्यायन और ओशो बने महान, आप भी जानें

Buddha Purnima 2019 : बुद्ध पूर्णिमा 2019 (Buddha Purnima 2019) में 18 मई 2019 शनिवार के दिन पड़ रही है।बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध जंयती के रूप में भी मनाया जाता है। बुद्ध ने ही बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। भगवान बुद्ध को विचारों को अनुसरण न केवल भारत में बल्कि पूरी दूनिया में किया जाता है। दुनिया के महान लोगों में गिने जाने वाले जैसे दलाई लामा (Dalai lama), ओशो (osho)और साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन (rahul sankrityayan) ने भी बुद्ध के इन विचारों को अपने जीवन में उतारा और दुनिया को इससे अवगत भी कराया। बुद्ध जंयती के रूप में गौतम बुद्ध (Goutam Budh) की 2581वीं जयंती इस बार मनाई जाएगी।अगर आप बुद्ध के इन विचारों के बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। तो चलिए जानते हैं बुद्ध के इन विचारों के बारे में......

Buddha Purnima 2019 : कैसे गौतम बुद्ध के विचारों को अपनाकर दलाई लामा, राहुल सांकृत्यायन और ओशो बने महान, आप भी जानें

Buddha Purnima 2019 : बुद्ध पूर्णिमा 2019 (Buddha Purnima 2019) में 18 मई 2019 शनिवार के दिन पड़ रही है।बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध जंयती के रूप में भी मनाया जाता है। बुद्ध ने ही बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। भगवान बुद्ध को विचारों को अनुसरण न केवल भारत में बल्कि पूरी दूनिया में किया जाता है। दुनिया के महान लोगों में गिने जाने वाले जैसे दलाई लामा (Dalai lama), ओशो (osho)और साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन (rahul sankrityayan) ने भी बुद्ध के इन विचारों को अपने जीवन में उतारा और दुनिया को इससे अवगत भी कराया। बुद्ध जंयती के रूप में गौतम बुद्ध (Goutam Budh) की 2581वीं जयंती इस बार मनाई जाएगी।अगर आप बुद्ध के इन विचारों के बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। तो चलिए जानते हैं बुद्ध के इन विचारों के बारे में......


बुद्ध के मानव जीवन को लेकर विचार (Buddha ke Manav Jivan ko Lekar Vichar)

बुद्ध के अनुसार सोच -विचार करना मानव का स्वाभाव है। इस विचार से दो बातें सीखी जा सकती हैं। एक सफलता और दूसरी असफलता के बारे में, हमें अपनी सफलता के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने एक और बात कही मनुष्य जीवन भर सीखता रहता है। जीवन में हम चाहें कोई व्यक्ति छोटा हो या बड़ा हम प्रत्येक व्यक्ति से सीखते हैं।

जिस तरह महात्मा बुद्ध ने अपने निरंतर प्रयास से बुद्धत्व को प्राप्त किया। उसी प्रकार अन्य मनुष्य भी अपने जीवन के लक्ष्य को निरंतर प्रयास से प्राप्त कर सकते हैं। बुद्ध के अनुसार प्रत्येक मनुष्य में बुद्ध के अंश मौजूद हैं। निरंतर कर्म करने से बुद्धत्व को प्राप्त किया जा सकता है।


गृहस्थ जीवन को लेकर बुद्ध के विचार (Grahsth Jivan Ko Leker Buddha ke Vichar)

महान साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन महात्मा बुद्ध के विचारों से अत्यंत प्रभावित थे। वह भगवान बुद्ध के विचारों से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने बौद्ध धर्म को ही अपना लिया था। बुद्ध ने अपने जीवन में सन्यांस को ग्रहण किया। लेकिन बुद्ध ने हमेशा अपने उपदेशों में कहा है कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी सच्चा ज्ञान पाया जा सकता है। इसके लिए सिर्फ कर्म पथ पर चलना ही एक मार्ग है।।राहुल सांकृत्यायन भगवान बुद्ध के विचारों से प्रभावित होकर कहा कि कर्म ही शांति का मार्ग है।

उसे हमेशा प्रसन्नचित होकर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भी सबसे बड़ा सवाल है कि आप किस तरह के कर्म को करते हैं और किसके लिए कर रहे हैं। राहुल सांकृत्यायन के अनुसार कर्म ऐसा होना चाहिए जो देश और समाज के हित में हो। ऐसा कर्म जिससे न केवल आप प्रसन्न हो बल्कि आपके अपनों को भी प्रसन्नता हो और शांति मिले। बुद्ध का संदेश है 'अप्प दीपो भव'। मतलब अपने दीपक स्वयं बनें।


बुद्ध का मुक्ति को लेकर विचार (Buddha ka Mukti Ko Lekar Vichar)

ओशो भी महात्मा बुद्ध के विचारों का अनुसरण करते हैं और एक ही बात याद रखने के लिए कहते हैं। कि उनका पूरा ध्यान द्रष्टा बनने पर रहा है। वे खुद को ही द्रष्टा मानते हैं। ओशो के अनुसार द्रष्टा का अर्थ है सत्य का दर्शन करना। वे नहीं चाहते थे कि सामान्य लोग दर्शन के ऊहापोह में उलझें। दार्शनिक ऊहापोह के कारण ही करोड़ों लोग दृष्टि को उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। आसानी से सिद्धांत मिल जाएं, तो सत्य की खोज के लिए कोई भी तपस्या नहीं करना चाहता है।

बुद्ध कभी नहीं कहते की आप दर्शन का अनुसरण करें । लेकिन जिनके पास आंखें है । वह ज्ञान के प्रति आंखे बंद किए हुए हैं और वह अपने भीतरी प्रकाश को देखना चाहते हैं। ऐसे लोगों को बुद्ध ने ध्यान का रास्ता दिखाया। ध्यान किए बिना मन की आंखे नहीं खुल सकती। विचारों की दृष्टि से मनुष्य अपनी आंखे खो देता है। इसलिए ध्यान के लिए सभी विचारों से मुक्त होना अनिवार्य है।


बुद्ध का दया, अहिंसा, क्षमा को लेकर विचार (Buddha Ka Daya ,Ahinsha or Shama Ko Lekar Vichar)

बौद्ध धर्म के गुरु दलाई के अनुसार महात्मा बुद्ध ने सच्चे ज्ञान को तभी प्राप्त किया जब उनके अंदर दया, क्षमा, करुणा, अहिंसा और मानवता का भाव आया। दलाई लामा यह भी कहते हैं कि ये सभी भाव एक दिन में जगाए या पैदा नहीं किए जा सकते हैं। इसके लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है।

इसके लिए माता-पिता को बचपन में ही अच्छे संस्कार डालने होंगे। समग्र रूप से स्वयं को ज्ञान के माध्यम से जाग्रत करना होगा। स्वयं को अच्छे कर्मो के प्रति मोड़ना होगा। इसके लिए निरंतर प्रयास भी जरुरी है।

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